गायत्री जयंती पर शांतिकुंज में हुआ ‘गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ उपासना’ कार्यक्रम

हर‍िद्वार। आज गायत्री जयंती है और गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में गायत्री जयंती और गंगा दशहरा पर्व को समूह साधना और विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना व ‘गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ उपासना’ कार्यक्रम के साथ मनाया गया।

इस दौरान शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए साधकों ने अखंड जप किया। लॉकडाउन के चलते इस साल शांतिकुंज परिवार ने पर्व पूजन का कार्यक्रम भावनात्मक रूप से संपन्न किया। किसी प्रकार का कोई मंचीय आयोजन नहीं हुआ और साधकों ने गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या और शैल दीदी का वीडियो संदेश ग्रहण किया। इसका शांतिकुंज और देव संस्कृति विवि में एलईडी स्क्रीन और सोशल मीडिया के जरिये देश-दुनिया में प्रसारण हुआ।

शांतिकुंज ‘गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ उपासना’ कार्यक्रम का भी विधिवत समापन हो गया। इससे पहले देशभर में 75 हजार पौधा का भी रोपण किया गया।

अपने वीडियो संदेश में गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि गंगा और गायत्री भगवान की दो विशेष विभूतियां हैं। पतित पावनी गंगा में स्नान करने से तन शुद्ध होता है और गायत्री मंत्र के नियमित पयपान से मन पवित्र। गंगा-गायत्री का मनुष्य को नवजीवन देने के लिए अवतरण हुआ है। कहा कि गायत्री व सूर्य उपासना से साधक के प्राणों का शोधन होता है और ऊर्जा संचरित होती है। गंगा को राष्ट्र का गौरव बताते हुए उन्होंने गंगा माहात्म्य की विस्तृत व्याख्या की।

डॉ. पंड्या ने कहा कि जिस तरह गुरु गोविंद सिंह ने गुरुग्रंथ साहिब को गुरु के स्थान पर स्थापित किया, उसी तरह युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने भी किसी को गुरु की पदवी नहीं दी। विश्वभर में फैले गायत्री परिवार के अनुयायी सिर्फ आचार्य को ही अपना गुरु मानते हैं। संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि जिस तरह टाइप राइटर पर टाइप किए अक्षरों का प्रकटीकरण उसके सामने पेपर या स्क्रीन पर होता है, उसी तरह मनुष्य के विचारों का पता भी उसके कर्मो से चलता है।

उन्होंने कहा कि मन से गंगा स्नान करने पर तन शुद्ध हो जाता है और गायत्री की मनोयोग पूर्वक साधना से साधक के विचार पवित्र हो जाते हैं। गायत्री के सिद्ध साधक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने वर्ष 1990 को गायत्री जयंती के दिन ही महाप्रयाण किया था। इसलिए इस दिन पर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया जाता है। इस अवसर पर आचार्यश्री की समाधि पर साधकों ने पुष्पांजलि भी आपूर्ति की।

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