होटल रेस्‍टोरेंट संचालकों की मनमानी वसूली पर GST Council ने किया जवाब तलब

नई दिल्‍ली। अब GST Council ने रेस्टोरेंट मालिकों से कहा है कि वो 15 नवंबर 2017 से पहले और बाद की प्राइस लिस्ट को मुहैया कराएं।

इस संबंध में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि वो बहुत जल्द ही कीमतों की कटौती के बारे में विज्ञापन जारी करेंगे। राज्यों की जीएसटी अथॉरिटी रेस्टोरेंट मालिकों से फोन से जानकारी लेने के साथ ही सवालों की सूची भी भेजी है। रेस्टोरेंट मालिकों से कहा गया है कि वो पूरी जानकारी मुहैया कराएं ताकि ये पता लगाया जा सके कि इस तरह के गड़बड़झाला को किस तरह अंजाम दिया जा रहा है।

जीएसटी काउंसिल ने ये फैसला किया था कि रेस्टोरेंट (एसी या गैर एसी) बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के 18 फीसद जीएसटी की जगह पांच फीसद ही जीएसटी चार्ज कर सकेंगे। इसके साथ ही टेकअवे और होम डिलीवरी के लिए पांच फीसद फ्लैट जीएसटी लगाने का आदेश दिया गया। जीएसटी की दर घटाये जाने के बाद टाटा स्टारबक्श के प्रवक्ता का कहना है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा न मिलने की वजह से खाद्य पदार्थों की बेस प्राइस को बढ़ाया गया था। लेकिन ये कोशिश की जा रही है कि आम ग्राहकों को जीएसटी की घटी हुई दर का फायदा मिल सके। हालांकि रेस्टोरेंट और फूड चेन की मुनाफाखोरी को रोकने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने एंटी प्राफिटियरिंग अथॉरिटी को मंजूरी दी है।

जीएसटी की दरों को लेकर तमाम तरह के विरोधों के बीच जीएसटी काउंसिल ने कुछ 9 नवंबर को कुछ अहम फैसले किए, जिसमें 28 फीसद के दायरे में आने वाली तमाम सामानों (178) के टैक्स रेट घटा दिए गए। इसके साथ ही काउंसिल ने व्यापारियों को आगाह भी किया कि टैक्स रेट घटाए जाने के बाद कोई भी मैन्यूफैक्चरर एमआरपी में बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो रहा है। इस सवाल का जवाब तलाशना जरूरी है। सच ये है कि जीएसटी की दर में कमी होने के बाद भी रेस्टोरेंट मनमाना वसूली कर रहे है। इसे समझाने के लिए हम दो बिल की मदद लेंगे।

अगर अब आप रेस्टोरेंट में खाना खाने जा रहे हों तो जीएसटी की घटी दरों का फायदा मिल सकता है। हालांकि हकीकत ये है कि जीएसटी की घटी दरों का आम ग्राहकों को फायदा नहीं मिल रहा है। 15 नवंबर से पहले रेस्टोरेंट जहां 18 फीसद की दर से जीएसटी वसूल रहे थे। लेकिन 15 नवंबर के बाद जीएसटी की दर घटकर पांच फीसद हो गई।

ये बात अलग है कि रेस्टोरेंट मालिक नियमों का हवाला देकर ग्राहकों को बेवकूफ बना रहे हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट का हवाला देकर रेस्टोरेंट और फूड चेन चलाने वालों ने खाद्य पदार्थों की बेस प्राइस में बढ़ोतरी कर दी है।

इसका अर्थ ये है कि 18फीसद जीएसटी की दर से जो मूल्य आप दुकानदार को चुका रहे थे। ठीक वही मूल्य जीएसटी की दर पांच फीसद होने पर भी लोगों को चुकाना पड़ रहा है। रेस्टोरेंट और फूड चेन की खुली लूट के बाद GST Council  हरकत में आई।

-एजेंसी