द. भारत के माथुवा आदिवासियों के बनाए देशी गुड़ को मिला GI tag

नई दिल्‍ली। दक्षिण भारत के जंगलों में माथुवा आदिवासियों द्वारा तैयार किए गए एक गुड़ को फिलहाल GI tag (भगौलिक संपद्धा पहचान) मिल गया है।

केरल के मंदिरों में होता है इसका प्रयोग
केरल और तमिलनाडु की सीमा पर इड्डुकी जिले में बसे मारायुर गांव के माथुवा आदिवासियों द्वारा पश्चिम घाट के जंगलों में इस मारायुर गुड़ को तैयार किया जाता है। इस गुड़ की प्रसिद्धि इतनी है कि केरल के प्रत्येक मंदिर में यह धार्मिक आयोजन में प्रयोग लाया जाता है। केरल के जंगलों में करीब 2500 एकड़ जमीन पर गन्ने की खेती की जाती है। यह जगह मुन्नार से करीब 40 किलोमीटर दूर है।

ऐसे तैयार होता है गुड़
इस गुड़ को तैयार करने के लिए गन्ने के रस को एक बड़े से बर्तन में डालकर गर्म किया जाता है। फिर इसको ठंडा होने दिया जाता है। गुड़ को बनाने में किसी तरह के कोई केमिकल्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसको बनाने में नमक का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

वन विभाग करता है बिक्री
इस गुड़ की बिक्री केरल का वन विभाग करता है। इस गुड़ के लिए आप वन विभाग की वेबसाइट पर जाकर के सीधे ऑर्डर दे सकते हैं। इस गुड़ के तैयार होने के बाद तीन महीने में इसे खाकर के खत्म करना होता है। इसके अलावा आप लंबे समय तक इसको रखना चाहते हैं तो फिर फ्रिज में भी रख सकते हैं। यह गुड़ खाने के अलावा शक्करपट्टी और अन्य उत्पाद बनाने के भी काम आता है।

सर्दियों के मौसम में गुड़ का नाम सुनकर मन में एक अजीब से मिठास घुल जाती है। हम सभी लोग गुड़ के स्वाद से वाकिफ हैं। देश के ज्यादातर प्रांतों में गुड़ बनता है, जहां पर गन्ने की खेती होती है।
-एजेंसी

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