राजस्व के लिए जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ न करे सरकार

नई दिल्ली। एक ओर कोरोना विषाणु के प्रादुर्भाव से जनता के प्राण संकट में न पड़ जाएं, इसलिए सरकार ने आर्थिक हानि सहन करते हुए ‘लॉकडाउन’ का साहसी और प्रशंसनीय निर्णय लिया परंतु दूसरी ओर केवल राजस्व (रेवेन्यू) वृद्धि के लिए मद्य की दुकानें खोलने का निर्णय लिया। इससे देश में कोरोना का प्रादुर्भाव बढे़गा जिससे जनता संकट में पडे़गी।

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने समिति की ओर से सरकार से आव्हान क‍िया है क‍ि मद्य के कारण होनेवाले महिलाओं पर अत्याचार, बच्चों पर होनेवाले गलत संस्कार कहीं इस निर्णय के कारण बढ़ ना जायें इसलिए समाज के सर्वांगीण हित के लिए और कोरोना का बढ़ता प्रभाव रोकने के लिए मद्य की दुकानें खोलने का निर्णय केंद्र और राज्य सरकार यथाशीघ्र निरस्त करे।

मद्य की दुकानें खोलने की अनुमति मिलने से आज अनेक स्थानों पर लंबी-लंबी कतारें दिखाई दीं। देश में कोरोना का प्रभाव और उससे होनेवाली मृत्यु दर में वृद्धि होने पर भी मद्य की दुकानों के बाहर की स्थिति अत्यंत भयावह है। सरकार के बनाए नियम अर्थात ‘सोशल डिस्टेंसिंग’का पालन, मास्क लगाना, धारा 144 के अनुसार चार लोगों का एकत्र न होना, घर में ही रहना आदि सभी नियम पैरों तले रौंदे जा रहे हैं। बिना मद्यपान किए जब यह स्थिति है, तब मद्यपान करने के पश्‍चात क्या स्थिति होगी, इसकी कल्पना करना भी भयानक है। मद्य कोई जीवन के ल‍िए आवश्यक नहीं है। इस निर्णय के कारण देश में कोरोना का प्रादुर्भाव बढ़ने की संभावना प्रबल है। अत: मद्यपान को प्रोत्साहन अर्थात एक प्रकार से ‘कोरोना’के प्रादुर्भाव को और देश में अपराधों की वृद्धि को प्रोत्साहन देने समान होगा ।

देश में होनेवाले अपराधों में मद्यपान से होनेवाले अपराधों की गिनती अधिक है। इससे महिलाओं पर अत्याचार होने की घटनाओं में भी वृद्धि के आंकडे़ अनेक बार प्रकाशित होते हैं। हत्या, मारपीट-झगडे़, आत्महत्या, कौटुंबिक हिंसा इत्यादि अनेक बातों के पीछे मद्यपान, यह एक मुख्य कारण है।

मिलावटी मद्य से होनेवाली मृत्यु भी एक गंभीर समस्या है। इसलिए समाजहित में, देश के हित में मद्य की दुकानें खोलने की अनुमति देनेवाला निर्णय केंद्र और सभी राज्य सरकारें यथाशीघ्र निरस्त करें।

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