हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत ने कहा, ये जीत स्वास्थ्यकर्मियों को समर्पित

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने टोक्यो ओलंपिक में भारत की ऐतिहासिक जीत को देश के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को समर्पित किया है.
लगभग चार दशकों के सूखे के बाद टोक्यो ओलंपिक में मिली शानदार जीत के बाद मनप्रीत सिंह के पास कहने को शब्द नहीं थे.
इससे पहले भारत ने हॉकी में 1980 में मॉस्को में स्वर्ण पदक जीता था लेकिन उसके बाद भारत कोई भी पदक नहीं जीत पाया. लेकिन, इस बार हॉकी टीम ने इतिहास रचते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया है.
इस जीत पर मनप्रीत सिंह ने कहा, “मैं नहीं जानता कि इस वक़्त क्या कहूं, ये जबरदस्त था. जो कोशिश की गई, हम खेल में 3-1 से पीछे थे. मुझे लगता है कि हम इस पदक को पाने के योग्य हैं. हमने बहुत मेहनत की थी, पिछले 15 महीने हमारे लिए बहुत मुश्किलों भरे थे. हम बैंगलुरू में थे और हममें से कुछ को कोविड भी हो गया था.”
“हम इस पदक को भारत में लोगों की जान बचाने वाले डॉक्टर और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को समर्पित करना चाहते हैं.”
29 साल के मनप्रीत सिंह पंजाब में जलंधर के रहने वाले हैं. जर्मनी से मिली जबरदस्त चुनौती को लेकर उन्होंने कहा, “वो बहुत मुश्किल था. उन्हें आख़िरी छह सैकेंड में पैनल्टी कॉर्नर मिल गया. हमने सोचा कि हमें इसे किसी भी हाल में रोकना है. ये वाकई कठिन है . मेरे पास अब शब्द नहीं हैं.”
कप्तान ने कहा, “हमें लंबे समय से कोई पदक नहीं मिला था. अब हमारा आत्मविश्वास बढ़ गया है. हम ये कर सकते हैं. अगर हम ओलंपिक में ऐसा कर सकते हैं तो कहीं भी कर सकते हैं.”
उधर हॉकी प्लेयर मनदीप सिंह के परिवार ने भारतीय टीम की जीत का जश्न नाच-गा कर मनाया.
मनदीप के पिता रविंदर सिंह ने कहा कि भारत ने आज जो कुछ हासिल किया है उसे देखकर वे निशब्द हैं.
-एजेंसियां

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