स्टूडेंट्स के विरोध के बाद घाना यूनिवर्सिटी से हटाई गई गांधी की प्रतिमा

अक्रा। अफ्रीकी देश घाना के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय ने स्टूडेंट्स के विरोध के बाद महात्मा गांधी की प्रतिमा को परिसर से हटा दिया है। दरअसल, यहां बापू की एक कथित नस्लभेदी टिप्पणी को लेकर काफी समय से विरोध हो रहा था और आखिर में विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रतिमा को हटाना ही पड़ा।
आपको बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दोनों देशों के संबंधों के प्रतीक के तौर पर जून 2016 में घाना यूनिवर्सिटी में शांति और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया था।
हालांकि इसके कुछ महीने बाद ही यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने इसे हटाने के लिए याचिका शुरू की थी। शिकायतें मिल रही थीं कि अश्वेत अफ्रीकियों को लेकर बापू के विचार काफी नस्लीय थे।
दरअसल, प्रोफेसर ने गांधी द्वारा लिखी उस लाइन का जिक्र किया था जिसमें बापू ने दावा किया था कि अश्वेत अफ्रीकियों की तुलना में भारतीय ज्यादा बेहतर थे।
स्टूडेंट्स ने बताया कि विरोध जोर पकड़ने पर यूनिवर्सिटी के लीगन कैंपस से गांधी की प्रतिमा को मंगलवार की रात हटा लिया गया। अफ्रीकन स्टडीज संस्थान में भाषा और साहित्य विभाग के प्रमुख ओबदील कांबोन ने कहा कि प्रतिमा को हटाया जाना एक आत्म-सम्मान का मुद्दा था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
घाना के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने इतना जरूर कहा, ‘यह विश्वविद्यालय द्वारा लिया गया आंतरिक फैसला है।’ इससे पहले घाना की पूर्व सरकार ने कहा था कि विवाद को टालने के लिए प्रतिमा को किसी दूसरी जगह पर लगाया जाएगा।
यह विवाद आश्चर्यजनक है क्योंकि महात्मा गांधी को सामान्य तौर पर ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनके अहिंसक आंदोलन के लिए जाना जाता है। अफ्रीका में भी उन्हें काफी सम्मान मिलता है। दक्षिण अफ्रीका में वह 1893 से लेकर 1915 तक रहे और एक वकील के तौर पर काम किया था।
-एजेंसियां

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