जर्मनी: एनाग्रेट क्रेंप कैरेनबावर चुनी गईं सत्ताधारी पार्टी की नेता

जर्मनी की सत्ताधारी क्रिश्चियन डेमोक्रेट यूनियन पार्टी ने एनाग्रेट क्रेंप कैरेनबावर को अपना नया नेता चुना है. वो 18 सालों से पार्टी की प्रमुख और जर्मनी की मौजूदा चांसलर एंगेला मर्केल की जगह लेंगी.
हेमबर्ग में हुए मतदान में सीडीयू पार्टी की महासचिव एनाग्रेंट क्रेंप ने करोड़पति वकील फ्रेड्रिक मर्ज़ को एक बेहद नज़दीकी मुकाबले में हरा दिया. एकेके के नाम से चर्चित एनाग्रेट ने 999 में से 517 वोट हासिल किए.
शुक्रवार को हुए पार्टी के विशेष सम्मेलन में 2021 तक देश की चांसलर रहने वाले एंगेला मर्केल ने एक भावुक विदाई भाषण दिया. एनाग्रेट क्रेंप कैरेनबावर अब देश की सबसे बड़ी पार्टी की प्रमुख होंगी और वो जर्मनी की अगली चांसलर भी हो सकती हैं. सारलैंड प्रांत की पूर्व प्रधानमंत्री एनाग्रेट क्रेंप ने कहा, “मैंने सीखा है कि नेतृत्व करना क्या होता है. सबसे ऊपर मैंने ये सीखा है कि नेतृत्व का मतलब बाहर से अधिक ज़ोरदार होने के बजाए भीतर से अधिक मज़बूत होना होता है.”
कौन हैं एकेके से हारने वाले नेता ? 
उन्होंने अपने पहले भाषण में पार्टी की एकता को सर्वोपरि रखते हुए अपने प्रतिद्वंदी फ़्रेड्रिक मर्ज़ और स्वास्थ्य मंत्री येंस स्पाह्न को मंच पर बुलाया और कहा कि अगर वो उनका साथ देंगे तो उन्हें बहुत ख़ुशी होगी.
56 वर्षीय एनाग्रेट चांसलर मर्केल की पसंदीदा उम्मीदवार भी थीं. अपने विदाई भाषण में मर्केल ने एकेके की जमकर तारीफ़ की.
मर्ज़ ने अपने साथी नेताओं से एकेके का साथ देने का आह्वान करते हुए कहा, “मैं जीतना चाहता था, लेकिन हारना भी मज़ेदार रहा.”
482 वोट पाने वाले पेशे से वकील मर्ज़ साल 2000 के दशक तक पार्टी के मज़बूत दावेदारों में शामिल थे लेकिन चांसलर से मतभेद होने के बाद वो राजनीति से अलग हो गए थे.
63 वर्षीय मर्ज़ निजी क्षेत्र में कार्य कर रहे थे और वो अमरीकी निवेश फ़र्म ब्लैकरॉक के साथ जुड़े थे.
वहीं दूसरे उम्मीदवार 38 वर्षीय येंस स्पाह्न कैबिनेट में मंत्री हैं और उन्होंने कहा है कि वो टीम में बने रहना चाहेंगे.
कौन हैं एकेके ?
अपने गृह प्रांत सारलैंड और बर्लिन में बेहद लोकप्रिय एकेके एक सीधी सरल इंसान के तौर पर जानी जाती हैं और उन्हें उनकी राजनीतिक दक्षता और शांत विश्लेषण के लिए भी पहचाना जाता है.
एनाग्रेट क्रेंप कैरेनबावर साल 1991 में एक छात्र नेता के तौर पर सीडीयू पार्टी से जुड़ीं थीं और धीरे-धीरे उन्होंने प्रांतीय स्तर पर पार्टी में जगह बना ली थी. एकेके को मर्केल की पसंदीदा शिष्या और उत्तराधिकारी के तौर पर भी जाना जाता रहा है.
साल 2000 में वो देश की पहली महिला आंतरिक सुरक्षा मंत्री बनीं थीं. वो सारलैंड की पहली महिला प्रधानमंत्री भी हैं. वो 2011 से 2018 तक इस प्रांत की प्रधानमंत्री रही हैं.
वो मर्केल की वफ़ादार हैं और माना जा रहा है कि वो उनके नक़्शेक़दम पर चलते हुए उनकी ही नीतियों को आगे बढ़ाएंगी.
हालांकि उन्होंने कई बार मर्केल के विपरीत जाकर भी वोट दिया है. वो रूस के प्रति सख़्त रवैया रखती हैं और कंपनियों के कार्पोरेट बोर्ड में महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग करती रही हैं.
समलैंगिक विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों पर उनका नज़रिया रूढ़िवादी है और वो सुरक्षा और प्रवासियों के मुद्दों पर देश की नीतियों की समीक्षा की पक्षदर हैं.
क्या कह रहे हैं लोग ?
एकेके को मिनी मर्केल या मर्केल 2.0 भी कहा जाता रहा है. वो इन दोनों ही उपनामों को पसंद नहीं करती हैं.
अपनी पार्टी के सदस्यों से उन्होंने कहा, “मैंने अपने बारे में बहुत पढ़ा है कि मैं कौन हूं और क्या हूं, मिनी, कॉपी या उन जैसी ही. प्यारे कार्यकर्ताओं, मैं जैसी हूं और जैसा जीवन ने मुझे बनाया है वैसी ही आपके सामने खड़ी हूं और मुझे अपने आप पर गर्व है.”
जर्मनी की अन्य राजनीतिक पार्टियों ने उन्हें मुबारकबाद दी है. सीडीयू की सहयोगी पार्टी के नेता और आंतरिक सुरक्षा मंत्री होर्स्ट ज़ेहोफ़र ने उन्हें बधाई दी है.
सीडीयू की सहयोगी पार्टी क्रिश्चियन सोशल यूनियन की नेता एंड्रिया नाहलेस ने ट्विट किया, “आपके पास बड़ी ज़िम्मेदारी है.”
“शुभकामनाएं. अब ये समस्याएं सुलझाने का वक़्त है. पेंशन का भविष्य सुनिश्चित करना, काम के मूल्य को सम्मान देना, यूरोप में एकजुटता को बढ़ावा देना. मैं अपना सहयोग पेश करती हूं.”
हालांकि सभी बहुत ख़ुश नहीं हैं. वामपंथी नेता साहरा वागेननेश्ट ने ट्वीट किया, “मर्केल 2.0 समाधान नहीं हैं. एकेके मर्केल की नीतियों को ही बढ़ाएंगी और सामाजिक बदलाव संभव नहीं होगा.”
-BBC

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