ब्‍याज दरों को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ने पर विचार कर रही है HDFC

नई दिल्‍ली। हाउजिंग फाइनैंस कंपनी HDFC अपनी ब्याज दरों को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ सकती है। इससे घर के खरीदारों को सहूलियत होगी क्योंकि इससे होमलोन सस्ता हो सकता है।
आरबीआई ने हालांकि हाउजिंग फाइनैंस कंपनियों से ऐसा करने को नहीं कहा है।
HDFC लिमिटेड के वाइस चेयरमैन केकी मिस्त्री ने बताया कि लोन और लायबिलिटीज, दोनों को बाहरी बेंचमार्क से लिंक करने पर विचार किया जा रहा है क्योंकि इससे इंट्रेस्ट मार्जिन बचाने में मदद मिलेगी।
अगले दो हफ्ते में फैसला
मिस्त्री ने कहा, ‘अगले दो हफ्तों में हमारी एसेट लायबिलिटी कमेटी की बैठक होने वाली है। उसमें हम ऐसे लोन प्रोडक्ट्स पर विचार करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हम एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ा लोन प्रोडक्ट तभी पेश करेंगे, जब हम अपनी लायबिलिटी साइड में भी ऐसा ही मैकेनिज्म अपनाने की स्थिति में होंगे।’ उन्होंने कहा कि बैंक इंट्रेस्ट रेट्स को बाहरी बेंचमार्क से लिंक करने का ताजा कदम हाउजिंग फाइनैंस कंपनियों पर लागू नहीं होता है।
बैंक का कुल एयूएम 4.76 लाख करोड़
HDFC का टोटल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 30 जून को 13 प्रतिशत बढ़कर 4.76 लाख करोड़ रुपये हो गया था। इसके दिए गए लोन में होम बॉरोअर्स को दिए गए कर्ज का हिस्सा करीब 75 प्रतिशत है। वहीं लोन बुक में बाकी हिस्सा कंस्ट्रक्शन फाइनैंस, लीज रेंटल डिस्काउंटिंग और कॉरपोरेट लोन का है। कंपनी बॉन्ड्स, पब्लिक डिपॉजिट, ओवरसीज क्रेडिट और वनीला टर्म लोन के कॉम्बिनेशन से पैसा जुटाती है। फंड की अपनी जरूरत का करीब आधा हिस्सा यह डेट सिक्योरिटीज से जुटाती है। पब्लिक डिपॉजिट्स का इसकी बॉरोइंग बुक में 31 प्रतिशत हिस्सा है।
रिजर्व बैंक ने बैंकों को दिया था सुझाव
मिस्त्री ने कहा, ‘हमारी लायबिलिटी के कुछ हिस्से की स्वापिंग उन एक्सटर्नल बेंचमार्कों से होनी चाहिए, जिससे सभी दूसरे एचएफसी के लोन जुड़े हैं। बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाने पर हम ऐसी स्वापिंग कर पाएंगे’ पिछले सप्ताह आरबीआई ने कहा था कि बैंकों को होम, ऑटो लोन के अलावा, एमएसएमई को दिए जाने वाले लोन को रीपो रेट सरीखे बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना चाहिए। रीपो रेट वह दर होती है, जिस पर बैंक आरबीआई से उधार लेते हैं।
-एजेंसियां

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