अदालत की अवमानना में दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति ने अंतत: सरेंडर किया

दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब ज़ुमा ने अदालत की अवमानना ​​के एक केस में हुई सज़ा काटने के लिए, ख़ुद को पुलिस के हवाले कर दिया है.
ज़ुमा द्वारा संचालित एक फ़ाउडेंशन ने कहा है कि वे बुधवार देर रात क्वाज़़ुलु-नताल प्रांत में अपने घर के पास, एक जेल में हाज़िर हो गए हैं. इससे पहले पुलिस ने चेतावनी दी थी कि 79 वर्षीय जैकब ज़ुमा ने बुधवार रात बारह बजे तक अगर ख़ुद सरेंडर नहीं किया तो वो उन्हें गिरफ़्तार करने के लिए तैयार है.
ज़ुमा को पिछले हफ़्ते भ्रष्टाचार की एक जाँच में शामिल नहीं होने पर 15 महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई थी.
इस पूरे मामले में जिस नाटकीय ढंग से पुलिस ने चेतावनी दी और जिस तरह ज़ुमा ने सरेंडर किया, उससे लोगों में इस केस के बारे में दिलचस्पी बढ़ी है.
जुमा ने रविवार को ख़ुद को सरेंडर करने से इंकार कर दिया था जिसके बाद पुलिस ने बुधवार आधी रात तक की समयसीमा तय की थी.
ज़ुमा के फाउंडेशन ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि “राष्ट्रपति ज़ुमा ने क़ैद के आदेश का पालन करने का फ़ैसला किया है.”
जेल जाने वाले पहले दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति
उनकी बेटी, दूदू ज़ुमा-सांबुदला ने बाद में ट्विटर पर लिखा कि उनके पिता “जेल के रास्ते में हैं और वे अभी भी प्रसन्नचित हैं.”
दक्षिण अफ़्रीका में ये पहला अवसर है जब कोई पूर्व राष्ट्रपति जेल गया हो.
ज़ुमा को 29 जून को अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार की जाँच में सबूत देने के निर्देश की अवहेलना करने के लिए 15 महीने की सज़ा सुनाई गई थी.
आरोप हैं कि उनके कार्यकाल में व्यवसायी सरकार के निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए राजनेताओं के साथ साज़िश रचते थे. लेकिन ज़ुमा ने बार-बार कहा है कि वे एक राजनीतिक साज़िश का शिकार हुए हैं.
हालाँकि उन्हें 2018 में अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस (ANC) द्वारा पद से हटाने के लिए मजबूर किया गया था, पार्टी के भीतर और ख़ासकर उनके गृह राज्य क्वाज़ुलु-नताल में उनके काफ़ी समर्थक हैं.
शानदार राजनीतिक शख्सियत का ‘शर्मनाम अंत’
बीते रविवार को ही उनके समर्थकों ने, उन्हें गिरफ़्तारी से बचाने के लिए, उनके महलनुमा घर के बाहर एक मानव ढाल बनाई थी. बुधवार को उनके आत्मसमर्पण करने से पहले भी इसी तरह की भीड़ जमा हो गई थी.
बताया जाता है कि जैकब ज़ुमा एक शानदार राजनीतिक शख्सियत रहे हैं जिन्हें दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद की नस्लवादी व्यवस्था से लड़ने के लिए जेल भेजा गया था लेकिन उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं इसलिए अब उन्हें दक्षिण अफ़्रीका की सबसे बड़ी अदालत की अवमानना ​​करने के लिए गिरफ़्तार किया गया है. ज़ुमा ऐसे ही लोकतंत्र के लिए लड़े थे जहाँ न्यायापालिका स्वतंत्र हो लेकिन अब उन्होंने अपने राष्ट्रपति पद के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों की बाढ़ पर जवाबदेही से बचने की कोशिश की है.
चोथिया के मुताबिक़ ये ज़ुमा के राजनीतिक करियर का एक शर्मनाक अंत है, मगर साथ ही दक्षिण अफ़्रीका के लोकतंत्र के लिए ये एक गर्व का पल है क्योंकि इससे पता चलता है कि कोई भी क़ानून से ऊपर नहीं है- यहाँ तक ​​कि एक पूर्व राष्ट्रपति भी नहीं.
क्या हुआ आधी रात को?
बुधवार आधी रात उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में हथियारबंद पुलिस थी.
ऐसा माना जाता है कि वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमण्डल पूर्व राष्ट्रपति को गिरफ़्तारी के लिए राज़ी करने के मक़सद से कई घंटों तक उनके घर में मौजूद रहा.
इसके बाद घर से कारों का एक काफ़िला निकला. इन्हीं में से एक में ज़ुमा भी सवार थे. इससे पहले ज़ुमा ने घोषणा की थी कि वे जेल जाने के लिए तैयार हैं.
हालांकि, उन्होंने कहा कि “मेरी उम्र में महामारी के दौरान मुझे जेल भेजना, मौत की सज़ा देने के समान है.”
ज़ुमा ने बार-बार कहा कि वे एक राजनीतिक साज़िश के शिकार हैं. उन्होंने भ्रष्टाचार की इस जाँच में केवल एक बार गवाही दी है.
-एजेंसियां

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