पूर्वी उप्र में खतरे के निशान के करीब पहुंची Ganga नदी, बाढ़ की आशंका

वाराणसी। देशभर में हो रही लगातार बारिश के चलते दिल्ली के साथ साथ पूर्वी उप्र में भी Ganga खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। दिल्ली की यमुना नदी में पानी का जल स्तर बढ़ जाने से यमना खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। वहीं अब उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी खतरे के निशान पर आ गई है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने गंगा नदी का वीडियो ट्वीट किया जिसमें साफ नजर आ रहा है कि गंगा में पानी का लेवल काफी ऊपर है। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते गंगा नदी का जल स्तर बढ़ गया है।

वहीं इलाहबाद में भी Ganga और यमुना में लगातार बढ़ रहा जलस्तर धीरे-धीरे खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बरसात से गंगा और मध्यप्रदेश बरसात से केन और बेतवा नदी का जलस्तर में उफान आने चंबल के रास्ते यमुना में पहुंचने से धीरे-धीरे बाढ़ की ओर बढ़ रही है। पिछले मंगलवार की तुलना में फाफामऊ में गंगा का जलस्तर शनिवार को 91 सेंटीमीटर, छतनाग में 26 सेंटीमीटर और नैनी में 15 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। गंगा का खतरे का निशान 84.734 रेखांकित किया गया है।

शनिवार को फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 79.31, छतनाग में 77.34 और नैनी में 77.97 मीटर दर्ज किया गया था। पिछले मंगलवार को फाफामऊ में 78.40, छतनाग में 77.08 और नैनी में 77.82 मीटर दर्ज किया गया था। गंगा का बहाव प्रति घंटा आधा सेंटीमीटर बढ़ रहा है। गंगा और यमुना में फिलहाल बाढ़ के खतरे के मद्देनजर नाव संचालन पर रोक लगा दी गई है। घूरपुर क्षेत्र में यमुना की बाढ़ को रोकने के लिए जीभ की आकृति की चट्टान उभरी हुई है जिसे लोग जिभिया चट्टान कहते हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि जीभ की आकार का चट्टान नहीं होती तो बाढ़ का पानी उत्तर दिशा में न जाकर पूरब की दिशा में बहता जिससे सौ से अधिक गांव बाढं में डूब जाते।

-एजेंसी

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