हार्दिक पटेल दंगा कराने का दोषी, 2 साल की सजा और 50 हजार जुर्माना

गुजरात के मेहसाणा की विसनगर अदालत ने पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को 2015 में अनामत आंदोलन के दौरान दंगा कराने के एक मामले में दोषी करार दिया है.
हार्दिक पटेल पर विसनगर में हुए पाटीदारों के प्रदर्शन के दौरान भारतीय जनता पार्टी के विधायक ऋषिकेश पटेल के दफ़्तर में तोड़फोड़ कराने का आरोप था. ये घटना 23 जुलाई 2015 को हुई थी.
अदालत ने इस मामले में 14 लोगों को बरी कर दिया है जबकि हार्दिक पटेल समेत तीन लोगों को दोषी माना है. इस मामले में विसनगर अदालत के जज वीपी अग्रवाल ने उन्हें 2 साल जेल की सज़ा सुनाई. साथ ही तीनों पर 50-50 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
अदालत ने तीनों दोषियों (हार्दिक पटेल, लाल जी पटेल और एके पटेल) को आईपीसी की धारा-147, 148, 149, 427 और 435 के तहत दोषी करार दिया था.
कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद हार्दिक पटेल ने ट्वीट किया, “सामाजिक न्याय और सामाजिक अधिकार के लिए लड़ना अगर गुनाह है तो हाँ मैं गुनहगार हूँ. सत्य और अधिकार की लड़ाई लड़ने वाला अगर बाग़ी है तो हाँ मैं बाग़ी हूँ. सलाखों के पीछे सत्य, किसान, युवा और ग़रीबों के लिए लड़ने वाली मेरी आवाज़ को भाजपा की हिटरलशाही सत्ता नहीं दबा सकती. मेरी फ़ितरत में है ज़ालिमों से मुक़ाबला करना और हक़ के लिए लड़ना. जितना दबाओगे, उतना ही चुनौती बनकर उभरूंगा. किसी भी मुश्किल को उसके बनाये गए लेवल पर हल नहीं किया जा सकता. उस मुसीबत को उस लेवल से ऊपर उठने पर ही हल किया जा सकता है. इंक़लाब ज़िंदाबाद.”
2015 का आंदोलन
हार्दिक पटेल ‘पाटीदार अनामत आंदोलन समिति’ के प्रमुख रहे हैं.
वो गुजरात में आर्थिक और सामाजिक रूप से संपन्न माने जाने वाले पटेल समुदाय के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण की माँग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं.
हार्दिक पटेल की दलील है कि पटेल समुदाय के सभी लोग अमीर होते हैं, ये बात मिथक है.
बीकॉम के स्नातक हार्दिक पटेल ने साल 2015 में गुजरात के अहमदाबाद शहर में एक विशाल रैली की थी.
रैली में हिंसा होने के बाद पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया था.
इसके बाद कई शहरों में हिंसा हुई. हिंसा की इन घटनाओं में 10 लोग मारे गए थे. काफ़ी लोग घायल हुए थे और अहमदाबाद समेत कई शहरों में प्रशासन को कर्फ़्यू लगाना पड़ा था.
साल 2015 में एक भाषण में हार्दिक पटेल ने कहा था, “ये हमारे अधिकारों की लड़ाई है. अगर वे हमारी मांगे पूरी करते हैं तो हम विनम्रता से स्वीकार करेंगे लेकिन अगर हमें हमारा अधिकार नहीं दिया गया तो हम ताक़त के दम पर उसे छीन लेंगे.”
-BBC

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