स्वामी गुरुशरणानंद के संत समागम से भक्ति-विभोर हुआ sanskriti university

sanskriti university में स्वामी गुरुशरणानंद ने कहा- राष्ट्र उन्नति को अपना लक्ष्य बनाएं बच्‍चे

मथुरा। हर शब्द मंत्र है, कोई अयोग्य नहीं होता। हर वनस्पति औषधि है लिहाजा अपनी दृष्टि हमेशा खुली रखो। बच्चों रटो नहीं बल्कि सीखो और आत्मज्ञान में वृद्धि करो। आप लोग भारत का भविष्य हैं लिहाजा आत्म-उन्नति, परिवार उन्नति की बजाय राष्ट्र उन्नति को अपना लक्ष्य बनाते हुए पठन-पाठन करें ताकि समाज और विश्व का कल्याण हो उक्त सारगर्भित उद्गार सोमवार 11 सितम्बर को महामंडलेश्वर स्वामी गुरुशरणानंद महाराज ने संस्कृति विश्वविद्यालय के सभागार में छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। स्वामी जी के सम्बोधन से पूर्व मां सरस्वती की प्रतिमा को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन किया गया।

इसके बाद वर दे वीणा वादिन वर दे के सुमधुर गीत के बाद श्रीकृष्ण भक्ति भजन पर सम्पूर्ण सभागार भक्ति-भाव से झूम उठा।

स्वामी गुरुशरणानंद महाराज ने कहा कि भारत में हजारों साल से गुरु-शिष्य परम्परा चली आ रही है। हमारी संस्कृति में गुरु अपने शक्तिशाली सूक्ष्म ज्ञान को अटूट विश्वास, पूर्ण समर्पण और घनिष्ठता के माहौल में अपने शिष्यों तक पहुंचाते रहे हैं। विश्वविद्यालय गौरवमयी संस्थान होता है। प्राध्यापकों के हाथों में देश का भविष्य है। उनका दायित्व है कि शिक्षा के मंदिर संस्कृति विश्वविद्यालय से सफल छात्र-छात्राएं नहीं बल्कि अच्छे इंसान निकलें। किसी इंसान को अनुभव के एक आयाम से दूसरे आयाम में ले जाने के लिए एक ऐसा साधन या उपाय चाहिए जिसकी तीव्रता और ऊर्जा का स्तर आपके मौजूदा स्तर से ऊपर हो, इसी साधन को हम गुरु कहते हैं। विद्या धन ही ऐसा धन है जोकि बांटने से बढ़ता है।

स्वामी जी ने कहा कि गुरु शिक्षक नहीं होते। गुरु और शिष्य का रिश्ता एक-दूसरे का पूरक है। गुरु और शिष्य का रिश्ता इतना पवित्र और अहम इसलिए है क्योंकि एक-दूजे के बिना इनका अस्तित्व ही नहीं है। इस अवसर पर संत शिरोमणि ने संस्कृति विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा आयुर्वेद चिकित्सा-शिक्षा पर किए जा रहे प्रयासों की भी मुक्तकंठ से सराहना की।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने अपने स्वागत उद्बोधन में संत शिरोमणि महामंडलेश्वर स्वामी गुरुशरणानंद महाराज को नमन करते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को अच्छा इंसान बनाना है ताकि वह अपने आत्मज्ञान से अपने माता-पिता के सपने साकार करते हुए दुनिया में भारतीय शिक्षा परम्परा को गौरवान्वित करें।

इस अवसर पर संस्थान के कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक ने स्वामी गुरुशरणानंद जी महाराज को ज्ञान का महाग्रंथ निरूपित करते हुए कहा कि उनके ज्ञान से सिर्फ ब्रज ही नहीं बल्कि देश-दुनिया लाभान्वित हो रही है।

इससे पूर्व sanskriti university के कुलाधिपति सचिन गुप्ता और राजीव गुप्ता ने सपत्नीक स्वामी जी का स्नेहाशीष ग्रहण किया। स्वामी गुरुशरणानंद महाराज जी ने जहां साहित्य मनीषी मोहन स्वरूप भाटिया को स्मृति चिह्न प्रदान किया वहीं सचिन गुप्ता और राजीव गुप्ता ने स्वामी जी को स्मृति चिह्न प्रदान कर उन्हें पुनः संस्कृति विश्वविद्यालय पधारने का आग्रह किया।

छात्र टुट्टन ने स्वामी जी को उनका स्कैच भेंट किया।

इस अवसर पर sanskriti university कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पी.सी. छाबड़ा, ओएसडी मीनाक्षी शर्मा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अवनीश कुमार, सभी संकाय के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डा. शुभा शर्मा विभागाध्यक्ष शिक्षा संकाय व अमृता रावत ने किया। आभार डा. संजीव कुमार सिंह ने माना।