मथुरा में भी 40 द‍िन का प्रवास क‍िया था Guru Nanak Dev ने

मथुरा। आज 550वें प्रकाशपर्व पर Guru Nanak Dev को याद क‍िया जा रहा है , ऐसे में मथुरा गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी गोपी सिंह ने भी जानकारी देते हुए बताया क‍ि सिखों के प्रथम गुरु Guru Nanak Dev अपनी चार उदासी में से पहली उदासी (धार्मिक यात्रा) के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला भूमि मथुरा भी आए थे। यहां उन्होंने 40 दिन का प्रवास किया था। इस दौरान उन्होंने लोगों को शांति, सद्भाव और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने का संदेश दिया था।

गुरुनानक बगीची प्रबंध समिति के सचिव गुरुवचन सिंह ने बताया कि 507 साल पहले गुरुनानक देव मथुरा आए थे। 40 दिन के प्रवास के दौरान उन्होंने मथुरा के साथ वृंदावन, बरसाना, नंदगांव आदि धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया था। उन्होंने बताया कि प्रवास के एक दिन बगीची पर संगत मौजूद थी।

इसी बीच उन्हें किसी ने कुएं के खारे पानी के बारे में बताया। इस पर उन्होंने कहा कि पानी खारा नहीं हो सकता। इस पर जब मौजूद लोगों ने कुएं उसे पानी को निकाल पिया तो वह मीठा था। इसके बाद इस बगीची का नाम गुरुद्वारा गुरुनानक बगीची पड़ गया।

गुरुनानक देव के प्रकाशोत्सव पर सुबह 10 बजे से अखंड पाठ साहिब, 11 से 12 बजे तक कथा और 12.30 से 2 बजे तक शबद कीर्तन के आयोजन हुए। गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी गोपी सिंह ने बताया कि शबद कीर्तन, लंगर और प्रसाद वितरण हुआ।

गुरुनानक बगीगी पर पहली बार वर्ष 1926 पर गुरुद्वारे का निर्माण कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2006 से 2008 के बीच जीर्णोद्धार कराया गया। गुरुनानक देव के चरण यहां पड़ने के कारण यह स्थल सिख समाज के लिए बेहद पवित्र स्थल है।

– एजेंसी

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