संस्कृति यूनि. के दीक्षांत समारोह में पूर्व CJI ने दिया सफलता का मंत्र

मथुरा। गुरुवार को संस्कृति विश्वविद्यालय के हर छात्र और छात्रा के चेहरे पर कामयाबी की मुस्कान नजर आ रही थी। विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में जैसे ही मुख्य अतिथि उच्चतम न्यायालय के पूर्व CJI दीपक मिश्रा के करकमलों से प्रावीण्य सूची में प्रथम और द्वितीय स्थान हासिल छात्र-छात्राओं के गले में मेडल पहनाए जाते रहे समारोह स्थल करतल ध्वनि से गूंजता रहा। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को जहां स्वर्ण और रजत पदक से सम्मानित किया गया वहीं उन्हें मेरिट सर्टिफिकेट भी प्रदान किए गए।

former CJI gave key to success at convocation ceremony of sanskriti university
former CJI gave key to success at convocation ceremony of sanskriti university

समारोह का शुभारम्भ मुख्य अतिथि पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र, बाबा भीमराव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी लखनऊ के अध्यक्ष नियम समिति एच.सी. गनेशिया, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष सी.के. खन्ना, संस्कृति एज्यूकेशन सोसायटी के अध्यक्ष आर.के. गुप्ता, कुलाधिपति सचिन गुप्ता, उप-कुलाधिपति राजेश गुप्ता, मुकेश गुप्ता, कुलपति डा. राणा सिंह आदि ने माँ सरस्वती के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इससे पूर्व अतिथियों को समारोह स्थल तक बैंडबाजों की धुनों के बीच ले जाया गया।

कुलपति डा. राणा सिंह ने स्वागत भाषण देने के साथ ही संस्कृति विश्वविद्यालय की प्रगति के साथ उसकी भविष्य की योजनाओं पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने मुख्य अतिथि पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

मुख्य अतिथि पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र ने अपने सम्बोधन की शुरुआत सभी उपाधि प्राप्त करने वाले नवस्नातकों का उत्साहवर्धन, सभी शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए की। श्री मिश्र ने कहा कि भारत शिक्षा तथा दर्शन के लिए दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखता है। यह सब भारतीय शिक्षा के उद्देश्यों का ही चमत्कार है कि भारतीय संस्कृति ने संसार का सदैव पथ-प्रदर्शन किया है। श्री मिश्र ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रोथान के लिए प्रगतिशील सोच जरूरी है लिहाजा आप लोग महान उद्देश्य, अनुशासन, रचनात्मकता, कठिन परिश्रम जैसे गुणों के साथ राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन में उतारें। जो लोग जिन्दगी में अपने लक्ष्य पर नजर और प्रगतिशील सोच रखते हैं वही आगे बढ़ते हैं। श्री मिश्र ने छात्र-छात्राओं को गीता के श्लोकों के माध्यम से भी समझाया। इससे पूर्व श्री मिश्र ने पत्रकारों से बातचीत में संस्कृति यूनिवर्सिटी के शानदार वातावरण, कुलाधिपति सचिन गुप्ता द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे उनके प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की।

इस अवसर पर कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने कहा कि संस्कृति यूनिवर्सिटी युवा पीढ़ी को ऐसा प्लेटफार्म देने को प्रतिबद्ध है जोकि उनके करियर के साथ ही देश और समाज के विकास में अहम रोल अदा कर सके। श्री गुप्ता ने सम्मानित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि वह जहां भी रहें अपनी सकारात्मक सोच को कायम रखें। समारोह को श्री गनेशिया और श्री खन्ना ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर संस्कृति सोसायटी के ग्रुप चेयरमैन रामकैलाश गुप्ता, मुकेश गुप्ता, दिल्ली के उद्योगपति सुरेश खण्डेलवाल, संस्कृति यूनिवर्सिटी के कार्यकारी निदेशक पी.सी. छाबड़ा, ओ.एस.डी. मीनाक्षी शर्मा, डी.जी. विवेक अग्रवाल आदि उपस्थित थे। आभार एकेडमिक डीन डा. कल्याण कुमार ने माना।

इन्हें मिले गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज मेडल
अनूप कुमार इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (गोल्ड), पंकज शर्मा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (सिल्वर), मनीष यादव मेकेनिकल इंजीनियरिंग (गोल्ड), राजेश कुमार मेकेनिकल इंजीनियरिंग (सिल्वर), कृष्ण कुमार मेकेनिकल इंजीनियरिंग (गोल्ड), आशीष कुमार मेकेनिकल इंजीनियरिंग (सिल्वर), आशुतोष कुमार मिश्रा मेकेनिकल इंजीनियरिंग (ब्रांज), माधव चौधरी एम.बी.ए. (गोल्ड), सोनल अग्रवाल एम.बी.ए. (सिल्वर), निर्मल कुंतल एम.काम (गोल्ड), सुभाष सिंह एम.एस.सी. एग्रीकल्चर (गोल्ड), अजय शर्मा एम.एस.सी. एग्रीकल्चर (सिल्वर), नम्रता आर्य एम.एस.सी. बायोटेक्नोलाजी (गोल्ड), ज्योति एम.एस.सी. बायोटेक्नोलाजी (सिल्वर), रितु मावई एम.एस.सी. इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री (गोल्ड), लोकेन्द्र पाल बी.ई. स्पेशल एज्यूकेशन (गोल्ड), कुसुम गुप्ता बी.ई. स्पेशल एज्यूकेशन (सिल्वर), गरिमा अग्रवाल बी.ई. स्पेशल एज्यूकेशन (गोल्ड), शिवानी बी.ई. स्पेशल एज्यूकेशन (सिल्वर), मीनाक्षी बी.ई. स्पेशल एज्यूकेशन (गोल्ड), कीर्ति शर्मा बी.ई. स्पेशल एज्यूकेशन (सिल्वर), आत्रेय पांडेय एम.टेक (गोल्ड), प्रियंका कुमारी एम.टेक (गोल्ड), सुनीता कुमारी मास्टर आफ एज्यूकेशन (गोल्ड), अंकिता दधीच मास्टर आफ एज्यूकेशन (सिल्वर), श्रीधर दुबे मास्टर आफ एज्यूकेशन (ब्रांज), मनोज कुमार दीक्षित मास्टर आफ एज्यूकेशन (ब्रांज), रुचि झा बैचलर आफ एज्यूकेशन (गोल्ड), तरवीन सिंह बैचलर आफ एज्यूकेशन (सिल्वर), खुशबू सिंह बैचलर आफ एज्यूकेशन (ब्रांज), जुगेन्द्र सिंह डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग (गोल्ड), नवरत्न मिश्रा डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग (सिल्वर), विष्णू डिप्लोमा इन कम्प्यूटर साइंस (गोल्ड)।

इन पाठ्यक्रमों में दी गईं उपाधियां- एम.टैक (एस.ई.), एम.टैक (सी.एस.ई.), एम.टैक (पी.एस.ई.), एम.टैक (वीएलएसआई), एम.टैक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग), एम.टैक (एमडी), एमबीए, एम.काम, एमएससी एग्रीकल्चर, एमएससी बायोटेक्नोलाजी, एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री, एम.एड., बी.एड., बी.एड. स्पेशल एज्यूकेशन (एमआर), बी.एड. स्पेशल एज्यूकेशन (एच.आई.), बी.एड. स्पेशल एज्यूकेशन (एल.डी.)., डिप्लोमा (सीई), डिप्लोमा (ईई), डिप्लोमा (ई एण्ड सीई), डिप्लोमा (सीएसई), डिप्लोमा (एमई आटो. एण्ड प्रोड.), डिप्लोमा (फैशन डिजाइनिंग).

मेधावी छात्र-छात्राओं ने कहा..
संस्कृति यूनिवर्सिटी में एम.बी.ए. के छात्र रहे गोल्ड मेडलिस्ट माधव चतुर्वेदी ने कहा कि आज मैं बेहद खुश हूं। तीन साल पहले जब मैंने संस्कृति यूनिवर्सिटी में कदम रखे थे तब मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि ऐसा मुकाम हासिल करूंगा लेकिन यहां की शिक्षण व्यवस्था और अनुशासन से मुझे हौसला मिला। मैं यूनिवर्सिटी के प्राध्यापकों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे इस लायक बनाया कि मेरे एक हाथ में डिग्री तो दूसरे हाथ में नौकरी का ज्वाइनिंग लेटर था। माधव चतुर्वेदी इस समय हृदयम डिजाइन में जाब कर रहे हैं।
-माधव चतुर्वेदी एम.बी.ए. गोल्ड मेडलिस्ट

एम.बी.ए. की सिल्वर मेडलिस्ट सोनल अग्रवाल का कहना है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्कृति यूनिवर्सिटी युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श शिक्षण संस्थान है। यहां के प्राध्यापकों का स्नेह और मार्गदर्शन स्टूडेंट्स के दिमाग में कुछ नया करने का जज्बा पैदा करता है। आज मैं बेहद खुश हूं कि मुझे सम्मानित होने का अवसर मिला। मैं अपने जूनियर्स भाई-बहनों का आह्वान करती हूं कि वे उच्च शिक्षा के लिए कहीं दूर जाने की बजाय संस्कृति यूनिवर्सिटी को प्राथमिकता दें। सोनल कहती हैं कि मेरी सफलता को देखने के बाद मेरे भाई ने भी यहीं एडमीशन लेने का मन बना लिया है।
-सोनल अग्रवाल एम.बी.ए. सिल्वर मेडलिस्ट
एम.काम की गोल्ड मेडलिस्ट निर्मल कुन्तल कहती हैं कि मैं इस सफलता का सारा श्रेय संस्कृति यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक व्यवस्था और अपने गुरुजनों को देना चाहूंगी। निर्मल कहती हैं कि जब मैंने यहां प्रवेश लिया था तब सोचती थी कि कहीं मेरा फैसला गलत तो नहीं है लेकिन यहां पढ़ने के बाद मुझे अपने घर-परिवार जैसा महसूस हुआ। प्राध्यापकों ने मेरा हौसला बढ़ाया कि मैं बेहतर से बेहतर कर सकती हूं और मैं ऐसा करने में सफल रही।
-निर्मल कुन्तल एम.काम गोल्ड मेडलिस्ट
एम.टैक के गोल्ड मेडलिस्ट लखनऊ निवासी आत्रेय पांडेय का कहना है कि मैं आज बेहद खुश हूं। यह खुशी मेरे अकेले प्रयास का नतीजा नहीं है। इस खुशी में प्राध्यापकों की मेहनत समाहित है। आत्रेय कहते हैं कि संस्कृति यूनिवर्सिटी में छात्र-छात्राओं के पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाता है। मेरा मानना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी के चांसलर सर की सकारात्मक सोच इस शिक्षण संस्थान को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जरूर शिखर पर ले जाएगी।
-आत्रेय पांडेय एम.टैक गोल्ड मेडलिस्ट
एम.एस.सी. (बायोटेक्नोलाजी) की गोल्ड मेडलिस्ट नम्रता आर्य का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी खूबी यहां का पारिवारिक माहौल और प्राध्यापकों का हर पल मिलता सपोर्ट है। मैं ही नहीं कोई भी स्टूडेंट्स बिना शिक्षकों की मेहनत और मार्गदर्शन के कामयाबी हासिल नहीं कर सकता। संस्कृति यूनिवर्सिटी में न केवल शिक्षा पर बल्कि स्टूडेंट्स के करियर पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। मैं अपनी सफलता का श्रेय यूनिवर्सिटी की फैकल्टी को ही दूंगी।
-नम्रता आर्य एम.एस.सी. (बायोटेक्नोलाजी) गोल्ड मेडलिस्ट
एम.एस.सी. (बायोटेक्नोलाजी) की सिल्वर मेडलिस्ट ज्योति कहती हैं कि किसी भी शिक्षण संस्थान की विशेषता वहां का माहौल, अनुशासन और पठन-पाठन का तरीका होता है। संस्कृति यूनिवर्सिटी में वह सारी खूबियां हैं जोकि एक शिक्षण संस्थान में होनी चाहिए। ज्योति कहती हैं कि संस्कृति यूनिवर्सिटी में बिताए पांच साल उन्हें ताउम्र याद आते रहेंगे। इस शिक्षण संस्थान को यूनिवर्सिटी बने अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है लेकिन यह ब्रज मण्डल के लिए एक नजीर है।
-ज्योति एम.एस.सी. (बायोटेक्नोलाजी) सिल्वर मेडलिस्ट

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