बसपा छोड़ समाजवादी पार्टी में पुन: शाम‍िल हुए पूर्व मंत्री अंब‍िका चौधरी

लखनऊ। प्रदेश में पूर्व मंत्री रहे अंबिका चौधरी बसपा को छोड़ आज पुन: समाजवादी पार्टी में शाम‍िल हो गए, अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। चौधरी बोले क‍ि आज का दिन मेरे लिए पुनर्जन्म के बराबर है। 68 साल के अंबिका को रोते हुए देख अखिलेश भी भावुक हो गए। उन्होंने अंबिका के आंसुओं को पोछा। अंबिका के साथ बसपा के विधायक और बाहुबली मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह और उनके बेटे मन्नू अंसारी ने भी समाजवादी पार्टी जॉइन की है।

लोकसभा चुनाव से पहले सपा छोड़ दी थी
अंबिका चौधरी एक समय में समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं में थे। हालांकि, 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने मनमुटाव के चलते बसपा जॉइन कर ली थी। एक बार फिर से घर वापसी पर अंबिका चौधरी ने कहा, ‘मेरे लिए आज का दिन पुनर्जन्म की तरह है। मेरे पास शब्दों का अभाव हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि मुझे और मेरे बेटे आनंद के साथ सब को पार्टी में जगह दी।’ आगे उन्होंने कहा, ‘मेरे मन में एक अभिलाषा है कि 2022 में अखिलेश यादव को दोबारा सीएम बनता देखूं। जो भी उपलब्धियां हैं इसी छांव की है।’

अंबिका और यह बोले-

2022 के विधानसभा चुनाव में हमारे सामने एक मात्र लक्ष्य है कि हमको हमारी सरकार बनानी है। यहां से लेकर गांव तक में सभी लोग अखिलेश यादव के साथ अपना नाम जोड़ना चाहते हैं। अभी की सरकार से सभी लोगों का मन टूटा हुआ है।
वह दिन अब दूर नहीं है। चार-छह महीने बाद फिर हमारी तकदीर बदलेगी। हमारी पूरी टीम एक साथ काम करेगी। जब तक अखिलेश यादव को सीएम की कुर्सी पर बैठा नहीं देते। बलिया का एक भी व्यक्ति नहीं बैठने वाला है।

अखिलेश बोले- नेताजी के सभी पुराने साथियों को जोड़ूंगा
अखिलेश यादव ने कहा कि इस लड़ाई में हम एक साथ आ रहे हैं। एक साथ काम करेंगे कि सपा की बहुमत की सरकार बने। मेरी कोशिश होगी कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के जितने साथी हैं, उन सभी को पार्टी से जोड़ा जाए। न जाने क्यों कुछ मजबूत रिश्ते बहुत आसानी से टूट जाते हैं। कोई कारण नहीं होता है। परिस्थितियां होती है, समय होता है। लेकिन खुशी है सब आए। राजनीति में उतार-चढ़ाव बना रहता है। बलिया के लोगों को विशेष बधाई दे देता हूं।

अखिलेश ने कहा, जिला पंचायत के चुनाव में पूरे प्रदेश में सबसे मजबूती के साथ बलिया के लोग खड़े दिखाई दिए। यही बलिया की पहचान है। समाजवादियों का सबसे गहर रिश्ता बलिया से रहा है। लखनऊ में भी सबसे बड़ी पहचान बलिया के लोगों की है। जैसे जेपी, एनआईसी बिल्डिंग। देश में अगर बीच शहर कहीं घूमने की जगह है तो वह अपने छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के नाम से चल रहे पार्क में है। आजादी का झंडे को देश में सबसे पहले किसने गाड़ा तो जवाब मिलेगा कि बलिया के लोगों ने। जिला अगर लखनऊ से न जुड़े तो विकास संभव नहीं है। पूरे प्रदेश में लोग कहीं से 4 घंटे में लखनऊ आ जाएं।

-एजेंसी

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