पुलिस के लिए ‘मोस्ट वॉन्टेड’ बने पूर्व DGP पंजाब, गिरफ्तारी वारंट जारी

चंडीगढ़। पंजाब में आतंकवाद के दौर में कभी ‘फ्री हैंड’ किए गए पूर्व पुलिस महानिदेशक DGP सुमेध सिंह सैनी अब पुलिस के लिए ‘मोस्ट वॉन्टेड’ बन गए हैं।
मोहाली कोर्ट ने पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है क्योंकि सुमेध सिंह का बीते 17 दिनों से कुछ अता-पता नहीं है। आलम यह है कि पंजाब पुलिस की छह टीम सुमेध सैनी की तलाश में जुटी हैं। इन टीमों की अगुवाई डीएसपी लेवल के अधिकारी कर रहे हैं। पुलिस की टीमों ने अब तक पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में छापेमारी की है लेकिन सुमेध सैनी को पकड़ने में नाकाम रही हैं।
दरअसल, नौ साल पुराने आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के किडनैपिंग और मर्डर केस में पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी आरोपी हैं। बीते शनिवार को मोहाली कोर्ट ने सुमेध सैनी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। साथ ही 25 सितंबर तक सैनी को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया है।
सैनी को पंजाब से आतंकवाद के खात्‍मे को मिला था ‘फ्री हैंड’
जानकारी के मुताबिक साल 2012 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सुमेध सिंह सैनी को डीजीपी नियुक्त किया था। पुलिस सूत्रों की माने तो पंजाब में आतंकवाद के दौर में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह ने सुमेध सिंह सैनी और उस समय डीजीपी रहे केपीएस गिल दोनों को ‘फ्री हैंड’ दिया था ताकि पंजाब से आतंकवाद का खात्मा हो सके। इसके बाद सुमेध सिंह पर आतंकवाद के खात्मे को लेकर कई बार कानून से बाहर जाकर काम करने के आरोप लगे थे।
पंजाब पुलिस ने किया सैनी के फरार होने का दावा
पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी के खिलाफ इस साल मई में मुल्तानी के लापता होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। साल 1991 में जब मुल्तानी लापता हुए थे तब वह चंडीगढ़ औद्योगिक और पर्यटन निगम में बतौर कनिष्ठ अभियंता कार्य रहे थे। मोहाली की कोर्ट से एक सितंबर को याचिका खारिज होने के बाद सैनी ने हाईकोर्ट का रुख किया था। पंजाब पुलिस ने तीन सितंबर को दावा किया था कि सैनी ‘फरार’ हैं। साथ ही उनकी पत्नी की सुरक्षा वापस लेने के दावे को भी खारिज कर दिया था।
सैनी पर लटक रही गिरफ्तारी की तलवार
पूर्व डीजीपी सैनी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है क्योंकि 21 अगस्त को मोहाली की अदालत ने पंजाब पुलिस को मामले में हत्या की धारा भी जोड़ने की अनुमति दे दी। यह मामला तब सामने आया जब मामले में सह आरोपी चंडीगड़ पुलिस के पूर्व निरीक्षक जागीर सिंह और पूर्व सहायक उप निरीक्षक कुलदीप सिंह मुल्तानी लापता मामले में सरकारी गवाह बन गए।
यह है पूरा मामला
यह पूरा मामला 1990 के दशक का है, जब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे। 1991 में उन पर एक आतंकी हमला हुआ। उस हमले में सैनी की सुरक्षा में तैनात चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे, वहीं सैनी खुद भी जख्मी हो गए थे। उस केस के संबंध में पुलिस ने सैनी के ऑर्डर पर पूर्व आईएएस ऑफिसर दर्शन सिंह मुल्तानी के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने उसे हिरासत में रखा और फिर बाद में कहा कि वह पुलिस की गिरफ्त से भाग गया। इस पर मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह मुल्तानी की शिकायत पर सैनी और छह अन्य के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
-एजेंसियां

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