Stress management के जरिए योग से पाएं मनोविकारों से मुक्ति

मथुरा। Stress मानसिक स्थिति से उपजा विकार है, जो मानसिक स्थिति और परिस्थिति के बीच असंतुलन के कारण उत्‍पन्‍न होता है। सच कहें तो तनाव अनेक मनोविकारों का जन्‍मदाता है, इससे मन में अशांति तथा अस्थिर भावना का अनुभव होता है। हम योग के माध्यम से किसी भी तरह के तनाव व विकार को दूर कर सकते हैं। यह कहना है संस्कृति यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर (डॉ.) अश्वनी कुमार सिंह का। योग गुरु डॉ. अश्वनी कुमार सिंह इन दिनों मथुरा जिले के विभिन्न स्कूलों और कालेजों में छात्र-छात्राओं को योग की महत्ता तथा तनाव से बचने के उपाय बता रहे हैं।

युवा पीढ़ी के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास करना ही संस्कृति यूनिवर्सिटी का मूल उद्देश्य है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इन दिनों संस्थान द्वारा मथुरा जनपद के विभिन्न स्कूल तथा कालेजों में योग और तनाव प्रबंधन पर एक अभियान चलाया जा रहा है। संस्कृति यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर (डॉ.) अश्वनी कुमार सिंह अब तक चंदन वन पब्लिक स्कूल, माउण्ट लिट्रा स्कूल, सिम्बायसिस स्कूल आफ एक्सीलेंस, डॉ. हीरालाल इंटर कालेज, डी.ए.वी. इंटर कालेज, आर.वी.एस. बालिका कालेज तथा रमन लाल शोरावाल इंटरनेशनल गर्ल्स स्कूल के छात्र-छात्राओं को योग और तनाव प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दे चुके हैं।

इसी कड़ी में अब योग गुरु डॉ. अश्वनी कुमार सिंह कान्हा माखन पब्लिक स्कूल, बिरला स्कूल, एंजेल पब्लिक स्कूल, सनराइज पब्लिक स्कूल तथा के.डी. डेण्टल कालेज के छात्र-छात्राओं को योग की महत्ता तथा मानसिक तनाव से छुटकारा दिलाने के उपाय बताएंगे। डॉ. अश्वनी कुमार सिंह का कहना है कि किसी भी तरह के तनाव से जहां शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट पैदा होती है वहीं इससे कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। योग गुरु डॉ. सिंह का कहना है कि जब मस्तिष्क को पूरा आराम नहीं मिल पाता तथा हमेशा एक दबाव बना रहता है, ऐसी स्थिति में तनाव जन्‍म ले लेता है। तनाव से शारीरिक और मानसिक नुकसान होता है। तनाव हार्ट रेट में वृद्धि का कारण बनने के साथ रक्‍तचाप में भी वृद्धि कर देता है।

योग गुरु का कहना है कि समय का सही उपयोग कर तनाव को दूर किया जा सकता है। समय प्रबंधन से हम काम को बेहतर तरीके से निपटा सकते हैं। योग क्रिया जहां तनाव को कम करने में मददगार होती है वहीं इससे अच्छी नींद में भी मदद मिलती है। योग चिंता को न्‍यूनतम करने में भी मददगार है। डॉ. सिंह का कहना है कि छात्र-छात्राएं अपनी गतिविधियों और महत्‍वपूर्ण कामों की योजना बनाने के साथ यदि यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करें तो उन्हें सफलता हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता।

कुलपति डॉ. राणा सिंह का कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का उद्देश्य युवा पीढ़ी को शिक्षित करने के साथ ही समाज कल्याण का भी होना चाहिए। संस्कृति यूनिवर्सिटी जनपद मथुरा ही नहीं उसके आसपास के जिलों के स्कूल-कालेजों में भी छात्र-छात्राओं को योग और तनाव से बचने के उपाय सुझाएगी। संस्कृति यूनिवर्सिटी के Stress management प्रयासों से छात्र-छात्राओं के मन से जहां पढ़ाई का डर दूर होगा वहीं उन्हें निरोगी रहने में भी मदद मिलेगी।

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