हाथरस: गांववालों ने कहा- जब घटना हुई तब कोई पूछने नहीं आया, अब राजनीत‍ि कर रहे

हाथरस। गैंगरेप मामले में दलित-ठाकुर की राजनीति हो रही है, 19 साल की रंज‍िश के बाद ये मामला अब गैंगरेप के बाद मृत्यु पर आकर ट‍िक गया है। इस संबंध में और जानकारी करने पर पीड़िता के गांव के रामकुमार कहते हैं कि मामले में राजनीति हो रही है, क्योंकि पहले लड़की ने एक लड़के को ही आरोपी बनाया। बाद में जब राजनीति शुरू हुई तो 4 दिन बाद तीन अन्य लोगों का नाम जोड़ दिया गया। जबकि चारों खेती-मजदूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि गांव में ऐसा कोई दबंग नहीं है जिसका इतना हौसला हो कि किसी का रेप कर कोई मार दे। यह दोनों परिवार आमने-सामने रहते हैं। खेती भी नहीं है दोनों के पास। दूसरे के खेतों में काम करते हैं। फिलहाल, गांव में दलित बनाम ठाकुर के नाम पर राजनीति चल रही है।

पुलिस ने शुरुआत में हत्या की कोशिश और एससीएसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था, लेकिन मामले के तूल पकड़ने पर अब धारा 376 डी बढ़ा दी गई है। मामले में 4 आरोपी भी गिरफ्तार किए गए हैं। गांव का माहौल तनावपूर्ण है। यहां दो कंपनी पीएसी तैनात कर दी गई। जबकि तीन थानों का पुलिसबल भी हालात पर नजर रखे है। सभी बॉर्डर सील कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

गांव वाले बोले- यहां जातिगत भेद नेताओं के आने से बढ़ा
पीड़िता के गांव से एक किमी दूर बढ़ाना गांव है। वहां के रामहरि पाठक कहते हैं कि मेरी पीड़िता के परिवार से बात हुई थी। हम भी कहते हैं कि किसी की बेटी के साथ ऐसी घटना नहीं हो। आरोपियों को सजा मिले लेकिन दलित और ऊंची जाति के बीच का भेद यहां आए नेताओं ने ही खड़ा कर दिया है। जब घटना हुई तब कोई पूछने तक नहीं आया। उसके बाद यहां के सांसद और उनकी पत्नी आईं थी। पत्नी एससीएसटी आयोग में हैं। बस, इसी के बाद गांव में नेताओं का आना शुरू हो गया। बाद में गांव का माहौल खराब हो गया।

गांव में पहले नहीं देखा ऐसा माहौल
पाठक कहते हैं कि दलित, क्या ब्राह्मण- सभी यहां मिलजुलकर रहते हैं। हम उनकी बच्चियों के कन्यादान करते हैं। इससे पहले ऐसा माहौल नहीं देखा था। मुझे डर है कि कहीं ये दूरियां बढ़ न जाएं। आरोपी तो ठाकुर जाति से बताए जा रहे के सवाल पर पाठक कहते हैं- साहब लड़के नए खून के हैं। दोनों परिवारों में पहले से विवाद चल ही रहा था। दबंगई कोई नहीं करता। सभी खेती-किसानी करने वाले लोग हैं। मैंने सुना है कि लड़की की जुबान काट ली गई है जबकि गांव में चर्चा है कि उठाने पटकने में लड़की की जुबान उसके दांतों के बीच आकर कट गई है।

बिना पुलिस की अनुमति आने-जाने की छूट नहीं
रामकुमार कहते हैं कि गांव में आए नेताओं की वजह से माहौल बिगाड़ गया है। वे बताते हैं कि गांव के बॉर्डर पर भी पुलिस तैनात है। जहां घटना हुई वहां भी पुलिस लगी है। दोनों पक्षों के घर के सामने भी पुलिसबल है। गांववालों का कहना है कि इससे पहले गांव में इतना पुलिसबल नहीं देखा है। इस समय गांव में कोई बाहरी व्यक्ति बिना पुलिसवालों की मर्जी के अंदर नहीं आ सकता है।

पीड़ित के परिजन को मुआवजा दिया गया
एएसपी हाथरस प्रकाश कुमार ने बताया कि धारा 307 में केस दर्ज था, उसे पीड़िता की मृत्यु के बाद 302 में तरमीम किया जा रहा है। चूंकि एफआईआर में 307 डी धारा भी है, उसके अनुसार पीड़ित परिवार को मुआवजा राशि के तौर पर प्रथम किस्त 4 लाख 12 हजार 500 रुपए दिए जा चुके हैं। हफ्ते भर बाद आज दूसरी किस्त के रूप में 5 लाख 87 हजार 500 रुपए दिए गए। इस तरह 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद की गई।

दोनों पक्षों में 19 साल से विवाद चल रहा
एएसपी कुमार ने बताया कि 2001 में पीड़ित परिवार और आरोपी पक्ष के बीच गांव में झगड़ा भी हुआ था, तब मामले में एससीएसटी एक्ट में कार्रवाई की गई थी। वह मामला अब खत्म हो चुका है। पीड़िता का पोस्टमार्टम दिल्ली में ही होगा। वहां भी हमारी पुलिस तैनात है। इसके अलावा एक सीओ, एक सब इंस्पेक्टर, एक पुरुष कांस्टेबल और एक महिला कांस्टेबल दिल्ली गए हैं। उन्होंने बताया कि गांव का माहौल न बिगड़ने पाए इसलिए यहां सुरक्षा बढ़ाई गई है।
– एजेंसी

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