धरोहर विध्वंसकों पर कार्रवाई करे सरकार- डॉ. शर्मा

डॉ. रमेश चन्द्र शर्मा की 12वीं पुण्यतिथि पर आह्वान,
भास्करानन्द स्मृतियों के हनन पर प्रधान मंत्री बेबस,
सराय आजमाबाद, चामुण्डा टीला समेत महादेव घाट के विध्वंश पर उठाये सवाल

मथुरा। बढ़ती आबादी की चपेट में घटते संसाधनों के चलते ध्वस्तीकरण और विलोपन की शिकार सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर की रोकथाम पर यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब वसुंधरा से संस्कृति समेत प्रकृति का नामोनिशां नहीं रह जायेगा।

इस भवतव्यता पर डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में विश्वविख्यात पुराविद्, ब्रज विरासत उद्धारक, प्रथम निदेशक मथुरा संग्रहालय समेत ब्रज कला केन्द्र एवं वृन्दावन शोध संस्थान के प्रेरणाश्रोत डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा की 12वीं पुण्यतिथि एवं ‘धरोहर बचाओ आन्दोलन’ की दूसरी वर्षगांठ पर बुधवार को विश्राम घाट क्षेत्र में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मंथन किया गया।

संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं ‘धरोहर बचाओ आन्दोलन’ के राष्ट्रीय प्रवर्तक डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री ने संस्थान द्वारा बनारस के दुर्गाकुण्ड क्षेत्र के आनन्दबाग स्थित भास्करानन्द स्मृतियों के हनन का प्रकरण संज्ञान में लाने के बावजूद भूमाफियाओं के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जिसके चलते महान संत की समाधि को खुर्द-बुर्द होने से बचाया नहीं जा सका। आगे कहा कि हालात यहाँ तक पहुँच गये कि बनारस विकास प्राधिकरण की ओर से जारी पाँच सौ रूपये की आर्थिक मदद पर भी रोक लगा दी गई और सेवायत स्वामीचरण मिश्र की दिल्ली दौड़ नाकाम होती गई। कहा कि स्मारक की मालकीयत की दावेदार अमेठी रियासत की ओर से सांसद संजय सिंह भी सरकार पर कोई प्रभाव बनाने में असफल रहे और असामाजिक तत्वों का वर्चस्व भदैनी के बाद आनन्दबाग क्षेत्र में गहराता गया।

डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि उन्नाव जिले के औरास क्षेत्र में दसकोें से चलती आई पुरावशेषों की चोरी और प्राचीन स्थलों पर जबरन दावेदारी के मामलों पर प्रशासनिक संज्ञान के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया जिसके चलते सई घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण पुरावशेष गायब होते गये और प्राचीन स्थल के नाम पूर्व से दर्ज 40 बीघा जमीन भूमाफियाओं के हत्थे जा लगी जिसके विकास कार्यों में दखल होने पर सरकार से साढ़े तीन करोड़ रूपये भी मुआवजे में वसूल कर लिये गये। आगे कहा कि क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत माँसभक्षियों की कुदृष्टि की शिकार होती गई और वन्यजीवों के साथ राष्ट्रीय पक्षी मोर का भी अस्तित्व मिटता गया। इस तरह मातृदेवियों की प्रसन्नता में लोकगीतों के भ्रमर गायन, पक्षियों के कलरव कुंजों और जुगनुओं से जगमग औरास आज दुर्दशा पर सिर्फ सिसक रहा है।

डॉ0 शर्मा ने आक्रोश जताया कि मौजूदा सरकार ने अनवरत चेतावनी के बावजूद मथुरा क्षेत्र में सराय आजमाबाद, चामुण्डा टीला और महादेव घाट के अधिग्रहण और संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया जिसके चलते महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर के निशां मिटते गये। आगे कहा कि महादेव घाट पर जारी दुष्प्रयासों पर भी स्थानीय प्रशासन समेत केन्द्र एवं राज्य इकाई के पुरातत्व विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। नतीजन महादजी सिंधिया के सेनापति द्वारा निर्मित घाट आज कुड़ा-करकट के बीच जीवन की अन्तिम सांसें गिन रहा है। कहा कि पचास वर्ष पूर्व वैरागी संत राधे बाबा से आबाद घाट के पुनर्जीवित होने की उम्मीद जगी थी। मगर बाबा के लोभ ने जल्द उन्हें दिलावर खाँ के महल का मालिक बना दिया जो 1857 से पूर्व दूधाधारी के नाम दर्ज टीला रहा था। अब तो हबस और बढ़ती गई और आसपास की जमींने भी गोसेवा के नाम पर हथिया ली गई और उनके हरे-भरे जंगल आग की भेंट चढा़ दिये गये। सूत्रों की माने तो प्रकृति विनाशक कार्रवाई में सूबे के संस्कृति मंत्री का भी हाथ बताया जा रहा है क्यों कि उन्हें सत्ता में बने रहने के लिए जनता के बजाय बाबाओं का भय ज्यादा सता रहा है।

डॉ0 शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि केन्द्र एवं राज्य सरकार ने उपर्युक्त प्रकरणों पर कार्रवाई नहीं की तो आर0 टी0 आई0 के बाद उनके खिलाफ संसद व विधान सभा में सवाल उठाने के साथ आन्दोलन भी चलाया जायेगा।

इससे पूर्व उपस्थितों ने माँ यमुना समेत डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा के चित्रपटों पर पुष्पार्चन से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोजन स्थल भारत माता व माँ यमुना के जयकारों एवं ‘डॉ0 शर्मा अमर रहें राष्ट्र विरासत प्रखर रहे’ जैसे नारों से गूंज उठा।

आयोजन में मंसोला चतुर्वेदी, राकेश चतुर्वेदी, कमली चतुर्वेदी, कीर्ति चतुर्वेदी, विपिन चतुर्वेदी, शरद चतुर्वेदी ने भागीदारी की।

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