ट्रंप सहित दुनिया के दिग्‍गजाें को खरी-खरी सुनाने वाली Greta

आज यानी शुक्रवार को दुनिया भर के लाखों छात्र जलवायु परिवर्तन को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन लाखों छात्रों ने एक दिन स्कूल न जाकर पर्यावरण हित में काम करने का फैसला किया है।
दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए आंदोलन का नेतृत्व एक 16 साल की किशोरी कर रही है।
उस किशोरी का नाम Greta Thunberg है। Greta के इस विश्व व्यापी आंदोलन का नाम फ्राइडेज फॉर फ्यूचर (Fridays for Future) है। जलवायु की जंग लड़ रही ग्रेटा, ट्रंप जैसे दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं को भी खरी-खरी सुना चुकी हैं।
ग्रेटा का परिचय
Greta का जन्म 2003 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुआ। उनका मैलेना अर्नमन है। वह स्वीडन की एक ओपेरा सिंगर हैं। उनके पिता अभिनेता हैं जिनका नाम स्वांते टनबर्ग (Svante Thunberg) है।
​घर से शुरुआत
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ रहीं Greta ने पहले अपने घर से शुरुआत की। उन्होंने अपने माता-पिता को अपनी जीवनशैली बदलने के लिए प्रेरित किया। करीब दो सालों तक उन्होंने अपने घर के माहौल को बदलने पर काम किया। उनके माता-पिता ने मांस का सेवन छोड़ दिया और जानवर के अंगों के इस्तेमाल से बनी चीजों से भी परहेज करना शुरू कर दिया। उन्होंने विमान से यात्राएं भी बंद कर दीं क्योंकि इन चीजों से कार्बन का उत्सर्जन काफी होता है।
जलवायु की जंग लड़ना कब शुरू किया?
अगस्त 2018 में उन्होंने नौवीं क्लास में जाना ही शुरू किया था। उस दौरान स्वीडन में 262 सालों की सबसे भयंकर गर्मी पड़ी। एक तरफ लू लोगों की झुलसा रही थी तो दूसरी और जंगल में लगी आग से पर्यावरण में प्रदूषण फैला हुआ था। उसी बीच 9 सितंबर को स्वीडन में आम चुनाव था। उन्होंने आम चुनाव के समाप्त होने तक स्कूल नहीं जाने का फैसला किया। 20 अगस्त से उन्होंने जलवायु की जंग शुरू की। उन्होंने सरकार से मांग की कि पैरिस समझौते के मुताबिक कार्बन उत्सर्जन करे। अपनी बात मनवाने के लिए उन्होंने स्वीडन की संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। स्कूल समय में उन्होंने रोजाना तीन हफ्ते तक स्वीडन की संसद के बाहर प्रधर्शन किया। उन्होंने इस दौरान लोगों को पर्चियां भी बांटीं। पर्चियों में लिखा होता था, ‘मैं ऐसा इसलिए कर रही हूं क्योंकि आप वयस्क लोग मेरे भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।’
दुनिया में फैल गया उनका आंदोलन
उन्होंने जब सोशल मीडिया पर आंदोलन की तस्वीरें पोस्ट कीं तो तुरंत ही दुनिया भर से उनको समर्थन मिलने लगा। देखते-देखते ही वह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ने वाली योद्धा बन गईं। दुनिया भर के स्कूली छात्र ग्रेटा के इस आंदोलन से प्रभावित हुए जिसको ‘ग्रेटा टुनबर्ग इफेक्ट’ कहा गया। फरवरी 2019 में 224 शिक्षाविदों ने उनके समर्थन में एक ओपन लेटर पर हस्ताक्षर किया। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरिस ने भी उनके स्कूली आंदोलन को सराहा। इसके बाद ग्रेटा टुनबर्ग की ख्याति बढ़ती गई। उनको दुनिया के कई शीर्ष मंचों पर जलवायु परिवर्तन के विषय पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया।
लोगों पर पड़ा असर
जून 2019 में स्वीडन के रेलवे विभाग ने बताया कि घरेलू यात्राओं के लिए रेल की यात्रा करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।
दरअसल, ग्रेटा ने लोगों से विमान की यात्रा बंद करने को कहा था क्योंकि विमान से कार्बन का उत्सर्जन काफी होता है। ग्रेटा ने खुद भी दो अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में जाने के लिए विमान की यात्रा से मना कर दिया था।
खुद भी नहीं भरतीं उड़ान
अगस्त 2019 में टुनबर्ग यूके से यूएस एक ऐसे जहाज में गईं जिनमें सोलर पैनल और अंडरवॉटर टर्बाइन लगे हुए थे। उनके जहाज से कार्बन का जीरो उत्सर्जन हो रहा था। उनकी यात्रा 15 दिनों तक चली। वहां उन्होंने न्यू यॉर्क में एक जलवायु सम्मेलन में हिस्सा लिया।
ग्रेटा के क्रांतिकारी बोल
उन्होंने दिसंबर 2018 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन को संबोधित किया था जहां उन्होंने दुनिया के लीडर्स को ‘गैरजिम्मेदार बच्चा’ कहा।
दावोस सम्मेलन में बिजनेस लीडर्स को सुनाई खरी-खरी
जनवरी 2019 में दावोस सम्मेलन में उन्होंने बिजनेस जगत की दुनिया भर की हस्तियों की आलोचना की।
उन्होंने कहा था, ‘कुछ लोग… कुछ कंपनियों को मालूम है कि कल्पना से परे पैसा कमाना जारी रखने के लिए वे वास्तव में किन मूल्यहीन मूल्यों का बलिदान दे रहे हैं। और मेरा मानना है कि आपमें से कई उस तरह के लोगों के समूह का हिस्सा हैं।’
ट्रंप के बारे में दो टूक
पिछले महीने जब वह अमेरिका पहुंची थीं तो एक रिपोर्टर ने उनसे ट्रंप से मिलने के बारे में पूछा।
इस पर उन्होंने कहा, ‘जब वह बिल्कुल मेरी बातों को सुनने नहीं जा रहे हैं तो ऐसे में मैं उनसे बात करके अपना समय क्यों बर्बाद करूं?’
​यूएस सीनेट की एक जलवायु बैठक
यूएस सीनेट की एक जलवायु बैठक में उन्होंने कहा, ‘कृपया अपनी प्रशंसा को बचाकर रखिए। हमें इसकी जरूरत नहीं है। वास्तव में कुछ किए गए बगैर सिर्फ यह कहने के लिए हमें यहां आमंत्रित मत कीजिए कि हम कितने प्रेरक हैं।’
-एजेंसियां

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