उत्तर प्रदेश की सभी अधीनस्थ अदालतों को खोलने के लिए गाइडलाइंस जारी

लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद उत्तर प्रदेश की सभी अधीनस्थ अदालतों और अधिकरणों खोलने के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी है।
शनिवार को महानिबंधक आशीष गर्ग द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि न्यूनतम स्टाफ व अधिकतम आठ न्यायिक अधिकारियों को रोटेशन से बैठाकर जरूरी मामलों की सुनवाई की जाए।
बता दें कि हाई कोर्ट की प्रशासनिक समिति ने पूर्व निर्धारित ग्रीष्मकालीन अवकाश को संशोधित करते हुए 10 मई से 4 जून तक ग्रीष्मावकाश घोषित किया था। शनिवार को साप्ताहिक कोरोना कर्फ्यू है। अब सोमवार से हाई कोर्ट की प्रयागराज स्थित प्रधान पीठ, लखनऊ खंडपीठ और सभी अधीनस्थ अदालतों में नियमित सुनवाई शुरू हो जाएगी। अभी तक अति आवश्यक मुकदमों की ही सुनवाई हो रही थी।
हाई कोर्ट के महानिबंधक आशीष गर्ग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सभी अदालतें अतिआवश्यक नए मुकदमे, जमानत प्रार्थनापत्र, अवमुक्ति अर्जी, धारा 164 सीआरपीसी के बयान, रिमांड, आपराधिक अर्जियों का निस्तारण, निषेधाज्ञा तथा जरूरी सिविल मामलों की ही सुनवाई करेंगी। नए मुकदमों की सुनवाई जरूरी होने की अर्जी स्थानीय स्तर पर तय की जाएगी। सारे आदेश सीआइएस पर अपलोड किए जाएंगे।
गाइडलाइंस के अनुसार बंधपत्र आदि स्वीकार करने का तंत्र स्थानीय स्तर पर तय होगा। कोरोना गाइडलाइंस के तहत जिला जज सुनिश्चित करेंगे कि 33 फीसद से अधिक स्टाफ कोर्ट परिसर में न आए। इस गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है। ग्रीष्मावकाश चार जून तक था। साप्ताहिक कोरोना कर्फ्यू की वजह से शनिवार को अधीनस्थ न्यायालयों में बंदी रही।
बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने बढ़ते कोरोना संक्रमण के मद्देनजर इस वर्ष ग्रीष्मावकाश एक माह पूर्व मई में ही घोषित करने की मांग की थी। हाई कोर्ट और अधीनस्थ अदालतों में ग्रीष्मावकाश प्रत्येक वर्ष पहली जून से होता है। इस बार विषम परिस्थितियों के मद्देनजर यह मांग की गई थी। जिस पर विचार करते हुए हाई कोर्ट की प्रशासनिक समिति ने पूर्व निर्धारित ग्रीष्मकालीन अवकाश को संशोधित कर दिया था।
-एजेंसियां

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