5 साल में 10 गुना बढ़ा Hair transplant का बाजार,अब करोड़ों का

नई द‍िल्ली। Hair transplant आज की उन लोगों की जरूरत बनता जा रहा है जो गंजेपन के श‍िकार हैं। शायद इसील‍िए इस समस्या को बॉलीवुड भी भुना रहा है। अभी अभी दो फ‍िल्में बाला और उजड़ा चमन इसी समस्या यान‍ि गंजेपन को लेकर आ रही हैं ।
आनुवंशिकता, डैंड्रफ, खारे पानी, तेजी से बदलती दिनचर्या के कारण गंजापन तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो देश में करीब-करीब प्रत्येक व्यक्ति को बालों की समस्या का सामना करना पड़ता है। इनमें से ज्यादातर लोग इसे अनदेखा कर देते हैं। Hair transplant करवाने वालों की संख्या बीते पांच साल में 10 गुना बढ़ गई है। वर्तमान में यह 20 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। भारत में हेयर ट्रांसप्लांट की फोलिकल यूनिट एक्सट्रेक्शन (एफयूई) या स्ट्रिप विधि सर्वाधिक लोकप्रिय है।

देश में वर्तमान हेयरकेयर बाजार करीब 22 हजार करोड़ रुपए का है। यह बाजार करीब आठ से 10 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है। इस बाजार में 45 से 50 फीसदी हिस्सा तेल का ही है। वहीं इसमें शैंपू और हेयर विग भी शामिल हैं। जबकि हेयर ट्रांसप्लांट या बाल लगवाने की ग्रोथ रेट 20 फीसदी वार्षिक से बढ़ रही है। हेयर ट्रांसप्लांट 40 हजार रुपए से लेकर 3.5 लाख रुपए तक में होता है। हमारे यहां ट्रीटमेंट करवाने लोग मिडिल ईस्ट, साउथ ईस्ट एशिया से भी आते हैं। बाल झड़ने का मुख्य कारण अानुवंशिक हैं, अगर पिता या माता पक्ष में यह है तो फिर अगली पीढ़ी में भी बाल झड़ने की समस्या आ जाती है। जहां खारा पानी है उन स्थानों पर भी बाल झड़ने के मामले अक्सर देखने को मिलते हैं।

अन्य कारणों के अलावा अधिक तनाव, कम फिजिकल एक्टिविटी और भोजन में घटते न्यूट्रीशन के कारण भी बालों के झड़ने में तेजी आई है। 25 वर्ष पहले आमतौर पर 40 की उम्र के बाद सिर के बाल झड़ना शुरू होते थे, अब 25 की उम्र से ही बाल झड़ने शुरू हो रहे हैं। लेकिन जोखिम रहित और अपेक्षाकृत सस्ता ट्रीटमेंट होने के कारण लोग बालों काे ट्रांसप्लांट करवा रहे हैं। जिन लोगों के सर्जरी करने के लिए डोनर हेयर (कान के पीछे सिर के बाल) कम होते हैं उन्हें विग का ही प्रयोग करना पड़ता है। हमारे मरीजों में एशियाई देशों के अलावा अफ्रीका से भी बाल ट्रांसप्लांट के लिए लोग आते हैं।

नीलसन की रिपोर्ट -द ब्यूटी मार्केट इज लेटिंग इट्स हेयर डाउन के अनुसार पुरुषों में सुंदर दिखने के लिए बाल सबसे महत्वपूर्ण हो गए हैं। जहां 13% लोगों ने सुंदर दिखने के लिए फिजिक को महत्वपूर्ण बताया वहीं दोगुने से अधिक 30% पुरुषों ने बालों को महत्वपूर्ण बताया। सर्वाधिक 22% महिलाओं के लिए बाल सुंदर दिखने के लिए महत्वपूर्ण थे। ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहरी क्षेत्र में लोग हेयर केयर पर तीन गुना खर्च करते हैं। प्लास्टिक, कॉस्मेटिक एंड हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन और विशेषज्ञ डॉ. डीजेएस तुल्ला ने कहा कि लगभग प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बालों की समस्या आती है लेकिन ज्यादातर इसकी अनदेखी कर देते हैं।

अब 25 की उम्र से ही शुरू हो रहा है गंजापन
हेयर ट्रांसप्लांट 20 फीसदी से अधिक रफ्तार से देश में बढ़ रहा है। बीते कई वर्षों से बालों का झड़ना बढ़ा है, यह सिर्फ सिर की ही बात नहीं है वरन शरीर में भी बाल घटे हैं। हमारे सामने कुछ ऐसे भी केस आते हैं जब 25 वर्ष की उम्र में ही युवाओं के सिर के 50 फीसदी से अधिक बाल झड़ गए। रोजाना बालों में साबुन-शैंपू लगाने, बालों में कलर प्रयोग करने, प्रदूषण बढ़ने, बालों की स्ट्रेटनिंग, हीटिंग और रीबाउंडिंग आदि के कारण भी बाल झड़ते हैं। सप्ताह में दो ही दिन महिला-पुरुषों को अपने सिर में शैंपू और एक दिन कंडीशन करना चाहिए, रोजाना शैंपू-साबुन के प्रयोग के कारण भी बाल झड़ रहे हैं।

देश में हेयर ट्रांसप्लांट के लिए एफयूई लोकप्रिय

हेयर ट्रांसप्लांट के दो तरीके प्रचलित हैं। पहला, फोलिकल यूनिट ट्रांसप्लांट (एफयूटी) या स्ट्रिप मैथड है। इसमें सर्जरी होती है। माइक्रो स्कोप के जरिए एक-एक बाल को अलग कर लगाया जाता है। वहीं दूसरी विधि फोलिकल यूनिट एक्सट्रेक्शन (एफयूई) है इसमें बिना टांके या चीरे के बालों को सिर में लगाया जाता है। अब ट्रांसप्लांट मेन्यूअल के साथ ही रोबोटिक भी होने लगा है। रोबोटिक सर्जरी थोड़ी महंगी होती है। ट्रांसप्लांट के अतिरिक्त हेयर विग, पैच और वीविंग भी लोग करवाते हैं।

– एजेंसी

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