नवसृजन: रचनाकार सलिल सरोज की कुछ गज़लें

मेरे अज़ीम मुल्क़ से ही मेरी पहचान है

मेरे अज़ीम मुल्क़ से ही मेरी पहचान है
मंदिर की घंटी,मस्जिद की अजान है

सब नेमतें अता कर दी मुझपे मेहरबां होके
मेरा मुल्क ही सिर्फ मेरे लिए भगवान है

माँ के आँचल की तरह हिफाज़त की है
हर ज़ख़्म से बचा लेगा,इतना इत्मीनान है

इन्द्रधनुष से भी ज्यादा रंग हैं इसके परिधान में
सबसे अजीमोशान इतिहास होने का गुमान है

दुनिया हर मोड़ इस ओर ताकती रहती है
ज्ञान,विज्ञान और ध्यान का बेजोड़ निशान है।

(2)

तू मेरा कल नही, तू मेरा आज नहीं

तू मेरा कल नही, तू मेरा आज नहीं
तेरे मेरे दरम्यान अब कोई राज़ नहीं

तूने बुलाने में बहुत देर कर दी हमनशीं
सफर से लौट आने का रिवाज नहीं

तेरा नूर भले माहताब होगा ज़माने में
बेपर्दा हुश्न पर हमें तो कोई नाज़ नहीं

हुश्न की फिदरत है हर शय में बदल जाना
इश्क़ के यूँ बेअदब हो जाने के अंदाज़ नहीं

तुम तड़पोगी,तुम तरसोगी हमारे लिए
मेरी जुदाई में आह होगी,आवाज़ नहीं

(3)

गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो

गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो
आसमाँ पे तुम्हारी इबारत लिखना चाहता हूँ

तमाम दौलतें एक तरफ और तुम्हारी एक मुस्कान
मैं तुम्हारी मुस्कान पर भरे बाज़ार बिकना चाहता हूँ

रात की चादर हटे और तुम्हारा रूप खिले तब
मैं तुम्हारे माथे पर ओंस सा चमकना चाहता हूँ

कभी जुनून,कभी तिश्नगी,कभी आशना
तुम जैसा चाहो अब ,मैं वैसा दिखना चाहता हूँ

तुम बन जाओ बस मेरी आखिरी मंज़िल
मैं थक गया सफर से,अब रुकना चाहता हूँ।

(4)

जब भी बात की तो तेरी ही बात की

जब भी बात की तो तेरी ही बात की
बस यूँ हमने बसर दिन और रात की

पहले चिंगारी,फिर शोला और फिर आफ़ताब
उनके हुश्न की तारीफ की यूँ शुरुआत की

ख़्वाबों की गुमशुदा गलियों में भटके उम्र भर
तब जाके उनके नूरे-नज़र से मुलाक़ात की

न देखें उन्हें तो कुछ और दिखता ही नहीं
हमने अपने लिए खुद ही ऐसी हालात की.

  •  सलिल सरोज

सलिल सरोज- एक परिचय

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जन्म: 3 मार्च,1987,बेगूसराय जिले के नौलागढ़ गाँव में(बिहार)। शिक्षा: आरंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, तिलैया, कोडरमा,झारखंड से। जी.डी. कॉलेज,बेगूसराय, बिहार (इग्नू)से अंग्रेजी में बी.ए(2007),जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , नई दिल्ली से रूसी भाषा में बी.ए(2011), जीजस एन्ड मेरी कॉलेज,चाणक्यपुरी(इग्नू)से समाजशास्त्र में एम.ए(2015)। प्रयास: Remember Complete Dictionary का सह-अनुवादन,Splendid World Infermatica Study का सह-सम्पादन, स्थानीय पत्रिका”कोशिश” का संपादन एवं प्रकाशन, “मित्र-मधुर”पत्रिका में कविताओं का चुनाव। सम्प्रति: सामाजिक मुद्दों पर स्वतंत्र विचार एवं ज्वलन्त विषयों पर पैनी नज़र। सोशल मीडिया पर साहित्यिक धरोहर को जीवित रखने की अनवरत कोशिश।पंजाब केसरी ई अखबार ,वेब दुनिया ई अखबार, नवभारत टाइम्स ब्लॉग्स, दैनिक भास्कर ब्लॉग्स,दैनिक जागरण ब्लॉग्स, जय विजय पत्रिका, हिंदुस्तान पटनानामा,सरिता पत्रिका,अमर उजाला काव्य डेस्क समेत 30 से अधिक पत्रिकाओं व अखबारों में मेरी रचनाओं का निरंतर प्रकाशन। भोपाल स्थित आरुषि फॉउंडेशन के द्वारा अखिल भारतीय काव्य लेखन में गुलज़ार द्वारा चयनित प्रथम 20 में स्थान। कार्यालय की वार्षिक हिंदी पत्रिका में रचनाएँ प्रकाशित।

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