लड़कियों को समान अवसर और शिक्षा जरूरीः मधु शर्मा

मथुरा। राष्ट्र के विकास में जितना योगदान पुरुषों का है उतना ही योगदान महिलाओं का भी है। महिलाओं की सहभागिता के बिना राष्ट्र का सतत विकास सम्भव नहीं है। मेरा मानना है कि इस दिशा में महिला और पुरुष दोनों को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए। यह विचार भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा अध्यक्ष मधु शर्मा ने शुक्रवार शाम जी.एल. बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में महिला सेल के शुभारम्भ अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान परिसर में एक पीपल का पौधा भी रोपा।

श्रीमती शर्मा ने जी.एल. बजाज संस्थान की प्रशंसा करते हुए कहा कि महिला सेल के गठन से यहां अध्ययन कर रही बेटियों को शिक्षा के साथ ही अन्य गतिविधियों का काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता न सिर्फ एक बुनियादी मानव अधिकार है बल्कि एक शांतिपूर्ण और टिकाऊ राष्ट्र के लिए आवश्‍यक बुनियाद भी है। महिलाओं को मुख्‍यधारा से बाहर रखने का मतलब दुनिया की आधी आबादी को समाज और अर्थव्‍यवस्‍था निर्माण में भागीदारी के अवसर से वंचित रखना है।

इस अवसर पर शुभ-कल्याण की संस्थापक विश्वरूपा ने कहा कि आज महिलाओं ने हर क्षेत्र में नये आयाम स्थापित कर देश का नाम रोशन किया है। हर सफल व्यक्ति के पीछे एक महिला का संघर्ष एवं योगदान होता है। शास्त्रों में देवियों को लेकर शुक्र से मंगल ग्रह के बारे में कहा गया है लेकिन परिवार में बेहतर सामंजस्य लाने के लिए आज पुरुषों को मंगल से शुक्र की यात्रा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण में जी.एल. बजाज में स्थापित महिला सेल मील का पत्थर साबित होगा।

संस्थान की निदेशक प्रो. (डॉ.) नीता अवस्थी ने कहा कि देश व उत्तर प्रदेश की सरकार ने महिला हिंसा को एक प्रमुख राष्‍ट्रीय प्राथमिकता माना है, जो लैंगिक समानता के बारे में संयुक्‍त राष्‍ट्र के सतत विकास उद्देश्‍यों का अंग है। प्रधानमंत्री की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पहल का उद्देश्‍य भारत में लड़कियों को समान अवसर और शिक्षा देना है। इसके अलावा महिलाओं के रोजगार के बारे में विशेष प्रयास, किशोरी बालिकाओं के सशक्तीकरण के कार्यक्रम, बेटियों की सम्पन्‍नता के लिए सुकन्‍या समृद्धि योजना और माताओं के लिए जननी सुरक्षा योजना जैसे उपाय लैंगिक समानता और लक्ष्‍य चार के उद्देश्‍यों के प्रति भारत के संकल्‍प को आगे बढ़ाते हैं। डॉ. नीता अवस्थी ने दहेज प्रथा पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने छोटी रियासतों जिनका कोई उत्तराधिकारी नहीं था, उनकी घेराबंदी करने के लिए काला कानून बनाया था। झांसी की रानी ने इसके लिए लड़ाई लड़ी। डॉ. अवस्थी ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न भेंट किया।

संस्थान की महिला सेल की संयोजक डॉ. हरलीन कौर ने सभी का आभार मानते हुए महिला सेल के गठन के उद्देश्यों से अवगत कराया। इस अवसर पर डॉ. श्रवण कुमार, प्रो. तान्या बेरा, प्रो. प्रज्ञा द्विवेदी, प्रो. करिश्मा मित्तल, प्रो. मोहम्मद मोहसिन सहित संस्थान के प्राध्यापक तथा सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
-Legend News

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