मोदी सरकार के चार साल: 58.4% लोग रोजगार सृजन पर मोदी सरकार के काम से संतुष्ट

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर टाइम्स ग्रुप ने एक ऑनलाइन मेगा पोल किया है। ‘पल्स ऑफ द नेशन’ सर्वे में रोजगार सृजन को लेकर सरकार के अब तक के प्रदर्शन पर दिलचस्प प्रतिक्रियाएं मिली हैं। टाइम्स ग्रुप के ऑनलाइन पोल के मुताबिक बेरोजगारी चिंता का विषय तो है, लेकिन सर्वे में शामिल ज्यादातर लोग रोजगार सृजन को लेकर मोदी सरकार के कामकाज से संतुष्ट नजर आए।
सर्वे में सवाल पूछा गया था कि मोदी सरकार की सबसे बड़ी असफलता क्या है। ऑनलाइन पोल में शामिल 28.3 प्रतिशत लोगों ने माना कि बेरोजगारी के मुद्दे पर मोदी सरकार की नीति फेल रही और पर्याप्त रोजगार मुहैया कराने में सरकार नाकाम रही। हालांकि जब लोगों से बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार की कोशिशों पर सवाल किया गया, तो 58.4 प्रतिशत ने कहा कि या तो वे सरकार से संतुष्ट हैं या इस मुद्दे पर सरकार का अब तक का कामकाज बहुत अच्छा है।
21.2 प्रतिशत लोगों ने दी बहुत अच्छी रेटिंग
सर्वे में शामिल 37.2 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे बेरोजगारी के मोर्चे पर सरकार के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं, जबकि 21.2 प्रतिशत लोगों ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को ‘बहुत अच्छी’ रेटिंग दी। दूसरी ओर 36.03 प्रतिशत लोगों ने जॉब क्रिएशन (रोजगार सृजन) के लिए सरकार की कोशिशों को खराब बताया।
मोदी सरकार के कार्यकाल के चार साल पूरे होने पर 23 से 25 मई के बीच यह ऑनलाइन सर्वे कराया गया। इस ऑनलाइन पोल में कुल 8,44,646 प्रतिक्रियाएं मिलीं। वोटिंग पैटर्न को बेअसर करने के लिए पोल में शामिल लोगों से इसके नतीजे गुप्त रखे गए।
2019 में रोजगार बनेगा बड़ा मुद्दा: सर्वे
ऑनलाइन सर्वे में यह भी सामने आया है कि 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान रोजगार या इसकी कमी सबसे बड़े मुद्दों में से एक हो सकता है। विपक्ष पर्याप्त नौकरियां नहीं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करता रहा है। विपक्ष ने मोदी सरकार के अच्छे दिन के दावों पर सवाल उठाए हैं और बड़े पैमाने पर बेरोजगारी के खतरे की अनदेखी का आरोप लगाया है।
इन सबके बीच मोदी सरकार ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सरकार का कहना है कि यूपीए सरकार से उसे विरासत में बुरी हालत में इकॉनमी (अर्थव्यवस्था) मिली थी। साथ ही रोजगार के मोर्चे पर भी यूपीए का कार्यकाल पूरा होने के बाद बेहद खराब स्थिति थी। इसके बावजूद रोजगार की संभावनाओं को सरकार ने मजबूत करने में कामयाबी हासिल की। सरकार के मुताबिक काफी संख्या में उद्यमिता के अलावा सरकारी कर्ज और योजनाओं के जरिए नई नौकरियां पैदा की गईं लेकिन आधिकारिक डेटा में ये नहीं जुड़ सका है।
-एजेंसी

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