Rajasthan विधानसभा चुनाव से पहले घनश्याम तिवारी का भाजपा से इस्तीफा

जयपुर। Rajasthan विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवारी ने पार्टी को बड़ा झटका दिया है। तिवारी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की।  तिवारी के बेटे अखिलेश तिवारी ने पहले ही भारत वाहिनी नाम से अपनी पार्टी बना रखी है, जिसको चुनाव आयोग ने हाल ही में मान्यता दी है। भारत वाहिनी पार्टी के अध्यक्ष और संस्थापक अखिलेश तिवारी हैं। भारत वाहिनी पार्टी का पहला अधिवेशन जयपुर में तीन जुलाई को होगा। बता दें, घनश्याम तिवारी काफी दिनों से भाजपा से नाराज चल रहे थे, जिसके बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की है।

विधानसभा चुनाव से पहले घनश्याम तिवारी का इस्तीफा भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। घनश्याम तिवारी अभी जयपुर के सांगानेर से विधायक हैं और भाजपा में इनकी गिनती वरिष्ठ नेताओं में की जाती है। भारत वाहिनी ने फैसला किया है कि प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतार जाएंगे, ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किलें हो सकती हैं। घनश्याम तिवारी राजस्थान की राजनीति के धुरंधर कहे जाते हैं और उनकी शेखावाटी इलाके में अच्छी पकड़ है।

घनश्याम तिवारी का राजनीतिक सफर
भारतीय जनता पार्टी में घनश्याम तिवारी ने कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई हैं। घनश्याम तिवारी पहली बार सीकर से सकाल 1980 में विधायक बने थे। इसके बाद वे फिर इसी क्षेत्र से 1985 में जीतकर विधानसभा पहुंचे। साल 1993-1998 तक तिवारी चौमूं से विधायक रहे। तिवारी राजस्थान की 7वीं, 8वीं, 10वीं, 12वीं, 13वीं, 14वीं विधानसभा में विधायक रहे हैं। फिलहाल 2003 से वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र सांगानेर से विधायक है।

तिवारी भैरोंसिंह शेखावत सरकार में जुलाई 1998 से नवम्बर 1998 तक ऊर्जा मंत्री के पद पर रहे हैं। वहीं वसुंधरा सरकार में साल 2003 से 2007 तक प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, विधि एवं न्याय, संसदीय मामले, भाषाई अल्पसंख्यक, पुस्तकालय एवं भाषा मंत्री रहे। इसके अलावा Rajasthan के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और विधि एवं न्याय मंत्री रहे।
-एजेंसी

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