ज्ञान का वरदान

हम सब समाज को कुछ न कुछ दे सकते हैं। हम में से कोई भी ऐसा नहीं है जिसके पास दुनिया का पूरा ज्ञान हो, जो सब कुछ जानता हो, लेकिन हम सब कुछ न कुछ ऐसा जानते हो सकते हैं जिसे बाकी लोग नहीं जानते। बहुत से लोग जो सफल हो चुके हैं, जिनके पास ज्ञान ही नहीं, अनुभव भी है, साधन भी हैं, कइयों के पास तो समय भी है, वे समाज सेवा में रत हैं, ऐसे ज्यादातर लोग सचमुच व्यस्त हैं, पर उन्होंने अपनी दिनचर्या ऐसी बना रखी है कि वे इस नेक काम के लिए समय निकाल ही लेते हैं, क्योंकि वे दिल से चाहते हैं कि समाज का भला हो। उनके पास ज्ञान का जो वरदान है वह उनके साथ ही न चला जाए बल्कि बंट कर अक्षुण्ण हो जाए, अमर हो जाए, सबको उपलब्ध हो जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों का जीवन आसान हो जाए। हम पेड़ भी तो इसीलिए लगाते हैं ताकि सबको शुद्ध हवा मिल सके, सब उसकी छाया में बैठ सकें, सब उसके फलों का आनंद ले सकें।
जब हम ज्ञान बांटते हैं तो ज्ञान बढ़ता है, कई गुणा बढ़ता है। जो सीख रहे हैं उनका ज्ञान तो बढ़ता ही है, खुद सिखाने वाले का ज्ञान भी बढ़ता है। हैपीनेस गुरू के रूप में मैं जब प्रशिक्षण दे रहा होता हूं तो मेरे सामने बहुत से सवाल ऐसे आते हैं जिनका उत्तर देते समय खुद मेरे दिमाग में कोई नई बत्ती जलती है। इसलिए ज्ञान बांटना न केवल आनंददायक है, बल्कि फलदायी भी है और यह हम सब का सामूहिक उत्तरदायित्व हे कि हम अनवरत ज्ञान बांटते चलें।
हमारा व्यक्तित्व हमारी शक्ल-सूरत ही नहीं है, हमारी ड्रेस-सेंस ही नहीं है, हमारा ज्ञान ही नहीं है, बल्कि हमारा व्यवहार भी है, दूसरों की सहायता करने की हमारी इच्छा भी है, किसी के काम आने की हमारी कोशिश भी है। हमारा व्यक्तित्व वह है, जब हम न हों और कोई हमारा ज़िक्र करे। वह ज़िक्र जिस तरह से होगा, उससे हमारा व्यक्तित्व परिभाषित होता है। हमारा व्यक्तित्व मानो फूलों की सुगंध सरीखा है जो सारे वातावरण में व्याप्त हो जाता है।
हम सब में कुछ न कुछ खूबियां हैं और कुछ कमियां भी हैं, कुछ कमज़ोरियां भी हैं। जीवन में सफल होने के तीन परखे हुए गुर हैं। तीन मंत्र हैं सफलता के। पहला मंत्र यह है कि हम अपनी कमियों को समझें, कमज़ोरियों को समझें और उन्हें दूर करने की कोशिश करें। मान लीजिए मुझमें दस कमियां हैं जो मुझे पता हैं तो मुझे पहले कोई एक कमी चुननी चाहिए, उस पर थोड़ा-थोड़ा काम करना चाहिए, धीरे-धीरे उससे छुटकारा पाना चाहिए, हर रोज़ बस एक प्रतिशत, एक प्रतिशत का बदलाव हर रोज़, बस। युद्ध नहीं छेड़ना है, प्यार से, धीरे-धीरे उस कमी को दूर करना है। वज़न कम करना हो तो पहले महीने एक किलो भी कम हो जाए तो बहुत बढ़िया है। ये नहीं होना चाहिए कि जिम जाना शुरू कर दिया, जॉगिंग शुरू कर दी, डाइट चेंज कर दी और दो हफ्ते बाद बोर हो गये तो फिर से पिज़ा और बर्गर खाकर कोक पी लिया। युद्ध नहीं करना है, बस एक प्रतिशत का बदलाव लाना है हर रोज़। इससे समस्या हल हो जाएगी। समय लगेगा, मेहनत लगेगी, पर समस्या हल हो जाएगी।
आइये, अब हम जीवन में सफलता के दूसरे मंत्र की बात करें। जंगल में सबसे बड़ा जानवर हाथी है, सबसे ऊंचा जानवर जि़राफ है, सबसे चतुर जानवर लोमड़ी है, सबसे तेज़ दौडऩे वाला जानवर चीता है। इन सब विशेषताओं में से शेर में एक भी विशेषता नहीं है, फिर भी हम उसे जंगल का राजा इसलिए कहते हैं क्योंकि शेर साहसी होता है, वह चुनौतियों और अड़चनों से नहीं घबराता, बड़े आकार के और अपने से कई गुना शक्तिशाली जानवर को भी मार गिराने की हिम्मत रखता है और हर अवसर का लाभ उठाने की कोशिश करता है। शेर का यह चमत्कार ही उसे जंगल का राजा बनाने के लिए काफी है। इससे हमें यही सीख मिलती है कि जीवन में सफल होने के लिए आपको सर्वश्रेष्ठ होने, सर्वाधिक बुद्धिमान होने, सबसे ज्य़ादा चुस्त होने या आकर्षक होने या महान होने की आवश्यकता नहीं है। आपमें सिर्फ धैर्य और साहस होना चाहिए। असफलता की दशा में धैर्य और नई चुनौतियों का मुकाबला करने का साहस, ये दो गुण ही आपको जीवन में सफल बनाने के लिए काफी हैं। किसी भी चुनौती से डरिये मत, उसका हल ढूंढऩे का अवसर हाथ से न जाने दीजिए, खुद पर विश्वास रखिए और प्रयास करते रहिए। चुनौती से डरते रहेंगे तो बैठे रह जाएंगे और चुनौती के हल की संभावना तलाश करेंगे तो संभव है कि हल मिल जाए।
सफलता का तीसरा और सर्वाधिक महत्वपूर्ण मंत्र है कि हम कमियों को समझें, उन्हें दूर करने की कोशिश करें, पर उन पर फोकस न करें। हमारे पास कुछ खूबियां भी हैं ही, फोकस उन पर करें, उनका लाभ उठायें तो सफलता आसान हो जाएगी। मैं अक्सर एक उदाहरण दिया करता हूं। जंगल में तरह-तरह के पशु-पक्षी होते हैं। हम अगर जंगल के इन पशु-पक्षियों के उदाहरण से कुछ सीखना चाहें तो हमें हिरण और शेर के व्यवहार से वह सीख मिलती है जो हमारी सोच को बदल सकती है। हिरण की दौड़ने की गति लगभग 90 किलोमीटर प्रति घंटा होती है जबकि शेर की गति लगभग 55 किलोमीटर प्रति घंटा, लेकिन दौड़ने की गति लगभग आधी होने के बावजूद शेर हिरण का शिकार कर लेता है। क्यों होता है ऐसा ?
हिरण को मालूम है कि वह शेर से कमजोर है और अगर एक बार शेर की पकड़ में आ गया तो जान गंवा बैठेगा। हिरण दौड़ते वक्त अक्सर पीछे मुड़-मुड़कर देखता रहता है कि शेर कहां है। इससे उसकी गति कम हो जाती है और शेर थोड़ा और पास आ जाता है। अब शेर पास आता दिखा तो हिरण का आत्मविश्वास और कम हो जाता है, उससे उसकी गति पर और भी ज्यादा फर्क पड़ता है। आत्मविश्वास कम था इसलिए स्पीड कम हुई। स्पीड कम हुई तो आत्मविश्वास और भी कम हो गया। जैसे ही हिरण की गति कम हुई, शेर ने छलांग लगाई और हिरण का शिकार कर लिया। यहां दो फैक्टर काम कर रहे हैं। हिरण डरा हुआ है इसलिए अपनी कमजोरी पर फोकस कर रहा है। कमजोरी पर फोकस करने के कारण हिरण जान गंवा बैठता है। वही हिरण अगर अपनी इस खूबी पर गौर करता कि उसके दौड़ने की गति शेर की गति से बहुत ज्यादा है और सिर्फ तेज दौड़ता रहता तो शेर उसके नजदीक भी न फटक पाता और उसकी जान को कोई खतरा नहीं होता। हमारे व्यवहार में जो कमियां हों, उन्हें समझिए, उनका विश्लेषण कीजिए, उन्हें दूर कीजिए और जीवन में खुशियां लाइये। ज्ञान के इस वरदान को समझेंगे और अपने आसपास के लोगों में अपना ज्ञान बांटेंगे तो खुशियों की बुनियाद पक्की हो जाएगी और हमारा और हमारे आसपास के लोगों का जीवन खुशहाल हो जाएगा।

PK Khurana

 

 

– पी. के. खुराना,
हैपीनेस गुरू और मोटिवेशनल स्पीकर

 

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