Haren Pandya मर्डर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया

नई दिल्‍ली। गुजरात के गृहमंत्री Haren Pandya मर्डर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 12 अभियुक्तों को दोषी ठहराया है। Haren Pandya की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सात अभियुक्तों को दोषी तो ठहराया परंतु उनकी सजा को लेकर अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और गुजरात सरकार की अपीलों पर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट यानी उच्चतम न्यायालय ने गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या हत्याकांड में 12 आरोपियों को दोषी ठहराया है। गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की साल 2003 में हत्या करने के आरोपों का सामना कर रहे 12 लोगों को बरी करने के फैसले को सीबीआई और गुजरात सरकार ने चुनौती दी थी। फैसले के बाद शीर्ष अदालत ने हालांकि, गैर सरकारी संगठन की वह याचिका खारिज कर दी जिसमे न्यायालय की निगरानी में पांड्या हत्याकांड की नये सिरे से जांच कराने का अनुरोध किया गया था। न्यायालय ने इस हत्याकांड की नये सिरे से जांच के लिये जनहित याचिका दायर करने पर इस गैर सरकारी संगठन पर 50,000 रूपए का जुर्माना लगाया और कहा कि इस मामले में अब किसी और याचिका पर विचार नहीं होगा।

पांड्या गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में मंत्री थे। उनकी अहमदाबाद में सुबह की सैर के दौरान लॉ गार्डन के समीप 26 मार्च 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सीबीआई के अनुसार, राज्य में 2002 के साम्प्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की गई।

सीबीआई और राज्य पुलिस ने गुजरात उच्च न्यायालय के 29 अगस्त 2011 के फैसले को गलत बताते हुए अपील दायर की। उच्च न्यायालय ने 12 लोगों को हत्या के आरोपों से बरी करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें उन्हें आपराधिक साजिश, हत्या की कोशिश और आतंकवाद रोधी कानून (पोटा) के तहत अपराधों में दोषी ठहराया गया। उच्चतम न्यायालय ने इस साल 31 जनवरी को अपीलों पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सीबीआई के अनुसार, राज्य में 2002 के साम्प्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की गई थी। सीबीआई और राज्य पुलिस ने गुजरात उच्च न्यायालय के 29 अगस्त 2011 के फैसले को गलत बताते हुए अपील दायर की थी।

न्यायाधीश अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ (सीपीआईएल) की जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें इस हत्या की कोर्ट की निगरानी में फिर से जांच कराने की मांग की गई थी। इस अपील पर कोर्ट ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
-एजेंसी

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