कृषि रसायनों के कुप्रभावों को packet पर अंकित किया जाये

मथुरा। देश के कृषि मंत्री नरेंद्र स‍िंह तोमर को कृषि रसायनों द्वारा होने वाले कुप्रभावों को पैकेट पर अंकित किये जाने के सम्बंध में ग्रीन अर्थ फाउंडेशन ने इस पर रोक लगाने का आग्रह क‍िया है।

ग्रीन अर्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रेम सिंह ने मंत्री को प्रेष‍ित पत्र में कहा है क‍ि अत्यधिक कीटनाशकों का प्रयोग फसल उत्पादन में किया जा रहा है जिस कारण पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। कीटनाशक पैकेट पर उनके द्वारा होने वाले कुप्रभाव को स्थानीय भाषा में अंकित किया जाए कीटनाशकों का किसानों द्वारा जानकारी के अभाव में अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है जिस कारण मनुष्य जाति अत्यधिक प्रवाह प्रभावित हो रही है।

मनुष्य व जीव जंतुओं में कीटनाशकों से क्या विपरीत प्रभाव पड़ता है, वह इसके कुप्रभाव कितने समय तक रहते हैं। कीटनाशकों से पर्यावरण को खतरा कीटनाशकों की मात्रा तथा विषाक्तता पर निर्भर करता है। कुछ कीटनाशक ऐसे होते हैं जिनका क्षरण 4 वर्ष से लेकर 30 वर्ष तक हो सकता है। उनके उपयोग के कई वर्षों तक पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।

फसल उत्पादन में अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग के कारण यह कीटनाशक के कुप्रभाव मनुष्य वह पशुओं तक पहुंच रहे हैं जिससे उनकी प्रजनन क्षमता के ऊपर कुप्रभाव पड़ रहा है। दुधारू पशुओं से दूध उत्पादन के कारण दूध उत्पादों का व्यापक रूप से शिशु आहार के रूप में उपयोग क‍िया जाता है।

बच्चों में इसके ज्यादा घातक दुष्परिणाम संभावित हैं, इसी तरह वन्य जीवन में जन्मजात विकारों के लिए इन्हीं कीटनाशकों के अत्यधिक दुरुपयोग से जोड़कर देखा जा रहा है।

विभिन्न अनुसंधान पुरुष तथा महिला प्रजनन प्रणाली पर कीटनाशकों के प्रतिकूल प्रभाव की विस्तृत जानकारी देते हैं, सभी जीव जंतुओं में प्रजनन क्षमताओं की कमी को कीटनाशकों के कुप्रभाव के प्रमुख कारण के रूप में देखा जा रहा है।
प्रेम सिंह ने कहा क‍ि आपसे आग्रह है कृषि क्षेत्र में उपयोग किए जा रहे प्रत्येक रसायन पर उसके द्वारा पढ़ रहे कुप्रभावों को उस पैकेट पर अंकित किया जाए जोकि प्रत्येक क्षेत्र की स्थानीय भाषा में हो जिसे किसान सहजता से समझ सकें वह पैकेट पर ऐसे चित्र भी प्रकाशित किए जाएं जो कि कीटनाशकों के कारण मानव जाति में बीमारी के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

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