Jewar airport के लिए किसानों की ज़मीन छीन रही है सरकार: सिसो

आगरा। Jewar airport के लिए के लिये सरकार ने सभी कायदे कानून दरकिनार कर दिये हैं, बिना जमीन और पर्यावरण स्‍वीकृति के निवेशकों को इंटरनेशनल प्रोजेक्‍ट में निवेश करने आने को आकर्षित करने की प्रक्रिया चल रही है।

सिविल सोसायटी आगरा ने Jewar airport के लिए शुरू हो चुके किसानों की जमीन सरकार के द्वारा छीने जाने के प्रयास का प्रबल विरोध किया है।

चकबन्‍दी की प्रक्रिया के तहत समूचा देश आता है, जिसका मकसद ग्रामीणों की जरूरतों के लिये जमीन की उपलब्‍धता सुनिश्‍चित किये जाने के साथ ही भूमि की मिल्‍कियत के रिकार्ड अपग्रेडिट करना भी है। यही नहीं 12 एकड़ से ज्‍यादा की सिंचित जमीन को सरकार /राजकीय अस्‍थान की जमीन में निहित करना है।

यह जमीन भूमिहीनों और अनुसूचित जाति के गांव वालों के गांवों की भूमि प्रबंध समितियों की बैठक में लिये गये निर्णयों के अनुसार दर्ज होती है जबकि जैबर में जो कुछ यमुना एक्‍सप्रेस वे अथार्टी करने जा रही है, वह इसके ठीक उलट है। खेती की जमीन के रिकार्ड अपडेट नहीं हैं। फलस्‍वरूप अधिकतम जोत सीमा से अधिक के भूमि मालिक भी सरकारी मुआवजा पाने वालों की लाइन में लगे हुए हैं। वहीं तमाम ऐसे हैं जो कि जमीन का वाजिब हक रखते हैं किन्‍तु रिकार्डों के अपडेट न होने से जमीन का मुआवजा पाने की स्‍थिति में तब ही पहुंच सकेंगे जबकि सिविल कानून की लम्‍बी प्रक्रिया पूरी कर राजस्‍व रिकार्डों में अपना नाम दर्ज करवा सकें।

चकबन्‍दी रिकार्ड अपडेट न होने से जैबर तहसील की खोती की जमीन का भू उपयोग गैरकानूनी तरीके से तब्‍दील करवाने के मामले भी हमेश के लिये दबाये जाने का प्रयास है। अब तक केवल जैबर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्‍लान ही बनता बिडडता रहा है , जबकि तहसील को नेशनल कैपीटल जोन प्‍लान में आये हुए लम्‍बा अरसा हो चुका है और यहां के लिये वाकायदा रीजनल प्‍लानिंग भी है । वर्तमान में जो कुछ चल रहा है, वह पूरी तरह से मनमानी प्रक्रिया है और सरकारी संक्षण में होने वाली एक गलत मिसाल।

सिविल सोसायटी आगरा जो कि आगरा में एयरपोर्ट बनाये जाने की मांग को लेकर सक्रिय है और उसका अपना सीमित सक्रियता का लक्ष्‍य रहा है किन्‍तु Jewar airport से संबधित मामलातों से निकटता रहने से जैबर में जो कुछ चल रहा है और बाद मे होने वाला उससे संबधित भी तमाम जानकारियां उसके संज्ञान में हैं।

व्‍यापक परिप्रेक्ष्‍य में तो केवल राजनीतिज्ञ और जनप्रतिनिधि ही अपनी भूमिका निर्वाहन कर सकते हैं किन्‍तु अपने सीमित संसाधनों के बावजूद हमारी चिंता के मुख्‍य बिन्‍दुु हैंं :–

(1) भूमि हीन किसान, जो खेतिहर मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। खोती का रकबा खत्‍म हो जाने के बाद उनकी रोजीरोटी सीधे तौर पर प्रभावित होगी। इनकी अजीविका, आवासीय व्‍यवस्‍था के विकल्‍प को लेकर उ प्र सरकार या यमुना एक्‍सप्रेस वे अथार्टी अब तक कोयी भी खाका सार्वजनिक नहीं कर सकी है।

(2) जैबर तहसील के गांवों में कब चकबन्‍दी हुइ्र और सरकार ग्रामीणों के जमीन पर सिविल अधिकारों को सुनिश्‍चित करने के लिये रिार्ड अपडेट करने को चकबन्‍दी करवाने की प्रक्रिया से अब भी कयो बचना चाहती है ।

(3) सिविल सोसायटी ने जैबर तहसील से आर टी आई एकट के तहत यह जानना चाह था कि जैबर तहसील के कितने गांवों में 12 एकड से ज्‍यादा जमीन किसान हैं और इनमें से किने ऐसे हैं जिनके द्वारा वर्ष 2014 के बाद से ग्रामीणों से जमीने खरीदी गयी हैं।

(4) जैबर तहसील के तहत खेती की जमीन के उपायोग परिवार्तन के कितने मामले आयेा ओर उनमें से तहसील के द्वारा कितनों में अनुमति दी गयी।

किन्‍तु एक भी मामले में आर टी आई एक्‍ट के तहत तहसील से जबाब नहीं आया। नहीं इस संबध में की जाने वाली किसी कोशिश में कामयाबी की उम्‍मीद है। इसी लिये सिविल सोसायटी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका के माध्‍यम से उपरोकत मुद्दोंं पर सरकार को जबान खोलने को विवश किया है। हमारी मुख्‍य चिंता जैबर में भूमिहीन किसानों के पुनर्वस और उनके जीवन यापन के वैकल्‍पिक साधन को सुनिश्‍चत करवाने का ेलकर है। हम इस सच्‍चाई से भी अपने को अलग नहीं मानते कि कि अगर सरकार की अदूदर्शिता पूर्ण कार्रवाहियों से जैबर से बडी संख्‍या में किसानों को अनयत्र जाना पडा तो आगरा भी अपरोक्ष रूप से प्रभावित होगा ।

जैबर में चकबन्‍दी करवाये जाने के प्रति शासन को उसका ध्‍यान आकर्षित करने के लिये सिविल सोसायटी के एडवोकेट श्री अकलंक कुमा जैन ने चीफ जस्‍टिस कोर्ट में सिविल रिट पिटीशन पब्‍लिक इंट्रैस्‍ट दाखिल की है और संबधित पक्ष को नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

Jewar airport के उक्‍त संदर्भ में सिविल सोसायटी आगरा की इस प्रेस कांफ्रेंस को श्री शिरोमणि सिंह, श्री राजीव सक्सेना और अनिल शर्मा ने संबोधित किया।

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