वाराणसी में प्रवेश द्वार पर ही सूख रही है Ganga, अस्सी से सामनेघाट के बीच 70 फीट दूर हुईं

वाराणसी। काशी में Ganga अब तक के सर्वाधिक बुरे दौर से गुजर रहीं हैं। प्रवाह और जलस्तर में भारी कमी के कारण बीच गंगा लगभग दो किलोमीटर की लंबाई में रेतीली पट्टी उभर आई है। यह पट्टी लोगों के लिए पिकनिक स्पॉट बन गये हैं। उन पर कार और बाइक दौड़ाये जा रहे हैं। सामने घाट से अस्सी के बीच गंगा घाट से 70 फीट तक दूर हो गईं हैं। जलस्तर में कमी से नाविकों को नौका परिचालन में भी दिक्कत हो रही है। उन्हें आशंका है कि गंगा का पेट यूं ही सूखता रहा तो भविष्य में काशी का पर्यटन भी बुरी तरह प्रभावित होगा।

नदी इंजीनियरिंग की भाषा में रामनगर-सामने घाट गंगा का अपस्ट्रीम है। यहीं से बनारस शहर में गंगा का प्रवेश भी होता है। दुर्भाग्य से प्रवेश द्वार पर ही गंगा की काया रोग से जर्जर, कमजोर दिख रही है।

पिछले वर्ष के 29 जून की तुलना में इस वर्ष 30 मई को ही गंगा का जलस्तर आधा मीटर से भी अधिक कम हो गया है। लीन पीरियड (बुढ़वा) यानी मार्च से जून के बीच गंगा के जलस्तर में स्वाभाविक रूप से कमी आती है पर 70-80 पार कर चुके बुजुर्गों को भी याद नहीं आ रहा है कि मई या जून में, कभी गंगा के पेट में इस तरह रेत के छोटे-बड़े मैदान बने हों।

लोग अपने दो और चार पहिया वाहनों पर परिवार, दोस्तों के साथ बीच गंगा में पहुंच रहे हैं एडवेंचरस ड्राइविंग के लिए। रेत पर गुजरते वाहनों को देखने के लिए सामने घाट पुल पर लोगों की भीड़ लग रही है। रामनगर किले से विश्वसुंदरी पुल (गंगा के ऊपर से गुजरे एनएच-2 का पुल ) के बीच दो किलोमीटर लंबी रेत देखी जा सकती है।

सामने घाट पुल से अस्सी के बीच गंगा का जलस्तर कम होने से नावें फंस जा रही हैं। यह हालत देख चिंतित नाविकों को लग रहा है कि यही हाल रहा तो पर्यटकों को नौकायन के जरिए सुबह-ए-बनारस का दीदार कराने में दिक्कत आएगी। नाव फंसने के बाद नाविकों ने कई स्थानों बांस गाड़ दिया है ताकि दूसरे नाविकों को वहां पानी कम होने का पहले से संकेत मिल जाए।

सामने घाट से टिकरी के बीच पश्चिमी किनारे पर एक गहरा स्पॉट बन गया है। यह स्पॉट करीब 50 मीटर लंबा और लगभग 25 मीटर चौड़ा है।

अब भी सहायक नदियों के भरोसे Ganga:प्रो. बीडी त्रिपाठी

पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. बीडी त्रिपाठी के अनुसार गंगा की इस स्थिति का मूल कारण जल का असीमित दोहन है। एक तो टिहरी बांध में गंगा कैद हैं। दूसरे, हरिद्वार से काफी मात्रा में गंगा का जल दिल्ली की ओर मोड़ दिया जा रहा है। बनारस तक पहुंचते-पहुंचते गंगा में महज दो से तीन फीसदी ही मूल जल बचता है। सच तो यह है कि बनारस तक पहुंचने वाला जल मूलत: दूसरी सहायक नदियों का है।

Ganga के जलस्तर में 51 सेंमी की कमी
29 जून-2017 को बनारस में गंगा का न्यूनतम जलस्तर 58.270 मीटर था। इस वर्ष एक महीना पहले ही यह जल स्तर घटकर 57.760 मीटर पहुंच गया है।  Ganga का जलस्तर पिछले वर्ष की तुलना में 51 सेंटीमीटर कम है।

-एजेंसी

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