स्वास्थ्य मंत्रालय का फैसला: देशभर में प्रतिबंधित की जाएगी E cigarette

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सेहत पर E cigarette के खतरनाक असर को देखते हुए इन्हें बैन करने का फैसला लिया है। इसे बैन करने के लिए नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जाएगा।
सरकार की योजना थी कि E cigarette यानी इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट को ड्रग्स मानते हुए देशभर में प्रतिबंधित किया जाएगा।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि बैटरी ऑपरेटेड सिगरेट को बैन करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के ‘शुरुआती 100 दिनों के एजेंडे’ में शामिल है।
E cigarette को माना जाएगा ड्रग्स
E cigarette धूम्रपान करने वालों के बीच खासा चलन में है। 1 जून को हुई ड्रग कंसल्टेटिव कमेटी मीटिंग में विशेषज्ञों ने इस बात की पुष्टि की कि E cigarette और ऐसी अन्य कई डिवाइस को ड्रग ऐंड कॉस्मैटिक ऐक्ट 1940 (डीसीए) के सेक्शन 3(b) के तहत ड्रग माना जाएगा।
7700 फ्लेवर की E cigarette की बिक्री
E cigarette दरअसल गैर-लाइसेंस वाले प्रोडक्ट्स हैं, जो अवैध रूप से भारत में आ गए हैं। इसे एक ऐसे प्रोडक्ट के रूप में बेचा जाता है, जो लोगों को स्मोकिंग छुड़वाने में मदद करते हैं। यही वजह है कि युवाओं के बीच E cigarette का चलन तेजी से बढ़ रहा है। यह डिवाइस तंबाकू को नहीं जलाती बल्कि लिक्विड निकोटीन सॉल्यूशन से धुआं उड़ाने के लिए हीटिंग डिवाइस का इस्तेमाल करती है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो देश में ई-सिगरेट के 460 ब्रांड मौजूद हैं, जिसमें 7,700 से भी ज्यादा फ्लेवर की ई-सिगरेट मिलती हैं।
यूपी समेत 7 राज्यों में पहले से है बैन
उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मिजोरम, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और बिहार ने E cigarette के उत्पादन और बिक्री को बैन करने का आदेश जारी किया है। हरियाणा ने भी नोटिफाई किया है कि निकोटीन अपने असल रूप में जहर है।
संस्था सलाम बॉम्बे फाउंडेशन ने मुंबई में किया था सर्वे
– सर्वे में हुआ खुलासा 73 प्रतिशत युवा ई-सिगरेट के बारे में जानते हैं
– 33 प्रतिशत युवाओं ने लाइफ में कभी न कभी किया ई-सिगरेट का सेवन किया है
– कभी-कभी सेवन करने वालों में से 15 प्रतिशत युवा बने रेग्युलर स्मोकर
-एजेंसियां

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