बेसहारा गौवंश की सेवा कर रही जर्मन महिला सुदेवी दासी को कल मिलेगा पद्मश्री सम्मान

मथुरा। पिछले करीब चार दशक से जिले के राधाकुण्ड गांव में रहकर बेसहारा गौवंश की सेवा कर रही जर्मन महिला इरिन फ्रेडरिक ब्रूनिंग उर्फ सुदेवी दासी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 16 मार्च को पद्मश्री सम्मान प्रदान करेंगे।
सुदेवी पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने के लिए पत्र मिलने के बाद दिल्ली जा चुकी हैं।
वहीं दूसरी ओर ब्रज संस्कृति एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले ब्रज के संत रमेश बाबा पद्म सम्मान हासिल करने के लिए नई दिल्ली नहीं गए। करीब 64 वर्ष पूर्व अपने पैतृक जिले इलाहाबाद से पहली बार ब्रज आए रमेश बाबा राधारानी की भक्ति में ऐसे तल्लीन हुए कि उन्होंने कभी भी ब्रज न छोड़ने का प्रण कर लिया। मान मंदिर सेवा समिति के महासचिव सुनील सिंह ने बताया, ‘बाबा दिल्ली नहीं जाएंगे। गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्र अथवा राज्य सरकार का कोई केबिनेट मंत्री उन्हें यह पुरस्कार प्रदान करने के लिए संभवतः अगले माह बरसाना भेजा जाएगा। वे यहीं यह सम्मान प्राप्त करेंगे।’
इरिन फ्रेडरिक ब्रूनिंग उर्फ सुदेवी दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में कार्यरत पिता डेट्रिच ब्रूनिंग और मां ओजोला ब्रूनिंग की इकलौती संतान हैं। 19 साल की उम्र में दुनिया के तमाम देशों की यात्रा पर निकली सुदेवी 1977 में भारत पहुंचीं। 1981 में वह मथुरा आईं। यहां उन्होंने बेसहारा गायों और उनके बछड़े-बछियों की देखभाल शुरू की। एक-दो गौवंश से प्रारम्भ हुई उनकी गौशाला में अब लगभग 1800 गौवंशीय पशु हैं।
-एजेंसियां

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