CIA के पूर्व निदेशक ने कहा, लादेन के बारे में झूठा श्रेय ले रहे हैं इमरान खान

वॉशिंगटन। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व निदेशक जनरल डेविड पेट्रियास ने कहा है कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन के ठिकाने के बारे में कोई सुराग नहीं दिया था। पेट्रियास का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि मंगलवार को ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दावा किया था कि ISI ने ही CIA को अलकायदा के पूर्व सरगना के बारे में जानकारी दी थी।
ISI को पता ही नहीं था
न्यूयॉर्क स्थित भारतीय दूतावास के एक कार्यक्रम में जनरल पेट्रियास ने कहा, “मैं पूरे भरोसे से कह सकता हूं कि ISI समेत पाकिस्तान की किसी खुफिया एजेंसी के पास लादेन के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। हम इस बात से भी सहमत नहीं हैं कि पाकिस्तान में किसी ने लादेन को पनाहगाह मुहैया कराई थी।” 2011 में जब लादेन मारा गया, उस वक्त जनरल पेट्रियास ने ही इस ऑपरेशन की कमान संभाली थी। उन्होंने कहा, “इस ऑपरेशन के वक्त पाकिस्तानी फौज उत्तरी वजीरिस्तान में आतंकी ठिकानों के आसपास भी नहीं पहुंच पा रही थीं।”
इमरान ने क्या कहा था?
पाकिस्तान के पीएम ने सोमवार रात अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज़ को एक इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने दावा किया था कि ISI ने अमेरिकी अफसरों को ओसामा बिन लादेन के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद ही अल कायदा के इस सरगना को अमेरिकी कमांडो ने एबोटाबाद में उसके ठिकाने पर मार गिराया था। पिछले आठ सालों से पाकिस्तान सरकार, सेना और खुफिया एजेंसी आधिकारिक तौर पर यही कहती आई हैं कि उन्हें लादेन के पाकिस्तान में होने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
डॉक्टर की रिहाई पर था सवाल
इंटरव्यू में इमरान से डॉक्टर शकील अफरीदी की रिहाई के बारे में पूछा गया। डॉक्टर अफरीदी के बारे में कहा जाता है कि उसने CIA को लादेन के ठिकाने के बारे में पुख्ता सूचना दी थी। अफरीदी को बाद में देश के खिलाफ जासूसी के आरोप में सजा सुनाई गई। वो अब भी पाकिस्तान की जेल में बंद है। अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान सरकार डॉक्टर अफरीदी को रिहा करे।
अफरीदी तो जासूस है
इमरान ने कहा था, “यह भावनाओं से जुड़ा मामला है। शकील अफरीदी को पाकिस्तान में जासूस माना जाता है। हम अमेरिका के सहयोगी थे। हमने ही उन्हें लादेन के बारे में जानकारी दी थी। हम चाहते तो हम भी उसे पकड़ सकते थे। ISI ने जानकारी लीक नहीं कि बल्कि इसे CIA के साथ शेयर किया। इसकी वजह से लादेन मारा गया। अगर आप CIS से पूछेंगे तो बताएगी कि फोन कनेक्शन के आधार पर ही पहली बार लादेन की लोकेशन मिली थी और उसे अमेरिका से शेयर किया गया था।”
-एजेंसियां

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