कोरोना की काट के काम में जुटे हैं भारत के चार अग्रणी संस्‍थान

नई दिल्‍ली। किलर कोरोना के कोहराम से डरे दुनियाभर के देश इसके संक्रमण पर रोक लगाने के लिए शोध कार्य कर रहे हैं। भारत में भी कोरोना का काट खोजने के लिए देश के चार अग्रणी संस्थान जुटे हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज बताया कि इन संस्थानों में कोरोना के वैक्सीन को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों का दल रिसर्च में जुटा हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल ने आज के बताया कि भारत में चार संस्थान काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी में कोरोना वायरस के वैक्सीन को लेकर रिसर्च का काम जारी है।
काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंर्तगत आने वाले इस संस्थान की स्थापना 1942 में हुई थी। इसके अंतर्गत 39 लैब और 50 फील्ड स्टेशन हैं जो भारत के कोने-कोऩे में फैले हुए हैं। यह संस्थान सांइंस और टेक्नोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रों में शोध का काम करता है।
डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी- यह संस्थान भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंर्तगत आता है। इसकी स्थापना 1986 में भारत में बायोसाइंस और तकनीकी के क्षेत्र में काम करने के लिए की गई थी।
डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी- इस संस्थान की स्थापना मई 1971 में देश में साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी के नए क्षेत्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से और देश में एक नोडल विभाग की भूमिका निभाने के लिए की गई थी। यह संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित नीतियों का निर्माण के अलावा जैव ईंधन उत्पादन, प्रसंस्करण, मानकीकरण और अनुप्रयोगों के स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास के लिए कई मंत्रालयों और विभागों के बीच में तालमेल बैठाना है।
डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी- इस विभाग की स्थापना 3 अगस्त 1954 को की गई थी। यह विभाग न्यूक्लियर एनर्जी की टेक्नोलॉजी के विकास, रेडिएशन टेक्नोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रों जैसे- कृषि, चिकित्सा, उद्योग, फंडामेंटर रिसर्च आदि के क्षेत्र में सक्रिय है।
-एजेंसियां

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