दक्षिण अफ़्रीका में इतिहास रचा: देश की कैबिनेट में 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल

दक्षिण अफ़्रीका के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब देश की कैबिनेट में 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं. इनमें एक महिला विपक्षी पार्टी की भी है, जो अपने आप में एक अभूतपूर्व कदम है.
दरअसल, दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने अपने नये मंत्रिमंडल की घोषणा की है.
रामाफोसा ने विपक्षी पार्टी की अनुभवी राजनेता पेट्रीसिया डे लिली को अपनी कैबिनेट में शामिल किया है. वो गुड पार्टी की तरफ से चुनाव में खड़ी थीं. उन्हें इंफ़्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट मंत्रालय दिया गया है.
8 मई को अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस पार्टी ने आम चुनाव में जीत हासिल की थी.
कैबिनेट में आधी सीटों पर महिलाओं को शामिल करने वाला कदम एक सुखद आश्चर्य है. यह कदम दर्शाता है कि देश के मखिया ‘बुद्धिमान’ हैं.
इस पर कैबिनेट की 50 प्रतिशत महिलाएं क्या सोच रही हैं?
दक्षिण अफ्ऱीका के लोगों ने कैबिनेट में लैंगिक समानता का स्वागत किया है. बिज़नेस यूनिटी साउथ अफ्ऱीका (बुसा) की तान्या कोहन कहती हैं, ”यह अच्छे संकेत हैं कि हमारे पास अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए डॉ. नालेदी पांदोर जैसी योग्य मंत्री हैं.”
गुरुवार को राष्ट्रपति रामाफोसा कुछ छात्रों को संबोधित किया, जहां उन्होंने मुद्दा उठाया कि ‘अपने कार्यक्षेत्र में अपने साथ अपनी एक बच्ची को सभी साथ लेकर जाएं.’
इसी कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने छात्रों से कहा कि वे छोटी उम्र से ही वकील बनना चाहते थे. कई लोगों का मानना है कि महिलाओं की उपस्थिति से गरीबी उन्मूलन में मदद मिलेगी, ख़ासकर ग्रामीण क्षेत्रों में.
इस बार के कैबिनेट गठन में एक और हैरान करने वाला फैसला लिया गया है. यह फ़ैसला है केपटाउन की पूर्व मेयर पेट्रीसिया डे लिल को मंत्री के तौर पर शामिल करना. विपक्षी डेमोक्रेटिक गठबंधन के साथ सत्ता संघर्ष के चलते उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर गुड पार्टी का गठन किया था.
रामाफोसा ने कैबिनेट मंत्रियों की संख्या 36 से घटाकर 28 कर दी है.
हालांकि विपक्षी दल इकॉनोमिक फ्ऱीडम फ़ाइटर पार्टी ने कैबिनेट को छोटा करने के कदम को ‘बेईमानी’ भरा फैसला बताया है. उन्होंने कहा कि कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या कम करके उप-मंत्रियों की संख्या को बढ़ाया गया है.
रामाफोसा ने चुनावों के दौरान भ्रष्टाचार की जड़ को ख़त्म करने का प्रण लिया था. हालांकि दक्षिण अफ़्रीकी में मौजूद संवाददाताओं का कहना है कि उनके इस प्रण पर सवाल खड़े होते हैं क्योंकि उन्होंने उप राष्ट्रपति डेविड मबुज़ा उनके पद पर बरकरार रखा है.
मबुज़ा पर राजनीतिक हत्याओं और गैरक़ानून टेंडर में शामिल होने के आरोप लगे हैं, हालांकि वो इनसे इंकार भी करते रहे.
कैबिनेट में प्रवीण गोर्धन और इब्राहिम पटेल, दो भारतीयमूल के मंत्री हैं.
प्रवीण गोर्धन को सार्वजनिक उद्यम मंत्री के रूप में बरकरार रखा गया है. वे दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद विरोधी संघर्ष के जाने-माने नेता रहे हैं. हालांकि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं.
आरोपों के मुताबिक उन्होंने बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया का पालन किए राजस्व सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी को समय से पहले रिटायरमेंट दिया था. प्रवीण गोर्धन ने इन आरोपों को अदालत में चुनौती दी है.
-BBC

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