हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा, सार्वजनिक मार्ग पर बने धार्मिक स्थल हटाए क्‍या ?

लखनऊ। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या 1 जनवरी 2011 के बाद किसी सार्वजनिक मार्ग पर बना धार्मिक स्थल हटाया गया है?
पूनम रानी गौतम व अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस इरशाद अली की वैकेशन बेंच ने सरकार को जवाब देने के लिए चार सप्ताह और याची पक्ष को इसके बाद के दो सप्ताह का समय दिया है।
याचिका में सार्वजनिक मार्ग का अतिक्रमण कर बन रहे एक धार्मिक स्थल का मुद्दा उठाया गया है। इसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 3 जून 2016 को लवकुश व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों के बावत भी राज्य सरकार को जवाब देने का आदेश दिया। इस मामले में कोर्ट ने 3 जून 2016 को कहा था कि मुख्य सचिव सभी जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी कर यह सुनिश्चित करें कि किसी सार्वजनिक मार्ग पर धार्मिक निर्माण न हो सके।
अगर 1 जनवरी 2011 के बाद ऐसा निर्माण हुआ है तो तुरंत हटाया जाए। इसके अलावा कोर्ट ने 1 जनवरी 2011 से पहले ऐसे निर्माण स्थानांतरित करने के भी आदेश दिए थे। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए थे कि 10 जून 2016 या उसके बाद सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण कर धार्मिक स्थल न बनने पाए।
-एजेंसी

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