वैश्विक धरोहर विशेषज्ञ ने कहा, Notre Dame कैथेड्रल की आग भारत के लिए भी चेतावनी

नई दिल्‍ली। वैश्विक धरोहर विशेषज्ञ ने बुधवार को कहा कि Notre Dame कैथेड्रल में लगी आग भारत के लिए भी चेतावनी है। उन्होंने कहा कि नई सरकार को 12 महीने के भीतर देशभर में मौजूद ऐतिहासिक इमारतों का फायर ऑडिट करवाना चाहिए।
सोमवार को फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित Notre Dame कैथेड्रल में आग लगी थी, जिसके कारण इमारत का पूरा शिखर जल गया था। आग पर नौ घंटे से ज्यादा की मशक्कत के बाद काबू पाया जा सका था।
भारतीय मूल के विनोद डेनियल ऑस्ट्रेलिया में संग्रहालय विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को ऐतिहासिक इमारतों का फायर ऑडिट करना चाहिए। पेरिस में हुई घटना से भारत को भी सतर्कता बढ़ाना चाहिए। ऐसे स्थानों पर आग से बचने के पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए।
1991 में नोट्रे डेम कैथेड्रल को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया। यह इमारत 850 साल पुरानी है। आग लगने से इमारत का लकड़ी से बना शिखर पूरी तरह जलकर खाक हो गया।
57 वर्षीय डेनियल ने कहा, इस बात पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए था मगर फिलहाल चुनाव जारी हैं। ऐसे में हमें नई सरकार का इंतजार करना होगा। नई सरकार को 12 महीनों के भीतर ऐतिहासिक इमारतों का फायर ऑडिट करवाना चाहिए।
डेनियल के मुताबिक उन्होंने दिसंबर में ही कहा था कि भारत में मौजूद अधिकांश संग्रहालयों और सांस्कृतिक विरासतों में आग लगने का खतरा ज्यादा है। इस स्थानों पर आपदा प्रबंधन को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
डेनियल ने कहा कि नोट्रे डेम कैथेड्रल की घटना का मुझे दुख है। हम इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारत को किताबों, पत्रिकाओं और फिल्मों में देखते आए हैं। हालांकि, चर्च के मुख्य हिस्से को तबाही से बचा लिया गया।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 5 साल के भीतर नोट्रे डेम को फिर से बनाने के लिए कहा है। फ्रांस के बिजनेसमैन अरनॉल्ट एलवीएमएच ने नोट्रे डेम के पुनर्निर्माण के लिए करीब 1500 करोड़ रु. देने का वादा किया है। इसके अलावा हॉलीवुड एक्ट्रेस सलमा हाएक के पति फ्रंसिस हेनरी पिनॉल्ट ने भी करीब 786 करोड़ रु. चंदा देने का ऐलान किया।
नोट्रे डेम कैथेड्रल का निर्माण 1160 ईस्वी में शुरू हुआ, जो 1260 ईस्वी तक चला। फ्रेंच गॉथिक आर्किटेक्ट का यह नायाब नमूना 69 मीटर ऊंचा है। इसके शिखर तक पहुंचने के लिए 387 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। यहां नेपोलियन बोनापार्ट का राज्याभिषेक किया गया था। हर साल इसे देखने 1.2 करोड़ लोग आते हैं।
-एजेंसियां

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