हिंदुओं की आस्था है कि अयोध्या में जन्मे थे श्रीराम, कोर्ट इससे आगे न जाए: एस वैद्यनाथन

नई द‍िल्ली। अयोध्या भूमि विवाद मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को छठे दिन की सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष के वकील एस वैद्यनाथन ने बेंच के सामने स्कंद पुराण का उदाहरण देते हुए अपनी दलीलें पेश की। उन्होंने कहा कि लोगों में भगवान राम के प्रति विश्वास और आस्था के परे कोर्ट इस तथ्य पर नहीं जा सकती कि वे तर्कसंगत हैं या नहीं। रिवाज है कि सरयू नदी में स्नान करने के बाद राम जन्मभूमि के दर्शन का लाभ मिलता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- ये पुराण कब लिखा गया था? वैद्यनाथन ने जवाब दिया- यह पुराण वेद व्यास द्वारा महाभारत काल में लिखा गया, लेकिन कोई नहीं जानता कि यह कितना पुराना है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- जो आप कह रहे है उसमें राम जन्मभूमि के दर्शन के बारे में कहा गया है, देवता के बारे में नहीं? वैधनाथन ने कहा- वह इसलिए क्योंकि जन्मस्थान खुद में ही एक देवता है। फ्रेंच ट्रेवलर विलियम फिंच 1608 से 1611 तक अयोध्या में रहे और उन्होंने एक किताब लिखी थी, जिसमें राम जन्मभूमि का अस्तित्व स्पष्ट है। दूसरे यात्री जोसफ टाइपन बैरल थे, जो अयोध्या आए और उन्होंने किताब में राम जन्मभूमि का जिक्र किया था। लेखक विलियम फोस्टर ने ‘अर्ली ट्रैवल्स इन इंडिया’ बुक में उन सात अंग्रेज यात्रियों के बारे में बताया है, जो अयोध्या के बारे में लिख चुके हैं।

वैद्यनाथन ने अयोध्या प्रकरण की सुनवाई में छठे दिन बहस शुरू करते हुये साल 1608-1611 के दौरान भारत आए अंग्रेज व्यापारी विलियम फिंच के यात्रा वृतांत का उल्लेख किया जिसमें दर्ज किया गया था कि अयोध्या में एक किला या महल था जहां, हिंदुओं का विश्वास है कि भगवान राम का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा, ‘यह लोगों का विश्वास है कि यही वह स्थान है जहां भगवान राम का जन्म हुआ था। इसे हमेशा से ही उनका जन्म स्थान माना गया है।’ 

वैद्यनाथन ने कहा कि फिंच का यात्रा वृत्तांत ‘अर्ली ट्रैवेल्स टू इंडिया’ पुस्तक में प्रकाशित हुआ। इसमें इस बात का उल्लेख है कि हिंदुओं का बहुत पहले से यही मानना है कि अयोध्या ही भगवान राम का जन्मस्थान है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस बात पर लोगों की आस्था को लेकर जोर देते हुये अपनी दलीलों के समर्थन में ब्रिटिश सर्वेक्षक मोंटगोमेरी मार्टिन और मिशनरी जोसेफ टाइफेंथर सहित अन्य के यात्रा वृत्तांतों का भी जिक्र किया।

‘राम लला विराजमान’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ से कहा कि ‘पुराणों’ के अनुसार हिंदुओं का यह विश्वास है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। न्यायालय को यह नहीं देखना चाहिए कि यह कितना तर्कसंगत है। पीठ में न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

मुस्लिम नहीं कर सकते विवादित भूमि पर दावा : वैद्यनाथन
इससे पहले, सुनवाई शुरू होने पर वैद्यनाथन ने कहा कि वह पहले दस्तावेजी साक्ष्य के बारे में बहस करेंगे और फिर इस मामले के मौखिक सबूत तथा पुरातत्व सर्वेक्षण के साक्ष्यों पर आएंगे। ‘राम लला विराजमान’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने मंगलवार को शीर्ष अदालत से कहा कि मुस्लिम अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर अपना दावा नहीं कर सकते क्योंकि संपत्ति का किसी भी तरह का बंटवारा देवता को ही नष्ट’ करने जैसा होगा।

शीर्ष अदालत राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई कर रही है। उच्च न्यायालय ने 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन पक्षकारों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था।

– एजेंसी

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