Gyandeep में होली-मिलन समारोह: लोकगीत-लोकनृत्यों की सरस धारा प्रवाहित

Holi-union ceremony in Gyandeep
Gyandeep में होली-मिलन समारोह: लोकगीत-लोकनृत्यों की सरस धारा प्रवाहित

मथुरा। ब्रज में अभी 50 दिनों की पारम्परिक होली चल रही है और इसी श्रंखला में गोवर्धन रोड स्थित Gyandeep शिक्षा भारती सभागार में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने नृत्य की थिरकनों के साथ होली लोकगीतों की सरस धारा प्रवाहित की।
समारोह का शुभारम्भ ज्ञानदीप के संस्थापक सचिव मोहन स्वरूप भाटिया द्वारा अबीर-गुलाल से सराबोर राधा-कृष्‍ण की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर किया।
समारोह में विशिष्‍ट अतिथि सुप्रसिद्ध आकाशवाणी कलाकार डा0 सीमा मोरवाल ने ‘छोटे से नन्हें से, देखो गोरी बालम के बालम छोटे से‘, ‘हरी मिर्चें ततैया बालम नाँइ जानूँ रे‘ आदि बालम आधारित गीतों के मध्य होली लोकगीतों की तान छेड़ कर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया।
संगीताचार्य डा0 राजेन्द्र कृष्‍ण अग्रवाल ने होली छन्द सुनाते हुए अष्‍टछाप कवियों का भावपूर्ण स्मरण किया जिन्होंने होली पदों की रचना कर राधा कृश्ण की होली की कल्पनाओं को साकार रूप प्रदान किया है।
ज्ञानदीप प्रबन्ध समिति के उपाध्यक्ष डा0 मनोज मोहन शास्त्री ने कहा कि होली को शास्त्रीय परम्पराएँ वर्तमान युग में प्रेम-प्रीति शान्ति और सद्भाव की सन्देशवाहक हैं।
ज्ञानदीप के संस्थापक सचिव मोहन स्वरूप भाटिया ने सास-बहू, चतुर्वेदी समाज के मिठाइयों में पगे नामकरण और ‘पतित‘ शब्द के अंग्रेजी रूप ‘पैटिट‘ सम्बन्धी प्रसंग सुना कर श्रोताओं को खूब हँसाया।
होली मिलन समारोह में योगेन्द्र त्यागी ने शायरी, श्रीमती भावना शर्मा, श्रीमती नेहा शर्मा, कु0 अदिति एंव श्रीमती पूनम ने रसिया, कु0 अंकिता, कु0 मीनू सोनी, कु0 प्रियंका, कु0 गुंजन शर्मा एवं श्रीमती गुरविन्दर कौर आदि ने नृत्य प्रस्तुतियाँ दीं।
अन्त में उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा आमंत्रित जनों ने सामूहिक रूप से ‘आज बिरज में होरी रे रसिया‘ का गायन करते हुए होली के उन्मुक्त उल्लास की अभिव्यक्ति की।
कार्यक्रम का समापन करते हुए षैक्षिक निदेषक के. जी. माहेष्वरी ने कहा कि होली षुभ-संकल्प का पर्व है। धन्यवाद ज्ञापन ज्ञानदीप की प्रधानाचार्या श्रीमती निधि भाटिया ने किया। संचालन श्रीमती भावना षर्मा तथा श्रीमती ईशा सहगल द्वारा किया गया।

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