संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी रात, मंदिर का प्रांगण सूफी सुरों से गूंज उठा

Hamsar-HaYat-Nizami(sufi-brप्रतिवर्ष बनारस में आयोजित ‘संकट मोचन संगीत समारोह’ की विश्व भर में फैली कीर्ति की एक बड़ी वजह यह भी है कि यह संकीर्णताओं, पूर्वाग्रहों और कट्टरताओं से अलग खुद को बरतता है. प्रतिभा की कद्र इस बर्ताव में एक जरूरी संदर्भ है. यह संदर्भ सोमवार की रात को भी नजर आया, जब इस संगीत समारोह की तीसरी रात में मंदिर का प्रांगण सूफी सुरों से गूंज उठा.

दरगाह अजमेर शरीफ के कव्वाल हमसर हयात निजामी के सूफी कलाम को संकट मोचन में सुन कर हिंदी के कवि शमशेर बहादुर सिंह याद आते हैं :

‘ईश्वर अगर मैंने अरबी में प्रार्थना की

तू मुझसे नाराज हो जाएगा?

अल्लमह यदि मैंने संस्कृत में संध्या

तो तू मुझे दोजख में डालेगा?

लोग तो यही कहते घूम रहे हैं

तू बता, ईश्वर?

तू ही समझा, मेरे अल्लाह!

बहुत-सी प्रार्थनाएं हैं

मुझे बहुत-बहुत मोहती हैं

ऐसा क्यों नहीं है कि एक ही प्रार्थना

मैं दिल से कुबूल कर लूं

और अन्य प्रार्थनाओं को करने पर

प्रायश्चित करने का संकल्प करूं!

क्योंकि तब मैं अधिक धार्मिक

अपने को महसूस करूंगा,

इसमें कोई संदेह नहीं है.’

शमशेर जिस अधिक धार्मिकता की बात कर रहे हैं, वह सद्भाव से उपजती है और सारी प्रार्थनाओं को संगीत कर देती है— संगीत जो सबका है : ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाय के…’
निजामी बंधुओं से पहले रामपुर घराने के मशहूर गायक उस्ताद राशिद खां ने भी बहुत देर तक संकट मोचन में आए संगीत प्रेमियों अपने ख़याल से मदहोश किए रखा. राशिद खां को शास्त्रीय संगीत की दुनिया से बाहर इम्तियाज अली की फिल्म ‘जब वी मेट’ के गाने ‘आओगे जब तुम साजना, अंगना फूल खिलेंगे…’ के लिए भी जाना जाता है. वह भला इसे गाए बगैर कैसे जा सकते थे. लिहाजा उन्होंने गाया और तबले पर तन्मय बोस, हारमोनियम पर सुधीर नायक और सारंगी पर साबिर खां ने उनका साथ दिया.

राशिद खां के राग पूरिया कल्याण में बंदिश पेश करने से पहले संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी शाम की शुरुआत भरतनाट्यम से हुई. मंच पर पद्मश्री गीता चंद्रन और उनकी बेटी शरण्या थीं. उन्होंने पुष्पांजली से शुरुआत की और फिर शिव पंचाक्षर, श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन हरण भव भय दारुणं…, कृष्ण-लीला से होते हुए हनुमान को समर्पित भावांजलि पर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया.

संकट मोचन संगीत समारोह में इस बार संगीत के अतिरिक्त भी कुछ-कुछ नजर आ रहा है. मंदिर के परिसर में एक कला-दीर्घा है जिसमें बीएचयू दृश्यकला संकाय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स से आए कलाकारों ने ‘सुपर हीरोज ऑफ द बनारस’ थीम के अंतर्गत कुछ पोट्रेट बनाए हैं. कुछ अन्य कला-दीर्घाएं भी हैं जिन्हें सोमवार की सुबह देखने के बाद सोमवार की रात और प्रस्तुति उपरांत गीता चंद्रन ने कुछ खेद प्रकट किया. उनका मानना है कि यह समारोह विशुद्ध संगीत का है और इसे यों ही बने रहने देना चाहिए. इसे मेला बनाना ठीक नहीं है, क्योंकि कला-मेलों की पहले ही कोई कमी नहीं है. संकट मोचन संगीत समारोह आस्था का उत्सव है और इसके इस भाव को बरकरार रखा जाना चाहिए.

इस बयान के भविष्य को यहीं छोड़ें तब कह सकते हैं कि साजन मिश्र के सुपुत्र स्वरांश मिश्र का गायन भी प्रस्तुत समारोह की तीसरी रात की उल्लेखनीय प्रस्तुतियों में से एक रहा. उन्होंने राग मालकौंस से शुरुआत की और फिर राम-भजन तक आए. तबले पर उनके साथ संगत की राजेश मिश्र ने और हारमोनियम पर थे धर्मनाथ मिश्र.

ट्रायो यानी त्रिवेणी थीम के अंतर्गत उत्तर और दक्षिण भारतीय वाद्य-यंत्रों के बीच जुगलबंदी हुई. हैदराबाद से आए येल्ला वेंकटेश्वर राव मृदंगम पर और कुमार बोस तबले पर थे, भवानी शंकर ने पखावज को और पंकज मिश्र ने सारंगी को संभाल कर इस त्रिवेणी में जोरदार लहरें पैदा कीं.

आज शाम संकट मोचन संगीत समारोह की चौथी शाम होगी जो देश के नामी कलाकारों की प्रस्तुतियों से आहिस्ता-आहिस्ता रात में बदलेगी और सुबह होने तक संगीत का एक अविस्मरणीय आलोक निर्मित करेगी. आज यहां मशहूर संतूर-वादक पंडित शिव कुमार शर्मा, ओडिसी नृत्यांगना सोनल मानसिंह, शास्त्रीय गायक उल्हास कसालकर और हरिहरन जैसे व्यक्तित्वों को अपनी प्रस्तुतियां देनी हैं.

 

 

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