हार्वर्ड की स्‍टडी: LAC पर सैन्य तैनाती के मामलों में बीजिंग से बेहतर है भारत की स्थिति

चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा LAC पर सैन्य तैनाती के मामलों में बीजिंग से कहीं बेहतर भारत की स्थिति है। ये बात हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हालिया आंकलन में कही गई है। यूएस नेवल वॉर कॉलेज के को-ऑथर ओ’डोनिएल ने कहा, “अगर चीन हमला करता है तो सीमावर्ती इलाकों में भारत और चीन के सैनिकों की बड़ी तादाद में स्थाई रूप से तैनाती के चलते भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सेना को पीछे धकेलने में सक्षम है। हालांकि, इस दौरान दोनों देशों को काफी नुकसान होगा।”
इसमें कहा गया है कि एक चीज जिसका पता नहीं चल पाया वो ये है कि इस तरह की लड़ाई में भारतीय के कम्युनिकेशन और लॉजिस्टिक्स को बाधा पहुंचाने के लिए चीन किस तरह साइबर हमले का इस्तेमाल करेगा।
पिछले कई सालों में भारत ने चीन के मुकाबले ना सिर्फ अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत किया है बल्कि कई मायनों में ये उससे ज्यादा शक्तिशाली हो चुका है। भारतीय अधिकारी इस दृष्टिकोण से सहमत रखते हैं, हालांकि तनाव के चलते भारत के पूर्ण प्रभुत्व के बारे में कुछ नहीं बताया है।
चीन की सेना इस समस्या को साल 2000 के मध्य से ही समझने लगी थी। भारत और चीन की सेनाओं की संख्या सीमा पर करीब-करीब बराबर है। दोनों तरफ 2-2 लाख से ज्यादा सैनिकों की तैनाती है लेकिन चीनी सैनिकों का कुछ हिस्सा रूस की सीमा के साथ तिब्बत और जिनजियांग में विद्रोह को लेकर रिजर्व है।
लड़ाकू विमानों की संख्या के मामलों में भारत की स्थिति कहीं ज्यादा अच्छी है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इस इलाके में चीन के किसी भी लड़ाकू विमान से सुखोई-30 बेहतर है। ओ’ डोनियल ने कहा, “सीमा पर भारत के पास ज्यादा और बेहतर लड़ाकू विमान हैं और चीन की तुलना में कही ज्यादा अनुभवी एयर क्रूज और सेनाओं की पॉजिशन है।”
दशकों तक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की जर्नल साइंस ऑफ मिलिट्री स्ट्रेटजी में चीन के विदेशी सुरक्षा मामलों में भारत को चौथा स्थान दिया जाता था। इसमें बदलाव होना शुरू हो गया है। चाइना डिफेंस डेली साल 2013 में सीमा पर भारत की तरफ से बढ़ाए गए सुरक्षाबलों के बारे में जिक्र किया था। 2017 में नानफंग डेली के एक सर्वे में चीन के सामरिक थिंकर्स ने इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि “भारत की रक्षा रणनीति में बदलाव हुई है… और यह आक्रामक है।”
-एजेंसियां

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