आम्रपाली के 7 प्रोजेक्ट में एसबीआई कैप की तरफ से दिया जाएगा फंड

नई दिल्‍ली। आम्रपाली मामले की सुनवाई में इस बात का फैसला हुआ है कि आम्रपाली के 7 प्रोजेक्ट के लिए फंड एसबीआई कैप की तरफ से दिया जाएगा। इसकी रूपरेखा तीन हफ्ते में तैयार कर ली जाएगी।
आम्रपाली मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एसबीआई कैप ने कहा है कि वह आम्रपाली के 7 प्रोजेक्ट के लिए फंड देने को तैयार है। इसके लिए रूपरेखा तीन हफ्ते में तैयार कर ली जाएगी। सुनवाई के दौरान आठवें प्रोजेक्ट को भी फंडिंग करने के लिए एसबीआई से कहा गया तो एसबीआई कैप के वकील ने कहा कि वह इस पर विचार करेगा।
बॉयर्स के वकील एमएल लाहौटी ने बताया कि आम्रपाली मामले की सुनवाई के दौरान एसबीआई कैप की ओर से बताया गया कि वह आम्रपाली के सात प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग देने को तैयार है जो 1000 करोड़ के आसपास है।
इस के दौरान हरीश साल्वे ने कहा कि सिलिकन सिटी वन और टू, सेंचूरियन पार्क वन, टू और थ्री, हार्ट बीट सिटी वन और टू और क्रिस्टल होम के प्रोजेक्ट के लिए एसबीआई कैप फंडिंग करेगा। लेकिन इस दौरान ये भी दलील दी गई कि 12 फीसदी ब्याज लेगा। इस दौरान लाहौटी की ओर से दलील दी गई कि सेंचूरियन पार्क का प्रोजेक्ट टेरेस होम भी है उसे भी एसबीआई को अपने हाथ में लेना चाहिए। क्योंकि सेंचूरियन पार्क के तीन प्रोजेक्ट अगर एसबीआई कैप फंड करेगा तो चौथा प्रोजेक्ट अधूरा रह जाएगा और कॉमन एरिया का विकास कैसे होगा।
12 फीसदी ब्याज पर ऐतराज
तब एसबीआई के वकील ने कहा कि वह उस प्रस्ताव पर विचार करेंगे। इसी बीच लाहौटी ने एसबीआई कैप द्वारा किए जाने वाले फंडिंग के एवज में 12 फीसदी ब्याज पर ऐतराज जताया और कहा कि ब्याज का रेट काफी ज्यादा है और एसबीआई जो बाकी लोन के लिए रेट तय करता है वही रेट इस प्रोजेक्ट में फंडिंग के लिए भी लेना चाहिए। तब एसबीआई के वकील ने कहा कि वह इस प्रस्ताव पर विचार करेंगे। सुप्रीम कोर्ट को एसबीआई कैप की ओर से बताया गया कि प्रोजेक्ट फंडिंग के बारे में रूपरेखा क्या होगा और कैसे पैसे लगाए जाएंगे इस पर पूरा ब्यौरा पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तारीख तय कर दी।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि आम्रपाली मामले में स्थानीय पुलिस जो छानबीन कर रही है उसके बदले मामले की छानबीन ईओडब्ल्यू को दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत देते हुए तमाम छानबीन ट्रांसफर करने को कहा है। इसी दौरान जेपी मॉर्गन की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट स्थित यूको बैंक में उनकी ओर से कुल 187 करोड़ जमा कराए गए हैं। अदालत को बताया गया कि एनबीसीसी ने पेमेंट प्लान तैयार किया है और बॉयर्स अब उसी पेमेंट प्लान के हिसाब से भुगतान करेंगे।
सुनवाई में उठी ये बात
एनबीसीसी के पेमेंट प्लान के बारे में रिसिवर डिटेल अपलोड करेंगे। मामले की सुनवाई के दौरान ये मुद्दा उठा कि कुछ बॉयर्स के एसोसिएशन एनबीसीसी को सीधे अप्रोच कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ऐतराज जताया और कहा कि एनबीसीसी को बॉयर्स सीधे अप्रोच नहीं करेंगे।
मामले की सुनवाई के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने लीज रकम के ब्याज का मुद्दा उठाया और कहा कि एग्रीमेंट में जो रकम लिखा गया है उसे पेमेंट किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में अथॉरिटी की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट में इस दौरान लाहौटी ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिए फैसले में साफ कहा था कि आम्रपाली प्रोजेक्ट से बैंक और नोएडा व ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को बकाये का भुगतान नहीं होगा। हालांकि सुनवाई 22 जुलाई तक के लिए टाल दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने तमाम बैंकों के सीएमडी से कहा है कि वह व्यक्तिगत तौर पर होम बॉयर्स के बकाया लोन के रिलीज के मामले को देखें। पिछली सुनवाई 10 जून को आम्रपाली मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने होम बॉयर्स को बड़ी राहत दी दी थी और बैंकों को निर्देश दिया था कि वह बॉयर्स के स्वीकृत होम लोन के बैलेंस को रिलीज करे ताकि आम्रपाली के रुके हुए प्रोजेक्ट का काम हो सके। बैंकों ने कई बॉयर्स के होम लोन को एनपीए में डाल रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन होम लोन को एनपीए में भी डाला गया है उसे री स्ट्रक्चर्ड (पुनर्गठन) करे और लोन की किस्तआरबीआई के गाइडलाइंस के तहत जारी करे।
गौरतलब है कि दो दिसंबर 2019 को दिए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने फ्लैट बॉयर्स को कहा था कि वह अपनी बकाया राशि 31 जनवरी तक जमा कराए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बकाया राशि फ्लैट बायर्स एक बार में जमा करे या किश्तों में भुगतान करे ताकि रुके हुए प्रोजेक्ट का काम तेजी से पूरा हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फंड को चैनेलाइज्ड करने की जरूरत है ताकि पेंडिंग प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 3 हजार करोड़ बकाये में से 105 करोड़ रुपये बॉयर्स के आए हैं। पिछले साल 23 जुलाई को दिए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया था और कहा था कि आम्रपाली के पेंडिंग प्रोजेक्ट सरकारी कंपनी एनबीसीसी पूरा करेगा।
-एजेंसियां

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