Creche खोलकर पाऐं खुशियां और कमाई दोनों एकसाथ

Creche  खोलना घर बैठे पैसे कमाने का आसान विकल्प है, क्रेच में आप दूसरों के बच्चों को दिन के कुछ समय थोड़ा सा प्यार दे कर अपने अकेलेपन को दूर करने के साथसाथ पैसे भी कमा सकती हैं।

क्या है Creche 

क्रेच वह जगह है जहां बच्चों को दिन के समय घर जैसा माहौल और स्नेह दिया जाता है. वहां बच्चों को साफ रखने, गंदे कपड़े बदलने के साथ उन के खानेपीने से ले कर उन के खेलने तक का पूरा ध्यान रखा जाता है. क्रेच में बच्चों के खाने से ले कर सोने तक का समय तय रहता है. वहां उन के साथ कई हमउम्र बच्चे रहते हैं जिन के साथ वे छोटीछोटी चीजों को सीखते भी हैं.

कैसे खोलें क्रेच

अपने घर में या पड़ोस में बच्चों के हिसाब से किसी सुरक्षित जगह पर आप क्रेच खोल सकती हैं. अगर आप अपने घर में खोल रही हैं तो यह जरूर देखें कि घर में इतनी जगह हो कि बच्चे वहां आराम से रह सकें, खिलौनों से खेल सकें. घर में जगह की कमी हो तो पड़ोस में किराए पर जगह ले कर भी क्रेच खोल सकती हैं. इस के लिए आप को बच्चों के लिए कुछ खिलौने, उन की जरूरत की चीजें और कुशल मेड की जरूरत पड़ेगी, जो बच्चों को संभाल सके, उन की देखभाल कर सके.

चुनमुन चाइल्ड केयर नामक क्रेच की कमलेश बताती हैं, ‘‘मेरे पति की तबीयत ठीक नहीं रहती है. मैं उन्हें अकेला छोड़ कर बाहर काम नहीं कर सकती, इसलिए मैं ने अपने घर में बच्चों के लिए क्रेच खोला है. इस से मेरा मन भी लगा रहता है और घर में पैसे भी आ जाते हैं. मेरे पास 3 महीने से ले कर 10 साल तक के बच्चे आते हैं. बच्चों के साथ दिन कैसे बीत जाता है, पता ही नहीं चलता.’’ वे आगे बताती हैं कि 4-5 हजार रुपए खर्च कर के घर में आसानी से क्रेच खोला जा सकता है.

जरूरी सामान

क्रेच में कम से कम इतना सामान होना चाहिए कि बच्चे उन से खेल सकें. बच्चों की उम्र के हिसाब से रंगबिरंगे खिलौने और मोटरगाडि़यां, वीडियो गेम्स, कार्टून देखने के लिए टीवी, उन के सोने के लिए बैड, पढ़नेलिखने के लिए बच्चों की कुछ किताबें बाजार से खरीद लें.

बच्चों के लिए मेड

बच्चों को संभालने के लिए के्रच में कम से कम 2 कुशल मेड की जरूरत पड़ेगी, जो सुबह से शाम तक उन की सही तरीके से देखभाल कर सकें. वे उन्हें खाना खिलाएं, समय पर सुलाएं, उन्हें छोटीछोटी चीजें सिखाएं आदि. लेकिन हां, मेड के हवाले ही बच्चों को न छोड़ें, बल्कि मेड पर निगरानी रखें कि वे बच्चों को अच्छे से संभाल रही हैं या नहीं. आप चाहें तो खुद भी उन की देखभाल कर सकती हैं. कई बार ऐसा होता है कि आप का ध्यान जरा सा इधर से उधर हुआ नहीं कि मेड चोरी करने लगती है. अगर मेड ने इस तरह की गलती पहली बार की है तो उसे माफ कर दें. लेकिन अगर वह ऐसी गलती बारबार करती है तो उसे पुलिस की धमकी दे कर डराएं.

समय और फीस

क्रेच में घंटे और बच्चों की उम्र के हिसाब से फीस ली जाती है. जैसे अगर 5-6 महीने का बच्चा है और वह सुबह के 7 बजे से शाम के 7 बजे तक के्रच में रहता है तो 5-6 हजार रुपए लिए जाते हैं. अगर बच्चा सिर्फ 2-3 घंटे के लिए आता है तो 1000-1500 रुपए वसूले जाते हैं. अधिकांश क्रेच में घर वाले बच्चों को खाना व दूध पैक कर के देते हैं, लेकिन कुछ क्रेच ऐसे भी हैं जहां बच्चों को खाना भी दिया जाता है. इन क्रेचों की फीस थोड़ी ज्यादा होती है. आप अपनी सुविधानुसार इन में से कोई सा भी क्रेच शुरू कर सकती हैं.

समस्या व निदान

क्रेच में कई तरह की छोटीछोटी समस्याएं आएंगी, जैसे बच्चा लगातार रो रहा है, अचानक उस की तबीयत खराब हो जाती है, मां उसे लेने देर से आती है, बातबात पर वह झगड़ा करती है, हर बात के लिए शिकायत करती है आदि. इन समस्याओं से परेशान होने की जरूरत नहीं है बल्कि आप आसानी से इन समस्याओं का हल निकाल सकती हैं और घर बैठे पैसे कमा सकती हैं. जैसे अगर बच्चा लगातार रो रहा है, चुप नहीं हो रहा है तो पहले यह जानने की कोशिश करें कि आखिर वह क्यों रो रहा है. कई बार बच्चे गीली नैपी, भूख लगने, दांत निकलने, तबीयत खराब होने की वजह से रोते हैं. आप उन्हें गोद में उठाएं, प्यार से सहलाएं, खिलौने से उस के साथ खेलें. बच्चा थोड़ा बड़ा है तो उसे कहानी सुनाएं. लेकिन अगर बच्चे की तबीयत ठीक नहीं है तो खुद से कोई भी दवा न खिलाएं. बल्कि मातापिता को फोन पर बच्चे की तबीयत के बारे में बताएं. अगर वे दवा का नाम बता रहे हैं और बच्चे को देने के लिए कह रहे हैं तो वह दवा बच्चे को दें. इस के लिए आप अपने आसपास की दवा दुकानों के नंबर अपने पास रखें ताकि उन्हें फोन पर बता कर दवाएं मंगा सकें.

अगर क्रेच में बच्चे को किसी चीज से चोट लग जाए तो तुरंत मातापिता को इस की सूचना दें और बच्चे की प्राथमिक चिकित्सा करें.

अगर कभी बच्चे का खाना खराब हो जाए तो ऐसी स्थिति में उसे भूखा न रखें बल्कि अपनी तरफ से उसे कुछ जरूर खिलाएं, पर ध्यान रखें कि वह ताजा बना हो. बच्चे की अच्छी तरह से देखभाल करने के बाद भी कई बार ऐसा होता है कि मां झगड़ती है. शिकायत करती है कि क्रेच में उस के बच्चे का सही से ध्यान नहीं रखा जाता, उस की नैपी गीली रह गई थी, कपड़े गंदे थे, मेड ने बच्चे को डांटा आदि. ऐसी बातें सुन कर आप गुस्सा न हो जाएं बल्कि समझदारी से काम लें. उन्हें समझाएं कि क्रेच में सारे बच्चों का एकसमान ध्यान रखा जाता है. अगर नैपी गीली थी तो हो सकता है कि बच्चे ने थोड़ी देर पहले ही गीली की हो. लेकिन अगर कोई मां हर बात के लिए आप से झगड़ा करें तो उस से सारी बातें पहले ही स्पष्ट कर लें ताकि आप के बीच किसी तरह का मनमुटाव न रहे.

कभीकभी ऐसा भी होता है कि मां दफ्तर में किसी काम की वजह से या दूसरे किसी कारण से बच्चे को लेने समय पर नहीं पहुंच पाती है तो आप गुस्सा न हों और न ही बारबार फोन कर के उस से पूछें कि वह कहां है, कब तक आएगी, क्रेच बंद होने का समय हो गया है, बल्कि जब तक वह नहीं आती तब तक बच्चे को धैर्यपूर्वक अपने पास रखें. अगर कभी मातापिता के अलावा कोई अनजान व्यक्ति बच्चे को लेने आ जाए तो उसे बच्चे को न दें. वह कितना भी कहे कि वह बच्चे का परिचित है. उस के बारे में फोन पर मातापिता से पूछताछ कर लें. उस का फोन नंबर, नाम व पता पूछ कर लिख लें. इस के बाद ही बच्चे को दें.

कभीकभी आप को अचानक कहीं बाहर जाना हो और घर में दूसरा कोई जिम्मेदारी संभालने वाला नहीं है तो ऐसी स्थिति में आप अपने पड़ोसियों की मदद ले सकती हैं. उन्हें सारी चीजें अच्छे से समझा दें, ताकि कोई दिक्कत न हो. लेकिन हां, फोन पर बच्चों की खबर जरूर लेती रहें. कभी 3-4 दिन के लिए बाहर जाना हो तो इस की सूचना मातापिता को पहले से ही दें ताकि वे कुछ दूसरा उपाय निकाल सकें.

आप की भूमिका

के्रच में आप की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण होगी क्योंकि मांबाप बच्चों को आप के भरोसे ही छोड़ कर जाएंगे. आप उन्हें प्यार से रखें. उन की मां की तरह उन का खयाल रखें ताकि उन्हें उस वक्त उन की मां की कमी का एहसास न हो.

शुरुआत में आप को थोड़ी दिक्कत होगी लेकिन धीरेधीरे आप को इस काम में मजा आने लगेगा. मेड की मदद से पूरे दिन उन के खानेपीने से ले कर उन के सोने, डाइपर चेंज करने आदि का ध्यान रखें. अगर बच्चा दोढाई साल से बड़ा है तो उसे कुछ समय के लिए पढ़ाएं, कविता बोलना सिखाएं. एक सब से जरूरी बात मातापिता को पहले ही बता दें कि बच्चे के्रच के खिलौने से ही खेलेंगे. उन के साथ किसी भी प्रकार का खिलौना दे कर न भेजें क्योंकि बच्चे खिलौनों की वजह से ही आपस में झगड़ते हैं.

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