जानिए हिंदू संस्कृति में तड़के स्नान करना क्‍यों है जरूरी

हिंदू संस्कृति में पुराने जमाने  के लोग सूरज निकलने से पहले स्नान करते थे। इस तरह सुबह के तड़के स्नान से हिन्दू धर्म में कई फायदे गिनाए गए हैं। कब और किस तरह स्नान करके लोग घर की समृद्धि बढ़ा सकते हैं, इसके बारे में हम आपको बताते हैं।

सही समय पर नहाने से धन, घर में सुख-शांति और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है। सुबह के स्नान को धर्म शास्त्र में 4 उपनाम दिए हैं।

1. मुनि स्नान- सुबह सूरज निकलने से पहले 4 से 5 बजे के बीच किया जाता है। मुनि स्नान सर्वोत्तम है। इससे घर में सुख-शांति, समृद्धि, विद्या, बल, आरोग्य, चेतना सदैव बनी रहती हैं।

2. देव स्नान- यह स्नान सुबह 5 से 6 बजे के बीच किया जाता है। देव स्नान उत्तम है। इससे जीवन में यश, किर्ती, धन, वैभव, सुख-शान्ति, संतोष का हमेशा वास रहता
है।
3. मानव स्नान- यह स्नान सुबह 6 से 8 बजे के बीच किया जाता है। इस दौरान स्नान करने वालों को काम में सफलता, अच्छा भाग्य, अच्छे कर्मों की सूझ ता मिलती ही है, साथ ही परिवार में एकता भी बनी रहती है।
4. राक्षसी स्नान- ये वो स्नान है जिसे अगर सुबह 8 बजे के बाद किया जाता है तो घर में दरिद्रता, हानि, कलेश, धन हानि, परेशानी आती है। यह स्नान हिन्दू धर्म में निषेध है।

धर्म ग्रंथों के अनुसार हिंदू संस्कृति में स्नान का बड़ा महत्व है साल भर में कई ऐसे खास दिन आते हैं, जब लोग मोक्ष की कामना के साथ पवित्र नदियों में डूबकी लगाते हैं।

बहरहाल, घर में स्नान का भी महत्व बताया गया है। सभी जानते हैं कि शरीर की स्वच्छता के लिए रोज नहाना चाहिए, लेकिन किस समय स्नान करना है, यह भी उतना ही अहम है।

 

धर्म ग्रंथों में मुनि स्नान को सर्वोत्तम बताया गया है। वहीं देव स्नान उत्तम है। मानव स्नान को सामान्य बताया गया है और राक्षसी स्नान को निषेध करार दिया गया है। इसीलिए कहा जाता है कि हमें हर स्थिति में सुबह 8 बजे तक स्नान कर लेना चाहिए।

जितनी जल्दी स्नान, उतना बड़ा फल

हर स्थान का अलग-अलग फल या प्रभाव है। यानी जितनी जल्दी स्नान करेंगे, उतना बड़ा फल मिलेगा। मुनि स्नान करने से घर में सुख-शांति ,समृद्धि, विद्या, बल, आरोग्य आता है। वहीं देव स्नान से जीवन में यश, कीर्ति, धन-वैभव, सुख, शान्ति, संतोष आता है। जो लोग मानव स्नान करते हैं, उन्हें काम में सफलता, भाग्य, अच्छे कर्मों की सूझ, परिवार में एकता मिलती है।

वहीं जो लोग राक्षसी स्नान करते हैं कि उन्हें जीवन में दरिद्रता, हानि, कलेश, धन हानि का सामना करना पड़ता है।
– एजेंसी