Lease ट्रांसफर से पहले जेट एयरवेज से कर वसूलने की तैयारी

नई दिल्‍ली। जेट एयरवेज का परिचालन बंद हो जाने के बाद उसके विमान बिना कर चुकाए Lease कर्ताओं के पास वापस न चले जाएं, इसके लिए वित्त मंत्रालय का अप्रत्यक्ष कर विभाग सक्रिय हो गया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जेट एयरवेज द्वारा Lease पर लिए गए विमानों की जांच-पड़ताल शुरू हो गई है।
इससे पहले 2012 में जब विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस बंद हुई थी, उस दौरान उसके सभी विमान लीजकर्ताओं के पास बिना कर चुकाए वापस चले गए थे। कुछ विमान तो एमआरओ सर्विस के लिए जब विदेश में थे, तभी वहां से ही उठा लिए गए थे। इस कारण सरकार को राजस्व का काफी नुकसान हुआ था।

अधिकारी ने बताया कि जेट एयरवेज के विमान लीजकर्ताओं के पास से जब भारत आए थे, तब उस पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगा था। उस समय सरकार ने इस शर्त पर शुक्ल मुक्त आयात की अनुमति दी थी कि घरेलू विमानन कंपनी इन विमानों की सेवा लेगी और लीज की अवधि बीतने पर लीजकर्ताओं के पास वापस चली जाएंगी।

हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों के कारण विमानों को लीज अवधि खत्म होने से पहले ही विमानों को वापस भेजना होगा, जिसे डीम्ड एक्सपोर्ट माना जाएगा। ऐसे में सीमा शुल्क विभाग के पास बिल ऑफ इंट्री दाखिल करनी होगी। उसी के आधार पर आयात शुल्क की गणना होगी।

लीज ट्रांसफर तो कोई कर नहीं
अप्रत्यक्ष कर विभाग के अधिकारी बताते हैं कि यदि भारत में ही किसी और कंपनी के पक्ष में इन विमानों का लीज ट्रांसफर होता है तो नियमानुसार कोई कर देय नहीं होगा। यदि ये विमान लीजकर्ताओं को वापस भेजे जाते हैं या जेट एयरवेज को ऋण देने वाले बैंक इसे किसी अन्य को बेचते हैं तो सीमा शुल्क देय होगा। यह शुल्क काफी होगा क्योंकि वर्तमान में बोइंग-747 श्रेणी के एक विमान की कीमत ही 15 करोड़ डॉलर है, जबकि एयरबस-380 किस्म के एक विमान की कीमत 35 करोड़ डॉलर है।

इस समय जेट के पास 86 विमान

विमानन कंपनियों के फ्लीट की जानकारी देने वाली साइट प्लेन स्पाटर्स डॉट नेट के मुताबिक, इस समय जेट एयरवेज के पास एटीएआर 42/72 किस्म के कुल 16 विमान हैं। एयरबस-330 किस्म के सात, बोइंग-737 किस्म के 53 और बोइंग-777 किस्म के 10 विमान हैं। कभी इस कंपनी के पास 125 विमानों का बेड़ा हुआ करता था, जो अब घटकर 86 रह गया है।

अस्थायी तौर पर अन्य कंपनियों को मिलेंगे जेट के स्लॉट

जेट एयरवेज का परिचालंन बंद होने के बाद यात्रियों की मुश्किलें कम करने के लिए सरकार ने उसके उड़ान समय (स्लॉट) को किसी अन्य कंपनी को आवंटित करने का फैसला किया है। यह आवंटन अस्थायी तौर पर तीन महीने के लिए होगा। नागर विमानन मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि स्लॉट आवंटन पारदर्शी तरीके से होगा। इसके लिए एक समिति गठित हुई है, जिसमें डीजीसीए, एएआई, विमानन क्षेत्र की कंपनियां और स्लॉट को-ऑर्डिनेटर के प्रतिनिधि शामिल हैं।

जेट के स्लॉट उन्हीं कंपनियों को मिलेंगे, जो इसका उपयोग करने के लिए अतिरिक्त विमान लगाने के लिए तैयार होंगे। हालांकि, उस स्लॉट पर जेट एयरवेज का अधिकार बरकरार रहेगा और परिचालन दोबारा शुरू होने पर उसे उसके स्लॉट मिल जाएंगे।

-एजेंसी

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