GST में राहत देने को सरकार ने खारिज किए नौकरशाहों के तर्क

नई दिल्ली। GST काउंसिल ने शनिवार की मीटिंग के बाद भले ही करीब 100 आइट्म्स पर टैक्स में कमी करने का फैसला लिया है, लेकिन यह इतना आसान नहीं था। काउंसिल के इस फैसले को लेकर नौकरशाहों का कहना था कि इससे रेवेन्यू प्रभावित होगा लेकिन राजनेताओं ने उनके तर्कों को खारिज करते हुए सरकार ने लुभावना रास्ता चुना।
यही नहीं, काउंसिल ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल और नेचुरल गैस पर टैक्स बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के प्लान को भी रद्द कर दिया गया।
एक अधिकारी ने कहा, ‘कई ऐसे आइटम्स के भी रेट में कटौती कर दी गई, जो कि GST काउंसिल के एजेंडे में ही नहीं थीं।’ हर बार रेट घटाने के किसी भी फैसले को पहले फिटमेंट कमेटी मंजूर करती थी। इस कमेटी में राज्य सरकारों और वित्त मंत्रालय के भी कई शीर्ष अधिकारी शामिल होते थे लेकिन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने काउंसिल की 28वीं मीटिंग राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों की बात को मानने का फैसला लिया।
सीनियर अधिकारियों ने इस तरह से तमाम प्रॉडक्ट्स पर छूट देने को लेकर असहमति जताई है लेकिन GST काउंसिल में शामिल नेताओं ने 2019 के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए रेट घटाने का फैसला लिया। फैसले की जानकारी देते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल ने कहा भी कि राज्य सरकारों की भी कई मांगें थीं।
अधिकारियों और नेताओं के बीच यह असहजता कॉन्फ्रेंस हॉल के बाहर भी देखी जा सकती थी, जहां चाय पर बात करते हुए कई नौकरशाहों ने नेताओं से कहा कि इस छूट की कीमत 10,000 करोड़ रुपये तक होगी। हालांकि मंत्रियों का कहना है कि रेट में कटौती से उपभोग में इजाफा होगा और उसको अनुपात को देखते हुए जो नुकसान होगा, वह ख्याली ही होगा।
-एजेंसी

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