Hexaware टेक्नो. लिमिटेड में GL बजाज के छात्र को म‍िली जॉब

मथुरा। GL बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के ECE छात्र अभिनव गुप्ता ने Hexaware Technologies  में सॉफ्टवेयर इंजीनियर (ट्रेनी) के पद का ऑफर लेटर प्राप्त किया है। अभिनव ने अपनी इस सफलता का श्रेय संस्थान की शानदार शिक्षण व्यवस्था को दिया है।

ज्ञातव्य है कि गत दिवस हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के पदाधिकारियों ने ग्रेटर नोएडा में पूल कैंपस ड्राइव का आयोजन किया जिसमें दिल्ली व एनसीआर के कई कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के साथ जी.एल. बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन्स के छात्र अभिनव गुप्ता ने भी सहभागिता की। अभिनव ने अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स, टेक्निकल नॉलेज से कम्पनी प्रतिनिधियों को न केवल प्रभावित किया बल्कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर सेवा का अवसर भी हासिल किया।

अभिनव गुप्ता की इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आर.के. एज्यूकेशन हब के अध्यक्ष डा. रामकिशोर अग्रवाल ने कहा कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी विकसित होती है वैसे-वैसे टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। डा. अग्रवाल ने कहा कि हर इंसान के मन में बड़ी-बड़ी इच्छाएं होती हैं, हर कोई बड़े-बड़े सपने देखता है मगर उसे पूरा वही कर पाता है जो सपने देखने के बाद उसके लिए दिन-रात मेहनत करता है। अभिनव की इस सफलता से अन्य छात्र-छात्राओं को सीख लेनी चाहिए।

उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने कहा कि आज का जमाना काफी हद तक टेक्नोलॉजी का जमाना कहा जाने लगा है। आज के बच्चे और युवा कम्प्यूटर तथा इंटरनेट की दुनिया की तरफ काफी तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, यही वजह है कि इनका रुझान भी इसी क्षेत्र में बढ़ रहा है। चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने अभिनव गुप्ता को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान के अन्य छात्र-छात्राओं को भी कम्प्यूटर लैंग्वेज, स्किल्स, सॉफ्टवेयर डेवलप, कम्प्यूटर भाषाओं की जानकारी हासिल करनी चाहिए।

संस्थान के निदेशक डा. एल.के. त्यागी ने कहा कि छात्रों को यदि एक प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर इंजीनियर या डेवलपर बनना है तो इसके लिए उसे अपने लॉजिक को बेहतर बनाना होगा। कम्प्यूटर में जितने भी सॉफ्टवेयर बनते हैं उसमें लॉजिक लगाना बहुत जरूरी है और अगर आपका लॉजिक सही है, तभी आप सॉफ्टवेयर बना सकते हैं। डा. त्यागी ने कहा कि सिर्फ सीखने और पढ़ लेने भर से आप सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं बन सकते। इस क्षेत्र में आपको एक्सपर्ट होना बहुत ही आवश्यक है और इसके लिए आपको लगातार नए-नए सॉफ्टवेयर बनाने के प्रयास करना होगा।

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