जॉर्जियायी महाकाव्य के हिंदी अनुवाद का लोकार्पण

नई दिल्ली। हर राष्ट्र की अपनी काव्यमयी विरासत होती है जो व्यक्ति की सामूहिक चेतना को समृद्ध बनाती है। जैसे इंग्लैंड में शेक्सपीयर, इटली में दांते, रूस में पुश्किन, भारत में कालिदास; इसी तरह जॉर्जिया में शोथा रुस्थावेली| जॉर्जिया की काव्यात्मक विरासत लगभग हज़ारों सालों से समृद्ध हैं, और शोथा रुस्थावेली प्रभावी रूप से एक बेजोड़ कवि हैं ।

TheKnightInPanthersSkin
The Knight in the Panther’s Skin is a Georgian medieval epic poem, written in the 12th century by Georgia’s national poet Shota Rustaveli

जॉर्जियायी कवि शोथा रुस्थावेली के महाकाव्य “नाईट इन द पैंथर’स स्किन” के उत्कृष्ट हिंदी अनुवाद को पेश करते हुए हम गौरवान्वित हैं| इस महाकाव्य में हिंदुस्तानी युवा राजकुमार, तारियल की साहसिक गाथा का वर्णन है| ये छंदबद्ध अनुवाद जॉर्जिया और भारत की सदियों पुरानी मित्रता को एक भेंट है| यात्रा बुक्स द्वारा हिंदी में प्रकाशित “शेर की खाल वाला सामंत शूरवीर” का लोकार्पण नई दिल्ली में किया गया|

इस अवसर पर साहित्य, प्रकाशन, मनोरंजन और राजनीति से कई विशिष्ट हस्तियों ने शिरकत की| पुस्तक लोकार्पण किया भारत में जॉर्जिया के राजदूत माननीय श्री आर्चिल द्ज़ुलीआश्विली, जॉर्जिया के विदेश मामलों के उप-मंत्री माननीय श्री एलेक्सेंडर ख्व्तीसियाश्विली, संसद सदस्य डॉ. शशि थरूर, इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (ICCR) के डायरेक्टर-जनरल श्री दिनेश के. पट्टनायक, टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री संजॉय के. रॉय, अदाकारा और निर्माता सुश्री वाणी त्रिपाठी टिकू और यात्रा बुक्स की प्रकाशक नीता गुप्ता ने|

यह पुस्तक दिल्ली में स्थित जॉर्जियाई एम्बेसी, ICCR नई दिल्ली तथा यात्रा बुक्स के सहयोग से प्रकाशित है।

भारत में जॉर्जिया के राजदूत श्री आर्चिल द्ज़ुलीआश्विली ने इस विशेष अवसर पर कहा, “इस मुश्किल समय में, जब दुनिया एक महामारी का सामना कर रही है, तब लेखक और चिंतक आशा के सबसे बड़े स्रोत बनते हैं… दौर चाहे कोई भी हो, पर शांति और सोहार्द्र ही हर पीढ़ी का सपना रहा है| जॉर्जियाई महाकाव्य ‘शेर की खाल वाला सामंत शूरवीर’ भी इसी पर आधारित है| जब मानवता के साथ धोखा होता है, तो न्याय की मांग उठती है| और इसी न्याय के संघर्ष में एक हिंदुस्तानी नायक ने अहम् भूमिका निभाई है| भारत इतिहास में भी सही के साथ था और वर्तमान समय में भी महामारी से लड़ने में वो विश्व की मदद कर रहा है|”

इसके बाद अदाकारा और निर्माता वाणी त्रिपाठी टिकू ने प्रभावशाली अंश-पाठ के माध्यम से इस ओजस्वी महाकाव्य के भाव को श्रोताओं के समक्ष रखा|

साहित्य का काम वस्तुतः सरहदों को मिटाकर भिन्न देशों को करीब लाना होता है, और जॉर्जिया-भारत की इस संयुक्त परियोजना के अवसर पर कई बार भारत और जॉर्जिया के गहन संबंधों को आँका गया| जॉर्जिया के विदेश मामलों के उप-मंत्री माननीय एलेक्सेंडर ने भारत और जॉर्जिया के प्राचीन और गहन संबंधों पर बात की| उन्होंने बताया कि दोनों देशों की मित्रता सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और व्यापारिक स्तर पर है| और भविष्य में ये सम्बन्ध और प्रगाढ़ ही होगा| इस अवसर पर उन्होंने भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और उनके आदर्शों को भी याद किया|

संसद सदस्य डॉ. शशि थरूर ने इस महाकाव्य के भारतीय सम्बन्ध से रोमांचित होते हुए, जॉर्जिया के आधुनिक आदर्शों को भारतीय राजकुमार की देन बताया| इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि महाकाव्यों के विषय में सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि अक्सर वो किसी विदेशी धरती से जुड़े या प्रभावित होते हैं| इसके संदर्भ में उन्होंने महाभारत का जिक्र किया और बताया कि हमारे अनेक ग्रंथों पर फारसी व अरबी प्रभाव देखने को मिलता है| “यह महाकाव्य राष्ट्रों से परे साहित्य का उत्सव है।”

इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन के डायरेक्टर-जनरल श्री दिनेश के. पट्टनायक ने इस महाकाव्य के बेहतरीन अनुवाद से प्रभावित होते हुए कहा, “जॉर्जिया की शब्दावली और व्याकरण बहुत मुश्किल है, लेकिन फिर भी इतने खूबसूरत अनुवाद के लिए प्रकाशक और अनुवादक की प्रशंसा की जानी चाहिए| दुनिया में सबसे ज़्यादा छपने वाली किताबों में बाइबिल का पहला स्थान है, और उसके बाद सबसे ज्यादा छपने वाली शोथा रुस्थावेली की ये किताब है| इस किताब का 60 से अधिक भाषाओँ में अनुवाद हो चुका है|”

विख्यात लेखिका तथा यात्रा बुक्स की निदेशक नमिता गोखले का कहना है, “यह प्रेरणादायक पुस्तक साहित्य और सांस्कृतिक-संयुक्तता के पार एक नए संसार की रचना करती है। इसमें कथानक और कल्पना की विजय है।”

यात्रा बुक्स की प्रकाशक नीता गुप्ता ने इस महाकाव्य के विषय में कहा, “यात्रा बुक्स के लिए बड़े गर्व की बात है कि हमें इस महाकाव्य के अनुवाद कार्य से जुड़ने मौका मिला। इस कहानी के नायक भारतीय है, तो एक तरह से ये अनुवाद हमारे नायक की ‘घर वापसी’ ही है|”

हिंदी अनुवाद डॉक्टर भूपिंदर अज़ीज़ परिहार ने और इस पुस्तक की साज-सज्जा मुंबई स्थित चित्रकार ओंकार फोंडेकर ने की है।
– Legend News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *