मथुरा का ये हाल दो दिन पहले हुआ होता…तो कई नप जाते

मथुरा। जन्माष्टमी पर हुई बार‍िश ने एक बार फि‍र मथुरा ज‍िला प्रशासन और नगर न‍िगम अध‍िकार‍ियों की कार्यशैली कठघरे में है। वो तो इन अध‍िकार‍ियों का सौभाग्य था कि जन्माष्टमी पर इंद्रदेव मेहबान रहे और पानी नहीं बरसा जबक‍ि मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने लाव-लश्कर के साथ यहां मौजूद थे। उनका दौरा सकुशल निपट भी गया और जिले के अधिकारियों ने राहत की सांस ली। परंतु जन्माष्टमी के ठीक एक दिन बाद दोपहर 12 बजे से जो बादल बरसे तो नगर में चारों तरफ पानी ही पानी नजर आने लगा। न नालों से निकला न नालियों से। नगर की मुख्य सड़कें तो छोड़िए एनएच-2 पर घुटनों तक पानी हिलोरें ले रहा था। एक ही दिन की बारिश ने तथाकथित “अच्छे कामों” की पोल खोल कर रख दी।

Heavy rains in Mathura- results Drodging and drowning
Heavy rains in Mathura- results Drodging and drowning

एनएच-टू से बात शुरू करते हैं। वर्ष 2013 में इसे और विस्तार देने के लिए सिक्स लेन का टेंडर हुआ और देश की नामी गिरामी अनिल अंबानी वाली रिलाइंस को इसका ठेका मिल गया। इसके बाद ढर्रे पर चलते हुए बंदरबांट शुरू हुआ और दिल्ली से आगरा तक यह काम कई टुकड़ों में कई सारी कंपनियों और ठेकेदारों को बंट गया। निर्धारित समय सीमा से लगभग तीन गुना समय में भी यह काम पूरा नहीं हो पाया और अब जब पूरा हुआ भी तो कैसा क‍ि अब जगह-जगह गड्ढे बन चुके हैं जो बारिश में ताल-तलैया में बदलते जा रहे हैं।

हकीकतन कुछ समय पूर्व तक जब यह एनएच-टू मात्र फोर लेन था तब शायद ही कभी पानी इस पर भरा हो, लेकिन अब तो ऐसा लगता है जैसे यह राष्ट्रीय राजमार्ग न होकर कोई स्थानीय शहरी सड़क हो। जन्‍माष्‍टमी पर हुई बार‍िश के बाद छाता से लेकर गोवर्धन चौराहे तक कई जगह इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी भरा हुआ था। नयति हॉस्‍पीटल के सामने तो यह हाल था कि अनेक वाहन पानी भर जाने के कारण बंद हो गए और वाहनों की लंबी लाइन लग गई। पानी निकासी के जो रास्ते बनाए जाते हैं वे टूटे पड़े थे और उनमें इस कदर गाद भरी थी कि पानी सड़क से निकल ही नहीं रहा था। इस बचकाना निर्माण कार्य को देख कितने लोगों ने एनएचआई को जी भर कर कोसा।

मसानी रोड, भूतेश्वर चौराहे के पास कृष्णानगर, स्टेशन रोड, कोतवाली रोड, रोडवेज डिपो, दफ्तर, मोतीकुंज रोड आदि शहर की कोई ऐसी सड़क नहीं बची जहां पानी न भरा हो।

अब जरा कल्पना कीजिए यही पानी जन्माष्टमी के दिन भरा होता तो शायद मुख्यमंत्री की गाड़ी रामलीला मैदान तक ही नहीं पहुंच पाती। जाती तो कहां होकर जाती। कैसे जन्मस्थान पहुंचते। आखिर वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे शहरवासी कब इन अव्यवस्थाओं से निजात पाएंगे जिसके लिए यहां की गैरज‍िम्‍मेदाराना प्रशासनिक व्यवस्था ही जिम्मेदार है। क्या हुआ उन बड़े-बड़े दावों का जिसमें कहा जा रहा था कि नाले-नालियों की तलीझाड़ सफाई हो चुकी है। ऐसे होती है सफाई ? क्या करते हैं टाउन प्लानर और ऐसे बनते हैं नाले? जो पानी का निकास करने के बजाय शहर को गंदे नाले में तब्‍दील कर दें व जलभराव को स्‍थायी बना दें।

बहरहाल इस तालतलैया वाली स्‍थ‍ित‍ि‍ को लेकर ज‍िलाप्रशासन से सवाल करने से बचने वाले नाकारा जनप्रत‍िन‍िध‍ियों के कारण हमें पूरे व‍िश्‍व में शर्म‍िंदा होना पड़ा क्‍योंकि अकेले मथुरा में ही लाखों श्रद्धालु आए हुए थे जो कृष्‍ण भक्‍त‍ि केकारण यह सबसहने को व‍िवश हुए और यहां की एक भद्दी छव‍ि लेकर लौट गए।

– क‍िशन चतुर्वेदी (वरिष्‍ठ पत्रकार)

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